
मानसिंह ” शरद” उज्जैन
शर्मा जी ने अपने जीवन की पूरी कमाई दोनों बेटों में बांट दी। दोनों बेटे कमाते खाते मस्त रहते हैं। विडंबना यह कि दोनों बेटों में से एक भी उन्हें अपने साथ रखने का मन नहीं बना पाया।
शर्मा जी किराए के मकान में अलग रहते हैं। सुबह का भोजन बड़े बेटे का यहां और शाम का भोजन छोटे बेटे के यहां करते हैं। अपने दादाजी की यह दशा बड़े बेटे का दस वर्षीय पुत्र निखिल बहुत समय से देख रहा था।
एक दिन वह अपने पापा से बोला ” पापा जब आप बूढ़े हो जायेंगे दूसरे समय का भोजन कहां करेंगे।”
दिल भर आया पढ़कर🙏 ये क़्या दुर्दशा हो रही है हमारे बुजुर्गों की ये नई पीढ़ी कहाँ तक जाएगी पता नही…