कैमरे के पीछे की कहानी: कैसे दोस्ती ने रचा सैयारा का जादू

अहान पांडे और अनीत पड्डा की ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री किसी रणनीति का नतीजा नहीं, बल्कि सच्ची दोस्ती से उपजी एक स्वाभाविक जादू है, जिसने दर्शकों के दिलों में खास जगह बना ली है.

Read More
BMW Motorrad India 1 जनवरी 2026 से कीमतों में करेगी 6 प्रतिशत तक बढ़ोतरी

BMW Motorrad India- 1 जनवरी 2026 से कीमतों में करेगी 6 प्रतिशत तक बढ़ोतरी

BMW Motorrad India ने 1 जनवरी 2026 से अपने पूरे उत्पाद रेंज की कीमतों में अधिकतम 6 प्रतिशत तक बढ़ोतरी करने की घोषणा की है. BMW Group India के प्रेसिडेंट और सीईओ हरदीप सिंह बराड़ ने कहा कि भारतीय रुपये के अमेरिकी डॉलर और यूरो के मुकाबले तेज़ मूल्यह्रास के कारण विदेशी मुद्रा का दबाव पिछले कई महीनों से बना हुआ है. इसके साथ ही कच्चे माल और लॉजिस्टिक्स की लागत भी प्रभावित हुई है. प्रस्तावित मूल्य वृद्धि से कंपनी और डीलर भागीदारों के लिए आवश्यक लाभप्रदता सुनिश्चित करने और निरंतर मूल्य सृजन में मदद मिलेगी.

Read More
“1990 के दशक का भारतीय घर जिसमें टेपरिकार्डर, कैसेट और मटके पर रखा स्पीकर देसी जुगाड़ साउंड सिस्टम के रूप में इस्तेमाल हो रहा है”

बेबी को बेस पसंद है

स सिर्फ़ आवाज़ नहीं होता, वह एक जुनून होता है। टेपरिकार्डर, कैसेट और जुगाड़ से पैदा हुआ वह गूंजता बेस, जो साधारण मशीन को भी महफिल बना देता था। मटके पर उल्टा रखा स्पीकर सिर्फ़ प्रयोग नहीं था, वह उस दौर की रचनात्मक ज़िद थी जहाँ साधन कम थे, पर शौक़ और शरारत दोनों भरपूर थे। और हाँ, घर से थोड़ी दूर रहने वाली ‘बेबी’ को भी वही बेस पसंद था।

Read More

अपुन की दादीगीरी

पाँचवीं से छठवीं में कदम रखते ही स्कूल मेरे लिए पढ़ाई से ज़्यादा एक अजीब अनुभव बन गया था। कक्षा में न विद्यार्थी थे, न प्रतिस्पर्धा सिर्फ़ मैं और मेरा वर्चस्व। पिता का अनुशासन, स्कूल में उनका रुतबा और मेरी अकेली उपस्थिति ने मुझे अनजाने ही “दादीगीरी” का ताज पहना दिया। यह दादीगीरी डर से नहीं, परिस्थितियों से उपजी थी. जहाँ सीखने के साथ-साथ प्रभुत्व भी अभ्यास का हिस्सा बन गया।

Read More

स्त्री : ‘एक मैनुअल’

समाज ने औरत के अस्तित्व को एक ऐसे समीकरण में बैठाया है जो कभी भी अपना फॉर्मूला बदल सकता है मनचाहा उत्तर पाने के लिए । व्यंग है दोहरे मापदंड वाले समाज पर जो औरत को हर पल एक स्केनर के नीचे रखता है ।

Read More

मतवाले नयन

आँखें केवल देखने का माध्यम नहीं होतीं, वे भीतर छुपे भावों की सबसे सशक्त भाषा होती हैं। जब शब्द असहाय हो जाते हैं, तब नयन ही संवाद का कार्य संभालते हैं। कभी शिकायत, कभी शरारत, कभी विद्रोह आँखों की हर गति मन के भीतर चल रहे परिवर्तन को प्रकट कर देती है। वे मनोभावों की कुशल गुप्तचर हैं, जो बिना कुछ कहे भी सब कुछ कह जाती हैं।

Read More

ज़िंदगी

ज़िंदगी मिली तो है, लेकिन ठंड, बेबसी और हालातों की मार ने उसे जीने का संघर्ष बना दिया है. वादों और प्रलोभनों में इस्तेमाल होकर, ज़िंदगी अक्सर फुटपाथों और अंधेरों में भुला दी जाती है.

Read More

दुविधा का रंग

यह जीवन की वह अवस्था है जहाँ न बचपन की मासूमता पूरी तरह बची है, न बुढ़ापे का सुकून मिला है। जिम्मेदारियों के बीच खड़ा इंसान कभी समाज की अपेक्षाओं को सुनता है, तो कभी अपने दिल की धीमी पुकार को। इसी द्वंद्व में वह खुद को पहचानता है और समझता है कि यही सफ़र जीवन का असली रंग है।

Read More

मुझे ज़िंदगी में तिजारत करना नहीं आया

जिसे जीवन में तिजारत नहीं, इंसान बने रहना सिखाया गया। पिता की सुरक्षा-केंद्रित सोच, मेले की छोटी-सी नौकरी और पहला व्यापारिक असफल अनुभव सब मिलकर यह बताते हैं कि हर हार नुकसान नहीं होती, कुछ हारें मनुष्यता बचा लेती हैं।

Read More

झंकार में दबा इंतज़ार

पायल और कंगनों की झंकार के बीच प्रेमिका अपने ही मन की उलझनों में बंधी है। आँसू, उदासी और अधूरी चाहत उसे प्रिय से मिलने से रोक रही हैं, और रात चाँद के साथ उसका मौन साक्षी बन जाती है।

Read More