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कल, और आज़

निरुपमासिंह प्रसिद्ध लेखिका, बिजनौर

पल भर में बदल जाता है
सब कुछ यहाँ..
जो बीत गया
वो कल था
जो गीत बन जन्मा है
वो आज़ है..
वो कल !
क्यों याद करुँ?
जिसमें खट्टे-मीठे
तीखी शब्दावली
से ओत-प्रोत
अनुभवों का सम्मिश्रण है
जो नहीं बन सका
कभी प्रारब्ध मेरा
जो आह्लादित कर रहा है
वही तो आज़ है मेरा।।

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