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रह गया तो रह जाने दो

जीवन क्षणभंगुर है, और प्यार भी कुछ लम्हों का होता है। कभी-कभी साथ रहते हुए भी पल दूर हो जाते हैं। यादें, थोड़ी खुशी और थोड़े ग़म के साथ, हमें हर पल जीना सीखना होता है। जो आज है, वह कल नहीं रहेगा, इसलिए हर अनुभव को पूरी गहराई से महसूस करना ही जीवन का सार है।

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हाँ, मौन हूँ मैं कहानी

हाँ, मौन हूँ मैं

कभी-कभी स्त्री इसलिए मौन नहीं होती कि उसके पास कहने को कुछ नहीं होता, बल्कि इसलिए कि उसके शब्दों को सुनने वाला कोई नहीं होता। ‘हाँ, मौन हूँ मैं’ एक ऐसी लेखिका की कहानी है, जिसने अपने प्रेम और रिश्ते को बचाने के लिए अपने सपनों को चुप करा दिया, लेकिन अंततः उसका मौन समझा गया और उसके शब्दों ने फिर जन्म लिया।

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कपिल दा जवाब नहीं

देश को पहला क्रिकेट विश्व कप दिलाने वाले महान ऑलराउंडर और पूर्व कप्तान कपिल देव का उज्जैन दौरा पूरी तरह सादगी और अपनत्व से भरा रहा. मंगलवार को अल्प प्रवास पर उज्जैन पहुंचे कपिल देव ने किसी औपचारिक कार्यक्रम या प्रोटोकॉल से दूरी रखते हुए आम लोगों और बच्चों के बीच समय बिताया.

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आधुनिक समाज के दिखावे और बाहरी चमक में खोते मानवीय मूल्यों को दर्शाती प्रतीकात्मक कलात्मक छवि।

दोगले दिखावे में डूबी सभ्यता

यह कविता आधुनिक समाज के दिखावे, दोगलेपन और खोते मानवीय सलीके पर सवाल उठाती है। बाहरी चमक और भाषा के आडंबर में दबते चरित्र और विचारों की मार्मिक तस्वीर प्रस्तुत करती है।

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त्याग, संघर्ष और चिरनिद्रा

पिताजी चौबीसों घंटे की चौकीदारी करते रहे। दिन-रात की दोहरी ड्यूटी, बस कुछ घंटों की अधूरी नींद और एक छोटे से केबिन में सिमटी ज़िंदगी—यही उनका संसार था। मैंने जब जाना कि बाबूजी महीनों तक मुश्किल से दो-तीन घंटे ही सो पाते हैं, तो मेरा दिल काँप उठा। इतना बड़ा त्याग उन्होंने सिर्फ़ इसीलिए किया कि मैं पढ़-लिख सकूँ और परिवार संभल सके। उनके संघर्ष को याद कर आज भी लगता है—किसी इंसान की मजबूती और प्यार का सबसे सच्चा रूप शायद पिता ही होते हैं।

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हम गज़ल कहने लगे…

जब से लोग खून-खराबे को भी उत्सव का नाम देने लगे, तभी से पुराने घाव फिर से हरे होने लगे। शहर इतना खामोश हो गया है कि हादसों की आवाज़ भी नहीं उठती, क्योंकि यहाँ खुशनुमा चेहरों के बीच कलमें झुककर रह गई हैं। घुँघरुओं का दर्द अब नया नहीं लगता, क्योंकि बारूद से सजे कारवाँ चलने लगे हैं। इशारों की भाषा भी लोगों को समझ नहीं आती, दोस्ती के हाथ बेवजह कटने लगे हैं। सहमी हुई फिज़ाओं में रात भी ढलती नहीं, क्योंकि मोहब्बत के दिए तूफ़ानों से लड़ने लगे हैं। और यही कारण है कि ‘राकेश’ अब सियाह रातों में सर नहीं उठाता क्योंकि जंगें हारने के बाद लोग ग़ज़लें कहने पर मजबूर हो जाते हैं

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‘उरी’ से घर तक आया ‘विहान’

बॉलीवुड अभिनेता विक्की कौशल और कैटरीना कैफ ने बेटे के जन्म के दो महीने पूरे होने पर उसका नाम ‘विहान कौशल’ सार्वजनिक किया. दिलचस्प बात यह है कि इस नाम का जुड़ाव विक्की की सुपरहिट फिल्म ‘उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक’ से भी है. बेटे की पहली झलक साझा करते हुए कपल ने अपनी खुशियों और भावनाओं को फैंस के साथ बांटा.

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माँ एक दैवीय शक्ति

दिनभर की भागदौड़ के बाद भी जाह्नवी के मन में अपनी नन्ही बेटी की यादें बेचैनी बनकर उमड़ती रहीं। अंधेरी राहों पर अकेले चलती हुई माँ की यह यात्रा सिर्फ घर लौटने की नहीं, बल्कि मातृत्व की उस दैवीय शक्ति का प्रमाण थी जो हर बाधा को पार कर जाती है। जब मन सच्चा हो, तो ईश्वर भी मददगार बनकर रास्ते में उतर आते हैं।

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रात के शांत वातावरण में अकेली स्त्री, चाँदनी और स्मृतियों में डूबी भावनात्मक अनुभूति का दृश्य।

स्मृति और… तुम!

स्मृति और… तुम!’ प्रेम और अनुपस्थिति के सूक्ष्म भावों को गहरी संवेदना के साथ अभिव्यक्त करती कविता है। स्मृतियों की नमी, इंतज़ार की सीलन और भीगे सन्नाटे के बीच यह रचना बताती है कि प्रेम को अंत तक ढोने के लिए शब्द नहीं, स्मृति चाहिए।

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रात के समय महल से जाते बुद्ध, पीछे यशोधरा गोद में राहुल को लिए दुख और धैर्य के साथ खड़ी हैं।

पुनर्जन्म

‘पुनर्जन्म’ एक विचारोत्तेजक कविता है जो बुद्ध के संन्यास और यशोधरा के मौन त्याग के बीच स्त्री जीवन के अनकहे संघर्ष को उजागर करती है। यह कविता समाज की दोहरी मानसिकता पर गहरा प्रश्न उठाती है।

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