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हरसिंगार: वह फूल जो गिरकर भी महकना नहीं छोड़ता |

हरसिंगार: वह फूल जो गिरकर भी महकना नहीं छोड़ता

रात में खिलने और सुबह धरती पर बिखर जाने वाला हरसिंगार केवल एक फूल नहीं, बल्कि जीवन का गहरा संदेश है। यह सिखाता है कि जीवन की सुंदरता उसकी अवधि में नहीं, बल्कि उसके द्वारा छोड़ी गई खुशबू और प्रभाव में होती है।

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उस शाम…

उस शाम का मौन बहुत कुछ कह गया। आपके कहने का इंतज़ार नहीं था मुझे, क्योंकि आपकी नज़रें और आपकी ख़ामोशी ही मेरे दिल तक उतर आई थीं। वह अहसास किसी अनदेखी धारा की तरह मेरे हृदय को छूता चला गया। आसमान पर टिमटिमाते तारे हमारे साक्षी बने और हरसिंगार की महक ने आपके मन की अनकही बात मुझ तक पहुँचा दी। हम आमने-सामने थे, और ऐसा लगा जैसे हमारे दिलों के द्वार सदियों से एक-दूसरे की प्रतीक्षा कर रहे हों। दूर तक फैली चाँदनी ने हमें घेर लिया और हरसिंगार की माला ने हमारी आत्माओं को एक सूत्र में बाँध दिया। उस पल न समय का कोई बंधन था, न दूरी की कोई दीवार—बस आप थे, मैं थी और हमारा गहरा, मौन प्रेम।

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