
डॉ. शशिकला पटेल, मुंबई
वीर जो वतन पे कुर्बान हो गये।
होकर शहीद देश की आन हो गये।।
खाई गोली सीने पर मातृभूमि की खातिर,
किस्से उन्हीं के आज गौरवगान हो गये।
धरती पर खून जो बहाया।
मातृभूमि को शौर्य से सजाया।।
इनका अर्पित जीवन स्वतंत्रता के लिए,
वीरता के नाम सर्वस्व लुटाया।।
वही तो हम सब का अभिमान हो गये।
किस्से उन्हीं के आज गौरवगान हो गये।
बहादुरी के चर्चे फैले हुए हैं दूर तलक।
बलिदान के किस्से गा रहा है फलक।।
न झुके थे, न थमे थे ये कभी दुश्मन के आगे।
लड़ते गये पाने के लिए एक आजादी की झलक।।
देकर हमें आजादी वतन के दिल-ओ-जान हो गये।
किस्से उन्हीं के आज गौरवगान हो गये।
कदम दर कदम उनकी आहट।
सावन के बौछारों की मुस्कराहट।।
विस्मृत न हो पायी शहादत,
करवटों पर दर्ज शौर्य की सुगबुगाहट।।
सर कटा के जो वतन की शान हो गये।
किस्से उन्हीं के आज गौरवगान हो गये।
