ममता की छाया है माँ
यह कविता माँ के निस्वार्थ प्रेम, स्नेह और हर कठिन परिस्थिति में संतान का सहारा बनने वाले उनके अनमोल स्वरूप को सुंदर शब्दों में व्यक्त करती है।

यह कविता माँ के निस्वार्थ प्रेम, स्नेह और हर कठिन परिस्थिति में संतान का सहारा बनने वाले उनके अनमोल स्वरूप को सुंदर शब्दों में व्यक्त करती है।
यह माँ के बिछड़ जाने के बाद भी हर याद, हर एहसास और हर छोटी चीज़ में उनकी मौजूदगी को महसूस करने की मार्मिक अनुभूति को शब्द देता है।
यह लेख एक ऐसे अनमोल रिश्ते की भावनात्मक अभिव्यक्ति है, जहाँ एक लड़की “पार्थ” कहकर केवल पुकारती नहीं, बल्कि टूटते हुए मन को साहस, अपनापन और पहचान भी देती है।
यह रचना उस मन की आवाज़ है जो केवल साथ नहीं, बल्कि ऐसा प्रेम चाहता है जो खामोशियों को भी समझ सके और बिखरी हुई रूह को अपना घर दे सके।
यह रचना आत्मखोज की उस गहन यात्रा को दर्शाती है, जहाँ इंसान दुनिया की भीड़ से निकलकर अपने भीतर के सत्य, शांति और वास्तविक अस्तित्व से मिल पाता है।
यह कविता माँ के उस अथाह प्रेम, त्याग और संघर्ष को समर्पित है, जो अपने बच्चों की खुशियों और भविष्य के लिए हर कठिनाई सहकर भी मुस्कुराती रहती है।
यह कविता माँ की ममता, उसके संघर्ष, त्याग और बच्चों के लिए उसके अथाह प्रेम को बेहद भावुक और सुंदर शब्दों में प्रस्तुत करती है।
यह कविता माँ के साथ बिताए गए उन अनमोल पलों की स्मृतियों को सजीव करती है, जहाँ ममता, त्याग, अनुशासन और प्रेम की खुशबू हर शब्द में महसूस होती है।