स्त्री शक्ति संगठन की विचार गोष्ठी
स्त्री शक्ति संगठन द्वारा आयोजित विचार गोष्ठी में ‘गुप्त रोग एवं महिलाएं’ विषय पर गंभीर चर्चा की गई। कार्यक्रम में महिलाओं के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक स्वास्थ्य पर खुलकर संवाद करने का संदेश दिया गया।

स्त्री शक्ति संगठन द्वारा आयोजित विचार गोष्ठी में ‘गुप्त रोग एवं महिलाएं’ विषय पर गंभीर चर्चा की गई। कार्यक्रम में महिलाओं के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक स्वास्थ्य पर खुलकर संवाद करने का संदेश दिया गया।
संगठन संरचना व कार्यप्रणाली पर हुआ मंथन नई दिल्ली से प्रेरणा बुडाकोटी की रिपोर्ट नई दिल्ली | स्त्री शक्ति संगठन द्वारा 31 जनवरी (शनिवार) को “संगठन संरचना एवं कार्यप्रणाली” विषय पर एक विचार गोष्ठी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व संगठन की मुख्य अध्यक्षा ममता शर्मा ने किया। गोष्ठी में विभिन्न आयु वर्ग…
ह कविता क्रिकेट के मैदान में उतरती लड़कियों के माध्यम से महिला सशक्तिकरण, आत्मविश्वास और सामाजिक रूढ़ियों के टूटने की कथा कहती है। चौके-छक्कों से लेकर इतिहास रचने तक, यह रचना बताती है कि खेल कैसे करोड़ों लड़कियों के भीतर साहस और आकाश छूने की आकांक्षा जगा रहा है।
नागपुर की प्रतिष्ठित कवयित्री मेघा मनोज अग्रवाल को समाजसेवा, हिंदी लेखन और उनकी बहुमुखी प्रतिभा के लिए राज्यस्तरीय नारी रत्न सम्मान से सम्मानित किया गया। यह सम्मान श्याम बहुउद्देशीय विकास संस्था की ओर से देवरी में आयोजित भव्य समारोह में संस्था के संस्थापक डॉ. घनश्याम निखाड़े द्वारा प्रदान किया गया। इस उपलब्धि से नागपुर का नाम गौरवान्वित हुआ है।
यह कथा कार्यस्थल पर छिपे शोषण और नकली सहयोग की पहचान कराती है। अमरबेल के सशक्त प्रतीक के माध्यम से यह संदेश देती है कि जिनकी अपनी जड़ें नहीं होतीं, वे दूसरों की मेहनत से पनपते हैं। आत्मबोध और सीमाएँ तय करना ही आत्मरक्षा और सशक्तिकरण का पहला कदम है।
शासकीय कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय, उज्जैन एवं शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, महिला कार्य, उज्जैन के संयुक्त तत्वावधान में महिला विमर्श कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का विषय “महिला स्वास्थ्य: सर्वोच्च प्राथमिकता” रहा।
हमारी बेटियों ने महिला क्रिकेट विश्व कप जीतकर भारत का दिल जीत लिया है। उन्हें बधाई के साथ ये दोहे समर्पित
कहानी राधिया नाम की झुग्गी बस्ती में रहने वाली एक स्त्री की है, जो एक समाजसेवी “मैडम जी” से मिलकर नई उम्मीदों से भर जाती है। उसे लगता है कि अब उसका जीवन बदल जाएगा . उसे नौकरी मिलेगी, सम्मान मिलेगा, और अपने बच्चों को शिक्षित कर सकेगी। पर जब वह काम के लिए मैडम जी के घर पहुँचती है, तो देखती है कि वही “मैडम जी” अपने पति के अत्याचार का शिकार हैं। यह दृश्य राधिया की सारी कल्पनाओं को तोड़ देता है। उसे एहसास होता है कि औरत चाहे अमीर हो या गरीब, उसके दर्द और संघर्ष एक जैसे हैं।
शहरों में काम करने वाले हम, जिन्हें “अस्थाई मजदूर” कहा जाता है, उनके परिवारों की कहानी अक्सर अनसुनी रह जाती है। उनकी पत्नियां अपने गांव में खेतों में मेहनत करके सब्ज़ियां उगाती हैं और उन्हें बेचकर अपने परिवार का गुजारा करती हैं। उनकी सरलता, उनकी मेहनत, उनका प्राकृतिक सौंदर्य—यह सब कभी-कभी चर्चा का विषय बनता है।