“हँसी, प्यार और टॉफी”

कविता बच्चों की मासूमियत और उनके प्रिय व्यंजन—टॉफी किस्मी बार—के इर्द-गिर्द घूमती है। यह उनके खुशियों भरे छोटे-छोटे क्षणों को दर्शाती है, जैसे नन्हे-मुन्ने बच्चों का पापा से टॉफी की उम्मीद करना, जन्मदिन पर खुशी और परिवार के साथ बिताए गए प्यारे पल। कविता में न केवल मिठास बल्कि प्यार, दोस्ती और सरल जीवन की खुशियों का जश्न भी है। हर बार “प्यारी टॉफी किस्मी बार” का दोहराव बच्चों की मासूमियत और आनंद को उजागर करता है।

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कल, और आज़

कल और आज़—दोनों समय की धुरी पर खड़े हैं। जो पल बीत गया, वह केवल स्मृति है, खट्टे-मीठे अनुभवों और तीखे शब्दों से भरा हुआ। वह कल मेरा प्रारब्ध नहीं बन सका, इसलिए उसे थामे रहना व्यर्थ है। आज़, जो अभी मेरी साँसों में धड़क रहा है, वही सच्चा गीत है, वही वास्तविक उत्सव है। आज़ ही वह क्षण है जो मुझे आनंदित कर रहा है, जो मुझे जीने का कारण दे रहा है। इसलिए कल की ओर लौटकर पछताने से बेहतर है कि आज़ को पकड़कर जिया जाए।

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फूलों की माला, हवा का राग”

“हर्षित धरा, हर्षित अंबर, कोहरे की विदाई, भौंरे और तितलियों की मुस्कान। दहकते पलाश, हरे-हरे परिधान, पीली सरसों की सजती दुकान। गेहूँ और चने की झूमती बाली, कोयल की मतवाली कूक। अमलतास की झूलती डालियाँ, फूलों की माला लिए प्रीत खड़ी है द्वार पर—सारी धरती बसंत से प्यार में डूबी हुई।”

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पिंक फ्रॉक

पिंकी की ज़िद नई पिंक फ्रॉक की थी, लेकिन जब उसने अपनी सहेली मुन्नी को फटे-पुराने कपड़ों में देखा तो उसका मन बदल गया। उसने अपनी सुंदर फ्रॉक मुन्नी को दे दी। उस पल उसे समझ आया कि असली खुशी पाने में नहीं, बाँटने में है।

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