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सूर्योदय के समय चट्टान पर आत्मविश्वास से खड़ी भारतीय महिला, चेहरे पर दृढ़ता और शक्ति का भाव।

कुछ भी कहो…

“कुछ भी कहो” एक प्रेरक कविता है जो स्त्री की शक्ति, सहनशीलता, संघर्ष और आत्मविश्वास को उजागर करती है। यह कविता बताती है कि नारी केवल नाम नहीं, बल्कि सृजन और शक्ति का स्वरूप है।

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एक आत्मविश्वासी युवती सूर्योदय के समय छत पर खड़ी है, उसके पास टूटा हुआ पिंजरा पड़ा है और आसमान में उड़ते पक्षी आज़ादी और सपनों की उड़ान का प्रतीक हैं।

उड़ान

‘उड़ान’ एक प्रेरणादायक हिंदी कविता है, जो लड़कियों के आत्मसम्मान, स्वतंत्र सोच और सपनों को पंख देने की बात करती है। यह कविता समाज की बंदिशों के विरुद्ध हौसले और विश्वास का संदेश देती है।

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आत्मविश्वास से भरी एक भारतीय महिला, स्वतंत्र और सशक्त व्यक्तित्व को दर्शाती हुई

एक नारी की अभिव्यक्ति

यह कविता एक ऐसी स्त्री की आवाज़ है, जिसने रिश्तों के बोझ से ऊपर उठकर खुद को पहचानना सीख लिया है। वह अब समझौते नहीं करती, बल्कि अपने आत्मसम्मान और स्वतंत्रता के साथ जीना चुनती है।

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एक आत्मविश्वासी भारतीय महिला लैपटॉप पर काम करते हुए, चेहरे पर संतोष और सफलता का भाव, जो आत्मनिर्भरता और रचनात्मकता को दर्शाता है

रुचि अग्रवाल : खामोश सपनों से बुलंदी का सफर

रुचि अग्रवाल की यह प्रेरक कहानी बताती है कि कैसे एक गृहिणी ने जिम्मेदारियों के बीच अपने सपनों को जिंदा रखा और लेखन, वीडियो क्रिएशन व वॉइस ओवर के माध्यम से अपनी अलग पहचान बनाई। सिलीगुड़ी की निवासी रुचि आज एक सफल लेखिका हैं, जिनकी पुस्तक “बातें कुछ अनकही सी” प्रकाशित हो चुकी है और वे 25 से अधिक एंथोलॉजी का हिस्सा हैं। यह कहानी हर महिला के लिए प्रेरणा है जो अपनी पहचान बनाना चाहती है।

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माँ अपनी बेटी को मासिक धर्म के बारे में समझाते हुए, जागरूकता और स्नेह का भाव

मासिक धर्म: एक सम्मान

डॉ. रुपाली गर्ग, मुंबई मासिक धर्म चक्र, जिसे सामान्य भाषा में पीरियड्स कहा जाता है, हर महिला के जीवन की एक स्वाभाविक और महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। यह प्रकृति द्वारा स्त्री को दी गई वह जैविक व्यवस्था है, जो उसके शरीर के स्वास्थ्य और सृजन क्षमता से जुड़ी होती है। फिर भी आज भी समाज के…

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छोटे किराए के कमरे में खड़ी एक युवती, टूटी-फूटी व्यवस्था के बीच अपने नए जीवन की शुरुआत करती हुई

जीने के लिये

यह कहानी एक युवती की है, जो सपनों के साथ दिल्ली आती है, लेकिन पहले ही दिन उसे कठिन वास्तविकताओं का सामना करना पड़ता है। खराब कमरे और असहयोगी माहौल के बावजूद वह हार नहीं मानती। अपने आत्मविश्वास और जज़्बे से वह हालात को बदल देती है। यह कहानी हर उस व्यक्ति को प्रेरित करती है, जो जीवन में संघर्षों के बीच भी आगे बढ़ना चाहता है।

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गहनों की बेड़ियों में बंधी हुई एक महिला, जो समाज में नारी की स्थिति और संघर्ष को दर्शाती है

अधूरी पहचान

“नारी का अस्तित्व बस इतना सा…” कविता समाज में नारी की वास्तविक स्थिति और उसके संघर्षों को उजागर करती है। यह रचना दर्शाती है कि कैसे नारी को कभी देवी तो कभी दासी बनाकर उसके अधिकारों को सीमित किया गया। यह कविता नारी सम्मान, समानता और सशक्तिकरण का गहरा संदेश देती है।

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