स्त्री का दर्द और समाज की सच्चाई

प्रेम, विश्वासघात और परिवार विघटन की कहानी

सरितासिंह नेपाली, प्रसिद्ध लेखिका,पश्‍चिम चंपारण, बिहार

स्त्रियां दो प्रकार से आहत होती हैं-एक, जब वे प्रेम में पड़ती हैं तब अपने प्रेमी द्वारा छली जाती हैं, क्योंकि नारी की संवेदना प्रेमी के हृदय से जुड़ जाती है, वहीं पुरुष प्रेमी सीधे उसके शरीर से जुड़ जाते हैं.
अपने प्रेमी को खो देने के डर से एक नारी अपना सर्वस्व गँवा बैठती है और बाद में अपना प्रेमी भी खो देती है.दूसरी ओर वे महिलाएँ हैं, जिनका पति उनके रहते दूसरी शादी कर लेता है और तब शुरू होता है पहली औरत पर अत्याचार का सिलसिला. कई बार तो ऐसी महिला को अपने मायके का सहारा लेना पड़ता है, परंतु यदि मायके में उन्हें सही स्थान न मिले तो एक अलग मुसीबत उनके गले पड़ जाती है. कई बार उनके बच्चे गलत संगति में पड़कर अपनी ज़िंदगी बर्बाद कर लेते हैं्

.ममता, प्रेम और त्याग की प्रतिमूर्ति कही जाने वाली महिला एक तरफ तो दारुण दुःख की अधूरी कहानी लिखती है, वहीं दूसरी तरफ परिवार को गुमराह करने के पीछे कभी-कभी उनका ही हाथ होता है.
अपने बच्चों को पालने में उनसे कई बड़ी चूक हो जाती है, जिसके कारण परिवार में फूट पड़ जाती है और परिवार का विघटन हो जाता है. बच्चे अपने दादा-दादी से दूर हो जाते हैं या कई बार वृद्ध लोगों को वृद्धाश्रम में जीवन गुज़ारना पड़ता है.नफ़रतों के बीज का रोपण नारी छोड़ दे तो समाज का नवोत्थान संभव है. इसमें पुरुष की भी अहम भूमिका होनी चाहिए्. आखिर पुरुष ऐसी बातों पर अपनी सहमति क्यों जताता है, जिससे घर, समाज और स्वयं उसका ही नुकसान होता है?

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