
स्मृति मिश्रा रीति, जगदलपुर (छत्तीसगढ़)
मेरा दामन बहुत साफ़ है,
कोई तोहमत लगा दीजिए॥
गलतियाँ हो भी जाएँ अगर,
मुस्कुराकर सज़ा दीजिए॥
बहके-बहके कदम हैं हमारे,
प्यार से फिर बुला लीजिए॥
वास्ता इश्क़ से है हमें,
ज़िंदगी से दुआ कीजिए॥
रहनुमा बनकर शामिल रहो,
इश्क़ फिर से नया कीजिए॥
आसरा आपसे है हमें,
दिल से दिल को मिला लीजिए॥
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बहुत ही सुंदर ग़ज़ल स्मृति जी 👏🏼👏🏼👏🏼
सुंदर अभिव्यक्ति अच्छी शब्द रचना ।
सादर आभार मीना जी🙏
Waaaaah 👌
सादर आभार मधु जी🙏