
नीरजा कृष्णा पटना
राजीव बहुत खुशी से चिल्लाया, “पापा! आज प्रसिद्ध वास्तुविद् जनार्दन खुराना जी हमारे यहाँ लंच पर आ रहे हैं। आप सब अच्छे से तैयारी कर लो।”
पापा, मम्मी जी और बहू ममता बहुत खुशी से तैयारी में लग गए। समय कम था, अतः सबने मिलकर उनके स्वागत की पूरी तैयारी कर ली।
नियत समय पर वे तीन-चार लोगों के साथ आए। पूरे परिवार ने उनका दिल खोलकर स्वागत किया। उन्हें भोजन बहुत पसंद आया। उन्हें पता चला… स्वादिष्ट फ्रूट क्रीम पापाजी की मेहनत का परिणाम थी और मक्खन से बने दही-बड़े मम्मी जी की करामात थे।
भोजन समाप्त होने पर वे राजीव से बोले, “चलो बेटा, पहले तुम्हारे शयनकक्ष का निरीक्षण किया जाए।”
वहाँ घुसते ही वे चौंक गए, “अरे, ये तो बहुत गड़बड़ है। मास्टर बेडरूम सदैव दक्षिण-पश्चिम कोण में होना चाहिए।”
“पर सर, ये मेरा बेडरूम है। मास्टर बेडरूम तो दक्षिण-पश्चिम कोण में ही है।”
उनके हैरानी से देखने पर बहू ने साफ-साफ कहा, “सर, हमारे घर के मास्टर तो हमारे मम्मी-पापाजी ही हैं। वही इस परिवार के मुखिया हैं… तो मास्टर बेडरूम तो उन्हीं का होगा न!”
खुराना साहब यह सुनकर अत्यंत प्रसन्न हो गए और बैठक में पैर फैलाकर अधलेटे हो गए, “जिस परिवार में इतना आपसी मेल हो… एक-दूसरे के लिए इतना प्यार और सम्मान हो… वहाँ किसी भी तरह का वास्तुदोष हो ही नहीं सकता। भोजन भी कितनी हँसी-खुशी आप लोग मिलकर बनाते हैं। अहा-अहा… मेरा मन अभिभूत हो गया।”
“फिर भी, सर! कुछ तो गाइडलाइन देते…”
“हमने तो चार लाइनों में पूरी गाइडलाइन दे दी, भई। आपके इस पवित्र मंदिर में किसी भी तरह का कोई वास्तुदोष न तो है… न कभी होगा।”
इन रचनाओं को भी पढ़ें-
साइकिल, सपने और मिल रोड
सब साथ हैं… फिर भी अकेले
देश संग खड़े रहो
लम्हा
संतुष्ट मुस्कान

क्या बात 👌🏻👌🏻