शब वही लेकिन नज़ारा और है
यह ग़ज़ल जीवन के बदलते नजरिए, रिश्तों के इशारों और समाज में छिपे मुखौटों को बेहद सधी हुई भाषा में उजागर करती है।

यह ग़ज़ल जीवन के बदलते नजरिए, रिश्तों के इशारों और समाज में छिपे मुखौटों को बेहद सधी हुई भाषा में उजागर करती है।