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गुरु पूर्णिमा पर ज्ञान का दीप जला, रिश्तों की लौ दमक उठी”

विद्यालय में आयोजित गुरु पूर्णिमा समारोह ज्ञान, श्रद्धा और समर्पण का अनुपम संगम बन गया। संस्कृत नाट्य प्रस्तुति, गीता श्लोकों का पाठ, ध्यान सत्र और गुरु पूजन जैसे आयोजनों ने कार्यक्रम को आध्यात्मिक ऊंचाई दी। मुख्य अतिथि एसडीएम श्री बृजेश सक्सेना एवं हार्टफुलनेस टीम की उपस्थिति ने इस अवसर को और भी गरिमामय बना दिया। विद्यार्थियों द्वारा अपने गुरुजनों को सम्मानित कर गुरु-शिष्य परंपरा का जीवंत चित्र प्रस्तुत किया गया।

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उज्जैन फिर उज्जयिनी हो जाए

उज्जैन को उज्जयिनी नाम से फिर पहचान दिलाने का प्रयास चल रहा है — एक ऐसी नगरी जो विक्रमादित्य की राजधानी रही, कालिदास और भर्तृहरि की कर्मभूमि रही और जिसे साहित्य, ज्योतिष, संस्कृति और खगोल-विज्ञान की जन्मस्थली माना गया। पंडित सूर्य नारायण व्यास ने विक्रमादित्य की विरासत और उज्जयिनी के गौरव को पुनर्स्थापित करने में महती भूमिका निभाई। आज उज्जैन धार्मिक पर्यटन का केंद्र तो बन गया है, लेकिन उस उज्जयिनी का साहित्यिक, सांस्कृतिक वैभव खोता जा रहा है। अब समय है कि उज्जयिनी को उसका प्राचीन गौरव फिर से मिले — नाम से, संवत् से और सांस्कृतिक पहचान से।

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आस्था में विश्‍वास

भारत की आध्यात्मिक परंपराएं समय के साथ बदलती जरूर रही हैं, पर उनकी आत्मा आज भी उतनी ही जीवंत और शक्तिशाली है। इसका प्रमाण राजस्थान के सीकर जिले में स्थित खाटू श्याम मंदिर है, जो केवल एक तीर्थ नहीं, बल्कि विश्वास, समर्पण और भक्ति का जीवंत केन्द्र बन चुका है। विशेषकर निर्जला एकादशी और द्वादशी के पावन पर्व पर यहां आस्था का ऐसा महासंगम होता है, जो किसी भी श्रद्धालु के हृदय को अद्वितीय शांति और ऊर्जा से भर देता है।

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