तुम खो गए हो
यह ग़ज़ल एक ऐसे प्रेम की कहानी कहती है, जो साथ चलते-चलते कहीं खो गया। इसमें यादों की टीस, अधूरी मुलाकातें और इश्क़ की सच्चाई को बेहद मार्मिक तरीके से व्यक्त किया गया है। हर पंक्ति दिल के किसी कोने को छू जाती है और पाठक को अपने अनुभवों से जोड़ देती है।
