अश्क नहीं, हौसला बनो
यह कविता जीवन के दुःख-सुख, हौसले और सकारात्मक सोच को दर्शाती है, जो कठिन समय में भी आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।

यह कविता जीवन के दुःख-सुख, हौसले और सकारात्मक सोच को दर्शाती है, जो कठिन समय में भी आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।
“पल-पल जीवन” कविता जीवन के निरंतर बहाव, संघर्ष और सौंदर्य को दर्शाती है। इसमें प्रकृति के माध्यम से जीवन के विभिन्न रूपों खुशी, विवशता, आशा और संघर्ष का चित्रण किया गया है। यह कविता हमें सिखाती है कि हर कठिन समय के बाद भी जीवन आगे बढ़ता रहता है और नई उम्मीदें जन्म लेती हैं।
एक मार्मिक कविता जो आधुनिक रिश्तों के छल, दिखावे और अंदरूनी सच्चाई को उजागर करती है जहां साथ होकर भी लोग अलग दुनिया में जीते हैं।
विजया डालमिया, प्रसिद्ध लेखिका, हैदराबाद रंग ज़िंदगी को खूबसूरत बनाते हैं।जीवन में हर रंग अपनी अहमियत दर्ज कराने समय-समय पर चला आता है। अमूमन हम नीले, पीले, हरे और सबसे पुराने रंगगुलाबी के बारे में जानते हैं। रंग ज़िंदगी में हों या शब्दों में… वे खुद को बयां कर ही देते हैं। आइए जानते हैं,…
यह दार्शनिक कविता जीवन को एक सराय और सुख-दुख को एक नाटक के रूप में प्रस्तुत करती है। ‘मैं’ और अहंकार के मंथन के बीच यह रचना कर्म, परिवर्तन और प्रेम की त्रिवेणी का संदेश देती है। जीवन की क्षणभंगुरता और आत्मबोध की रोशनी को उजागर करती यह कविता पाठक को भीतर झाँकने के लिए प्रेरित करती है।
यह कविता जीवन के उस कैनवास की कथा है, जहाँ धोखे और बनावटी रंग इतने फैल जाते हैं कि प्रेम, अपनेपन और आत्मा के रंग खो से जाते हैं, और बचती है केवल ख़ामोश उदासी।
“शाश्वत कर्म” एक आध्यात्मिक कविता है, जो श्रीकृष्ण भक्ति, कर्मयोग और मानव जीवन के शाश्वत सत्य को सरल और भावपूर्ण शब्दों में प्रस्तुत करती है।
चलता चल राही” एक प्रेरणादायक कविता है, जो बताती है कि जीवन की राह में कांटे, बाधाएँ और संघर्ष आएँगे, लेकिन रुकना नहीं बस चलते रहना ही विजय का मार्ग है।
मैं कविता हूँ” केवल शब्दों की रचना नहीं, बल्कि जीवन की अनुभूतियों का स्वीकार है। दुख, सुख, प्रकृति और समय के बीच कविता स्वयं को खोजती और सदा जीवित रहती है।