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खिड़की के पास खड़ी आत्मविश्वास से भरी महिला, नए जीवन की ओर बढ़ते हुए – प्रेरक हिंदी कहानी

खुद को हारकर, खुद को पा लिया

यह एक ऐसी महिला की प्रेरक जीवन-यात्रा है, जिसने बच्चों को शिक्षित करने के अपने जुनून से शुरुआत की, लेकिन परिवार की जिम्मेदारियों के लिए अपने सपनों को पीछे छोड़ दिया। वर्षों तक बुजुर्गों की सेवा करते-करते उसने स्वयं को भुला दिया। फिर एक दिन आत्म-अभिव्यक्ति की शक्ति ने उसे नई पहचान दी। यह कहानी समर्पण, संघर्ष, आत्मसम्मान और आत्मविश्वास के पुनर्जन्म की सशक्त मिसाल है।

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अरावली केस : सुप्रीम कोर्ट की अपने ही आदेश पर रोक

अरावली पर्वतमाला से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 20 नवंबर को जारी अपने ही आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि अगली सुनवाई 21 जनवरी 2026 को होगी और तब तक किसी भी तरह की खनन गतिविधि नहीं की जाएगी। इसके साथ ही कोर्ट ने केंद्र सरकार और अरावली क्षेत्र से जुड़े चार राज्यों राजस्थान, गुजरात, हरियाणा और दिल्लीसे इस मामले में जवाब तलब किया है।

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मोबाइल की लत में डूबा समाज दर्शाती हिंदी कविता “मोबाइल की दुनिया”

मोबाइल की दुनिया

मोबाइल आज ज्ञान, संचार और सुविधा का माध्यम है, लेकिन अंधाधुंध उपयोग ने रिश्तों, बचपन और मूल्यों को संकट में डाल दिया है। चन्द्रवती दीक्षित की यह कविता तकनीक और विवेक के बीच
संतुलन की ज़रूरत को गहराई से उजागर करती है।

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दर्द और अकेलेपन की भावना दर्शाती हिंदी कविता का भावनात्मक दृश्य

व्यथा

यह कविता मन के अनकहे दर्द, रिश्तों की टूटन, सामाजिक कलुषता और भीतर पसरे परिताप को संवेदनशील शब्दों में व्यक्त करती है। हर पंक्ति एक ऐसे मन की आवाज़ है जो कहना भी चाहता है और छिपाना भी।

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सर्द मौसम में घायल डिलीवरी बॉय टूटी घड़ी देखते हुए बाइक स्टार्ट करता हुआ, चेहरे पर थकी लेकिन व्यंग्यपूर्ण मुस्कान।

हंसी

सर्द हवा, फटा स्वेटर, तीन महीने की फीस और मां की दवाइयों के बीच जूझता एक डिलीवरी बॉय… हादसे के बाद भी समय पर डिलीवरी की चिंता। ‘हंसी’ एक ऐसी कहानी है जो संघर्ष की आग में तपते इंसान की विद्रूप मुस्कान को सामने लाती है।

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“मौन दरिया, बोलती रात”

यह कविता एक गहरे आत्ममंथन का चित्रण है, जिसमें कवि अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त करने की जद्दोजहद से गुजर रहा है। वह सोचता है कि आखिर क्या कहे, किससे कहे और कितना कहे, क्योंकि कहने की भाषा तक मौन हो चुकी है। जीवन में ऐसा सन्नाटा है जहाँ शरीर के अंग सुन्न पड़ चुके हैं और चारों ओर उदासीनता छाई है। कवि प्रश्न उठाता है कि किसके पास कितना “पानी” बचा है और किसे उसकी परवाह है। हर कोई अपनी ही धुन में, अपने ही राग में व्यस्त है। जीवन बस एक बहती हुई धारा की तरह है, जो मौन रहते हुए भी अपनी कहानी कहती जाती है।
दरिया का सन्नाटा भी मानो संदेश देता है कि कहीं ठहरना मत, आगे बढ़ते रहना। इस अंतर्द्वंद्व में कवि सोचता है कि दरिया से भी आखिर क्या कहा जाए, क्योंकि यहाँ तो भाषा भी मौन है और कोई किसी का नहीं है

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महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों पर अत्याचार बढ़े

यह लेख भारतीय समाज में महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और जनजाति समुदायों के खिलाफ बढ़ते अपराधों पर केंद्रित है। एनसीआरबी के 2023 के आंकड़े बताते हैं कि महिलाओं के खिलाफ अपराधों में लगातार वृद्धि हुई है, जिसमें घरेलू हिंसा, दहेज हत्याएं, अपहरण, बलात्कार और छेड़छाड़ के मामले प्रमुख हैं। बच्चों पर अत्याचारों में भी तेज़ी से वृद्धि हुई है, और बुजुर्ग व जनजाति समुदाय भी सुरक्षित नहीं हैं। लेख में यह भी बताया गया है कि केवल कानून और पुलिस की तत्परता ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि समाज में पुरुष प्रधान मानसिकता को बदलना और महिलाओं व बच्चों की सुरक्षा के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाना अनिवार्य है। यह स्थिति संकेत देती है कि सामाजिक और मानसिक स्तर पर व्यापक सुधार की आवश्यकता है।

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न्यायालय में कटघरे में खड़ी एक गर्भवती महिला, सामने न्यायाधीश और गंभीर माहौल।

आश्वासन

‘आश्वासन’ एक ऐसी मार्मिक हिंदी कहानी है, जिसमें एक माँ अदालत के सामने अपनी अजन्मी बेटी की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाती है। यह कहानी केवल कन्या भ्रूण-हत्या पर नहीं, बल्कि समाज, कानून और महिला सुरक्षा की वास्तविक स्थिति पर गहरा चिंतन प्रस्तुत करती है। अंत का प्रश्न पाठक के मन में लंबे समय तक गूंजता रहता है।

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जहाँ शब्द नहीं थे, वहाँ माही थी…

माही कोई साधारण लड़की नहीं थी।वह शब्दों से पहले सिसकियाँ समझती थी।घायल पशु हों या खामोश इंसान उसका मन हर पीड़ा पर ठहर जाता।
संवेदनाएँ उसकी कमजोरी नहीं, उसकी सबसे बड़ी ताकत थीं।

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क्रिकेट मैदान में खेलती लड़कियाँ महिला सशक्तिकरण और आत्मविश्वास का प्रतीक बनती हुई

लड़कियाँ क्रिकेट खेल रही हैं…

ह कविता क्रिकेट के मैदान में उतरती लड़कियों के माध्यम से महिला सशक्तिकरण, आत्मविश्वास और सामाजिक रूढ़ियों के टूटने की कथा कहती है। चौके-छक्कों से लेकर इतिहास रचने तक, यह रचना बताती है कि खेल कैसे करोड़ों लड़कियों के भीतर साहस और आकाश छूने की आकांक्षा जगा रहा है।

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