Live Wire News literary portal with Gulmohar and Rajnigandha flowers
बारिश भरी शाम में खिड़की के पास बैठा एक व्यक्ति डायरी में भावुक शायरी लिखता हुआ दिखाई दे रहा है, पास में जलती मोमबत्ती और वातावरण में प्रेम, शिकायत और अपनत्व की गहरी भावनाएं महसूस हो रही हैं।

तोहमत लगा दीजिए

“तोहमत लगा दीजिए” प्रेम, शिकायत और अपनत्व की भावनाओं से सजी एक नाज़ुक ग़ज़ल है, जिसमें रिश्तों की मिठास और दिल की गहराइयों को खूबसूरती से व्यक्त किया गया है।

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बदलते मौसम

यह कविता प्रेम में आए भावनात्मक बदलावों और रिश्ते की अनिश्चितताओं को बेहद कोमलता से व्यक्त करती है. प्रिय के बदलते व्यवहार को कवि बदलते मौसम से जोड़ता है. कविता में प्रेम, असुरक्षा, समर्पण और आपसी ज़रूरत की भावना गहराई से उभरती है. अंत में यह विश्वास व्यक्त होता है कि भले ही मौसम बदले, लेकिन सच्चे रिश्ते स्थिर रहते हैं.

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विरह

निशा की नीरवता में बैठी नायिका प्रतीक्षा में लिपटी है .हवा में भीगी चाँदनी, शरीर पर ओस की बूँदें जैसे भावना का स्पर्श कर रही हों। वह प्रिय के आगमन की राह में सजी-संवरी है, मानो सावन स्वयं प्रेम का संदेश लेकर आया हो। मन में उमड़ती आशाओं से मोतियों का हार पिरोती, पलकें प्रतीक्षा की लाली से भीग उठी हैं।

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