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एक रोमांटिक दृश्य जो प्रेम, एहसास और दिल की गहराई को दर्शाता है

सुनो साहिब…

“सुनो साहिब” एक कोमल और गहरी भावनाओं से भरी कविता है, जो प्रेम के उस एहसास को व्यक्त करती है जहाँ दो दिल धीरे-धीरे एक-दूसरे में समाने लगते हैं। यह रचना बताती है कि सच्चा प्रेम केवल शब्दों में नहीं, बल्कि हर सांस, हर धड़कन और हर ख्वाब में बस जाता है। जब मोहब्बत अपनी गहराई पर पहुँचती है, तो इंसान खुद को भी अपने प्रिय के भीतर खोजने लगता है। यह कविता समर्पण, अपनापन और आत्मीय जुड़ाव की खूबसूरत अभिव्यक्ति है।

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मन की भावनाओं के सैलाब और नदी के प्रतीक के माध्यम से जीवन, संघर्ष और प्रतीक्षा को दर्शाती हिंदी कविता

मन की नदी में उठता सैलाब

यह कविता मन की गहराइयों में उठते भावनाओं के सैलाब को नदी के रूपक के माध्यम से व्यक्त करती है। कभी शांत तो कभी उफनती यह मन की धारा जीवन के संघर्ष, पीड़ा और प्रतीक्षा को अपने साथ बहा ले जाती है। घाट, शिवलिंग, मणिकर्णिका और लहरों के प्रतीक इस यात्रा को आध्यात्मिक और यथार्थ दोनों रूपों में प्रस्तुत करते हैं। यह रचना केवल भावनाओं का प्रवाह नहीं, बल्कि अस्तित्व की खोज, टूटन और समर्पण का भी चित्रण है, जहाँ अंततः प्रतीक्षा भी थककर समाप्त हो जाती है।

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कैक्टस: एक स्त्री की पीड़ा, प्रेम और स्वाभिमान की मार्मिक कहानी

कैक्टस

जूही दी की कहानी सिर्फ एक स्त्री की नहीं, बल्कि उन अनगिनत महिलाओं की दास्तान है जो रिश्तों को निभाते-निभाते खुद को खो देती हैं. जीवन भर उपेक्षा और भावनात्मक पीड़ा सहने के बाद जब बीमारी ने उनके शरीर को जकड़ लिया, तब भी उनके भीतर स्वाभिमान जीवित रहा. “कैक्टस” की तरह चुभते रिश्तों के बीच जीती हुई जूही दी अंततः एक ऐसे निर्णय के सामने खड़ी थीं, जहां दर्द से मुक्ति और आत्मसम्मान की रक्षा ही उनकी अंतिम इच्छा बन गई.

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माएं कभी बूढ़ी नहीं होती, बस हम बदल जाते हैं

माएं कभी बूढ़ी नहीं होती

माएं कभी बूढ़ी नहीं होतीं, उनकी उम्र भले ही बढ़ जाए, लेकिन ममता हमेशा जवान रहती है. जिस मां ने अपना पूरा जीवन बच्चों की परवरिश में समर्पित कर दिया, वही मां एक समय ऐसा भी देखती है जब उसकी चिंता बच्चों को बोझ लगने लगती है. यह लेख उसी बदलते रिश्ते की सच्चाई और मां के त्याग को गहराई से महसूस कराने की एक संवेदनशील कोशिश है.

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मुंबई के सांताक्रुज में निर्मला फाउंडेशन के कवि सम्मेलन में मंच पर उपस्थित कवि और अतिथि

मुंबई में सजी साहित्य की महफिल

मुंबई के सांताक्रुज में निर्मला फाउंडेशन द्वारा आयोजित भव्य कवि सम्मेलन और सम्मान समारोह में साहित्यकारों, कलाकारों और समाजसेवियों का सम्मान किया गया।

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लखनऊ में अंतर्राष्ट्रीय कवि सम्मेलन के दौरान बाल कवियित्री मिहूं अग्रवाल को सम्मानित करते हुए अतिथि

नागपुर की बाल कवियित्री मिहूं अग्रवाल सम्मानित

लखनऊ में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय कवि सम्मेलन में नागपुर की बाल कवियित्री मिहूं अग्रवाल को उनकी उत्कृष्ट साहित्यिक प्रतिभा के लिए अंतर्राष्ट्रीय सम्मान से नवाजा गया।

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एक उदास रात में हल्की बारिश के बीच पीली स्ट्रीट लाइट के नीचे खड़ा एक अकेला व्यक्ति, गीली सड़क पर रोशनी की परछाईं और दूर धुंध में जाती हुई एक स्त्री की आकृति, यादों और जुदाई का भावपूर्ण दृश्य।

इश्क़, इंतज़ार और तन्हाई

यह ग़ज़ल यादों की उस नरम आहट को पकड़ती है, जो कभी चुपचाप दिल में उतर जाती है और फिर उम्रभर साथ रहती है। इसमें मोहब्बत के वो पल हैं, जो पूरे होकर भी अधूरे रह जाते हैं. नज़रों का झुकना, लबों का काँपना और मिलने से ज़्यादा बिछड़ने की कसक। हर शेर में एक ऐसी तन्हाई है, जो सिर्फ महसूस की जा सकती है, बयान करना आसान नहीं।

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