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जयपुर और भोपाल में रहने वाले राघव और रिद्धिमा की ऑनलाइन दोस्ती, भावनात्मक जुड़ाव और प्लैटोनिक सोलमेट रिश्ते को दर्शाता चित्र।

कॉफी कनेक्शन

राघव जयपुर में और रिद्धिमा भोपाल में रहती है, लेकिन दूरी उनके रिश्ते के बीच कभी नहीं आई। एक ऑनलाइन साहित्यिक मंच से शुरू हुई उनकी दोस्ती धीरे-धीरे एक ऐसे आत्मिक जुड़ाव में बदल गई, जिसे किसी नाम की जरूरत नहीं थी। दोनों एक-दूसरे को बेहतर इंसान बनने की प्रेरणा देते हैं। यह कहानी बताती है कि हर गहरा रिश्ता प्रेम नहीं होता, कुछ रिश्ते विश्वास, सम्मान और भावनात्मक सुरक्षा पर टिके होते हैं। आज की Gen Z भाषा में इसे प्लैटोनिक सोलमेट कहा जा सकता है।

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बस अब और नहीं 

सान्वी ने सुबह की सारी व्यस्तताओं से निवृत्त होकर बालकनी में बैठकर बारिश की बूंदों को निहारना शुरू किया। उसी समय उसके भीतर लंबे समय से चल रहे संघर्ष और आंतरिक तूफ़ान ने नया रूप ले लिया। अतीत के घाव, निराशा और खुद से होने वाली आत्मग्लानि ने उसे झकझोर दिया। और तभी उसने ठान लिया. बस, अब और नहीं!”उसने अपने अनवरत युद्ध को विराम देने का साहस जुटाया, और अपने अंतर्मन पर पूर्ण नियंत्रण पाकर आत्मा की जीत का अनुभव किया।

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कोई लौटा दे मेरे… वो स्कूल के दिन!

पैदल स्कूल जाना, बिना ट्यूशन के पढ़ाई, सादगी भरा जीवन और माता-पिता की निश्चिंतता। सुविधाओं की कमी के बावजूद उस दौर में संतोष, आत्मनिर्भरता और खुशियों की भरपूर अनुभूति थी, जो आज की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में दुर्लभ हो गई है।

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घने विशाल पेड़ की गहरी छाया में धूप के लिए संघर्ष करते छोटे पौधे, विकास और असमानता का प्रतीक दृश्य।

विशालता की छाया में दम तोड़ता विकास

यह लेख हमारे समय के उस भ्रम को उजागर करता है जिसमें “बड़े होने” को ही “बेहतर होने” का पर्याय मान लिया गया है, और बताता है कि कैसे यही सोच नई प्रतिभाओं और अवसरों को दबा देती है।

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81 वर्षीय पिता फोन पर बात करते हुए, सामने चिंतित बेटा-बहू और लैपटॉप-मोबाइल के साथ साइबर ठगी का दृश्य, घर में पुलिस पहुंचती हुई

81 साल के पिता बने हीरो, बेटे को ठगी से बचाया

: जहां साइबर ठग अक्सर बुजुर्गों को निशाना बनाकर उन्हें डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाते हैं, वहीं निगडी में एक 81 वर्षीय पिता ने अपनी सूझबूझ से ठगों की पूरी साजिश नाकाम कर दी. उनकी सतर्कता से उनके बेटे और बहू को लाखों रुपये की ठगी से बचाया जा सका.

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खिड़की के पास बैठा उदास व्यक्ति, विरह और प्रतीक्षा के भाव दर्शाता दृश्य।

दीद उसकी

यह ग़ज़ल प्रेम, विरह और प्रतीक्षा की सूक्ष्म अनुभूतियों को शब्द देती है। मीरा, कृष्ण और स्मृतियों के प्रतीकों के माध्यम से प्रेम की पीड़ा और गहराई को सुंदर ढंग से व्यक्त किया गया है।

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उज्जैन गर्मी समाचार

अप्रैल में ही भीषण गर्मी का प्रकोप, पारा 43 डिग्री पार

उज्जैन में भीषण गर्मी का प्रकोप, तापमान 43 डिग्री पार. प्रशासन ने 1 से 8वीं तक के स्कूल बंद किए, 9–12वीं का समय बदला. जानिए पूरी खबर.

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मैं कैसे हार मान लूं…

यह प्रेरणादायक लेख ज़िंदगी के संघर्षों और कठिनाइयों के बीच उम्मीद और दृढ़ता का संदेश देता है। लेखक बताती हैं कि हर ठोकर, हर असफलता और हर कठिन समय हमें मजबूत बनाता है। हार मानना केवल सपनों और उम्मीदों को छोड़ देना है। जीवन की जीत सिर्फ व्यक्तिगत नहीं, बल्कि हमारे परिवार, समाज और सपनों की जीत है। यह रचना हमें याद दिलाती है कि जब तक साँस है, तब तक उम्मीद है, और हमारे दिल की आवाज़ हमेशा यही कहती है—“मैं कैसे हार मान लूं?”

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अब 31 अक्टूबर तक सिर्फ 75 रुपये में देख सकेंगे शिवसृष्टि

छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन, संघर्ष और गौरवशाली इतिहास को दर्शाने वाली शिवसृष्टी थीम पार्क में रियायती दरों का आनंद अब 31 अक्टूबर तक लिया जा सकेगा। 15 मई से शुरू हुई इस पेशकश के बाद तीन महीनों में 1.5 लाख से अधिक लोगों ने यहां आकर शिवकाल का अद्भुत अनुभव किया। जनता की भारी मांग और अभय भुतड़ा फाउंडेशन के 75 लाख रुपये के अतिरिक्त सहयोग को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है।
महाराजा शिवछत्रपति प्रतिष्ठान के ट्रस्टी एवं शिवसृष्टी परियोजना के अध्यक्ष जगदीश कदम ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि अभय भुतड़ा फाउंडेशन पहले भी 50 लाख रुपये का दान दे चुका है।

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