सांझ के समय सुनसान रास्ते पर खड़ा एक अकेला व्यक्ति, बिछड़ते प्रेम और यादों के दर्द को दर्शाता हुआ दृश्य

तुम खो गए हो

यह ग़ज़ल एक ऐसे प्रेम की कहानी कहती है, जो साथ चलते-चलते कहीं खो गया। इसमें यादों की टीस, अधूरी मुलाकातें और इश्क़ की सच्चाई को बेहद मार्मिक तरीके से व्यक्त किया गया है। हर पंक्ति दिल के किसी कोने को छू जाती है और पाठक को अपने अनुभवों से जोड़ देती है।

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खिड़की के पास बैठा एक व्यक्ति, डूबती शाम की रोशनी में जिंदगी की किताब के साथ भावनात्मक चिंतन करता हुआ दृश्य

राज़-ए-ज़िंदगी

यह ग़ज़ल ज़िंदगी के रहस्यों, प्रेम और अस्तित्व के गहरे एहसासों को बयां करती है। कवि ने “किताब-ए-ज़िंदगी” के रूपक के माध्यम से जीवन के अनसुलझे प्रश्नों और भावनाओं को बेहद मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया है। हर शेर जीवन के एक नए पहलू को उजागर करता है।

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जग को रोशन करने वाले मानवता, सत्य और प्रेम का प्रेरक संदेश

जग को रोशन करने वाले

“जग को रोशन करने वाले” एक प्रेरणादायक हिंदी कविता है जो पाठक को स्वयं प्रकाश बनने का संदेश देती है। यह कविता करुणा, प्रेम, सत्य और साहस के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने की प्रेरणा देती है। टूटे मनों में आशा का दीप जलाने और नफरत को पिघलाने की पुकार इस रचना को विशेष बनाती है।

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इंतज़ार में डूबी प्रेमिका, जो अपने प्रिय की याद में खिड़की के पास बैठी है

तुम दूर हो या क़रीब ?

जब संवाद थम जाता है और इंतज़ार लंबा हो जाता है, तब प्रेम अपने भीतर सवालों की शक्ल लेने लगता है। यह रचना उसी असमंजस को स्वर देती है, जहाँ नज़दीकियाँ इतनी गहरी रही हैं कि दूरी का अर्थ समझ में ही नहीं आता। प्रेम में किया गया भरोसा, व्यस्तताओं के बीच पनपती बेचैनी और यह डर कि कहीं अपना व्यक्ति धीरे-धीरे दूर तो नहीं हो रहा इन्हीं भावों के बीच यह कविता पाठक को रिश्तों की सबसे कोमल और सच्ची अनुभूति से जोड़ती है।

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साध्वी श्री शाश्वतप्रिया जी म.सा. का महिदपुर रोड में भव्य मंगल प्रवेश

साध्वी शाश्वतप्रिया म.सा. आदि ठाणा का भव्य मंगल प्रवेश

महिदपुर रोड में साध्वी श्री शाश्वतप्रिया जी म.सा. आदि ठाणा का भव्य मंगल प्रवेश। गुरुदेव जयघोष, धर्मसभा और रतलाम चातुर्मास निमंत्रण।

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A warm Indian family sitting together inside a cozy home in the evening, soft lighting, calm smiles, and a sense of love, belonging, and emotional comfort reflecting the true meaning of home.

आशियाना

घर केवल चार दीवारों का नाम नहीं, बल्कि रिश्तों, यादों और प्रेम से बना एक ऐसा आशियाना है जहाँ सुकून और अपनापन मिलता है। यह कविता घर के भीतर बसने वाली भावनाओं और रिश्तों की सच्चाई को सरल शब्दों में बयाँ करती है।

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लोहड़ी

“लोहड़ी” लघुकथा में प्रेम, मानवता और त्यौहार का सुंदर संगम है। बहु के प्रेम और समझ से सासू माँ का दिल बदलता है, और पर्व स्नेह का प्रतीक बन जाता है।

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टूटे दिल वाली स्त्री खामोशी से अंधेरे कमरे में बैठी हुई, आंखों में दर्द और विश्वासघात का भाव

मेरा संसार

यह कविता एक ऐसे टूटे हुए मन की आवाज़ है, जिसने अपने पूरे संसार को एक ही व्यक्ति में समेट लिया था. भरोसे, प्रेम और समर्पण के बदले उसे झूठ, छल और दर्द मिला. यह रचना विश्वास के टूटने से उपजे आंतरिक संघर्ष, पीड़ा और आत्मबोध को बेहद मार्मिक शब्दों में अभिव्यक्त करती है

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एक भारतीय माँ सुबह के धुंधलके में घर के दरवाज़े पर खड़ी, दूर जाते बेटे को स्नेह और उम्मीद भरी आँखों से देखते हुए.

तुम सपने ज़रूर देखना…

यह कविता सपनों के माध्यम से माँ और संतान के रिश्ते की उस गहराई को छूती है, जहाँ प्रेम स्वार्थ नहीं बल्कि त्याग बन जाता है. महानगर की चकाचौंध के बीच यह रचना याद दिलाती है कि असली ऊर्जा माँ की आँखों में छुपी होती है, और सपनों का सच होना तभी सार्थक है जब उसमें उसकी साँसें बाकी रहें.

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