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सब लोग तेरे दीवाने

भारत में रोटी के लिए लाइन में खड़े अमीर और गरीब लोग, भूख और जीवन संघर्ष को दर्शाता भावुक यथार्थवादी दृश्य।

शशिकला पटेल, मुंबई

राह भी है तू, चाह भी है तू,
तू ही मंजिल, तू ही जुस्तजू।
हर पल फिरूँ तेरी फिराक में,
तेरी तलाश है हर घड़ी, हर सू।

पाकर भी चाहत होती नहीं खत्म,
बढ़ती ही जाए ख्वाहिशें, न हों कम।
तू ही मेरा हासिल, तू ही आरजू,
तेरी तलाश है….

बदहाल जिंदगी है, तंग हैं हालात,
तेरे अभाव में रुकते नहीं जज्बात।
आँतें भी सिकुड़कर करती कुकड़-कूँ,
तेरी तलाश है….

भागे तेरे इर्द-गिर्द धनी और निर्धन,
तू ही सबकी जरूरत, तू ही वंदन।
पाने को तुझे दर-बदर फिरूँ,
तेरी तलाश है….

ऐ रोटी, तेरे सब लोग दीवाने,
साँसों की सरगम भी गाए तेरे तराने।
रह न सकूँ बिन तेरे, गर रहना भी चाहूँ,
तेरी तलाश है….


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