gulmohar
घर के कोने में अकेली बैठी एक भारतीय महिला, शांत लेकिन उदास चेहरा, पास में सजा हुआ घर और दीवार पर टंगी परिवार की तस्वीरें

मुझे अच्छा नहीं लगता…

“मुझे अच्छा नहीं लगता” एक संवेदनशील हिंदी कविता है, जो एक गृहिणी के अनदेखे श्रम, भावनात्मक अकेलेपन और उपेक्षा के दर्द को उजागर करती है। यह रचना उन स्त्रियों की आवाज़ है, जो परिवार के लिए सब कुछ समर्पित कर देती हैं, लेकिन बदले में मान-सम्मान की कमी महसूस करती हैं।

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फर्ग्युसन रोड : पुणे की धड़कन पर एक दिन

णे शहर की रगों में सिर्फ इतिहास नहीं, आज की धड़कन भी बहती है और उस धड़कन की सबसे तेज़ लय सुनाई देती है फर्ग्युसन रोड पर। यहां की सड़कों पर चलती जवान होती नई पीढ़ी, अपने सपनों के स्केच बनाते कलाकार, नए फैशन की तलाश में भटकती युवतियां, और हर नुक्कड़ पर सजे खाने-पीने के ठिकाने .सब मिलकर एक ऐसा जीवंत कोलाज रचते हैं, जिसे देखना नहीं, जीना पड़ता है। चाहे वह ‘कट्टा’ पर बैठे युवाओं की हलचल हो, या ब्रश और कैनवास के बीच गहराते रंग, हर पल कुछ नया, कुछ असाधारण घट रहा होता है। यही पुणे है. जहां हर मोड़ पर ज़िंदगी मुस्कुरा रही होती है, और हर सड़क पर एक नई कहानी जन्म लेती है।कभी-कभी शहर के किसी एक रास्ते पर चलने भर से आप उस शहर की आत्मा से मिल लेते हैं। पुणे में फर्ग्युसन रोड (एफसी रोड) एक ऐसा ही रास्ता है .जो केवल एक सड़क नहीं, एक एहसास है।

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 एनबीसीसी बनाएगा भविष्य का नवीन नागपुर

अंतरराष्ट्रीय व्यापार एवं वित्त केंद्र (आईबीएफसी) का होगा विकास पुणे/नागपुर,– नागपुर के शहरी परिदृश्य को नई दिशा देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए एनबीसीसी (इंडिया) लिमिटेड ने नागपुर महानगर प्रदेश विकास प्राधिकरण (एन.एम.आर.डी.ए.) के साथ महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस परियोजना के अंतर्गत नवीन नागपुर को एक योजनाबद्ध…

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कि मुझे सब याद है

…कि मुझे सब याद है

वह उन जगहों, एहसासों और यादों से दूर भागना चाहती है, जहाँ कभी उनका साथ था। फिर भी सच यही है कि सब कुछ बारिशें, स्पर्श, वादे और वो पल उसके भीतर अब भी ज़िंदा हैं। लेकिन वह चुप रहना चुनती है, क्योंकि कुछ यादें कह देने से नहीं, छुपा लेने से बचती हैं।

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गर्मियों में प्यासे परिंदों के लिए एक संजीवनी प्रयास

जैसे-जैसे तापमान बढ़ता जा रहा है, वैसे-वैसे न केवल इंसान, बल्कि बेजुबान पक्षी भी पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस रहे हैं. ऐसे समय में कुछ समाज सेवकों द्वारा किया गया यह छोटा सा लेकिन अत्यंत संवेदनशील कार्य न केवल प्रेरणादायक है, बल्कि मानवता की एक सुंदर मिसाल भी है.

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अरमान

नदी के किनारे खड़े होकर वह लंबे समय तक मटमैले पानी को निहारता रहा। हफ्तों से पानी देखने की आस थी, पर आज जब पानी सामने था तो वह विनाश का दूत बन आया था। अरमान तो बहुत थे—खेत लहलहाने के, फसल कटने की, जीवन संवरने की—पर अब सब कुछ बह चुका था। उसने भारी मन से कहा, “बहुत अरमान थे तुझे… देख ले पानी… जी भर के…”

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जो खुद को नहीं जाना, उसने कुछ नहीं जाना!

विद्या का वास्तविक अर्थ केवल तकनीकी ज्ञान या भौतिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं है। यह सबसे पहले स्वयं को जानने, समझने और जीवन के गहरे आध्यात्मिक अर्थ को खोजने की प्रक्रिया है। यदि हम स्वयं को और समस्त प्राणी जगत को एक ईश्वर की रचना मानकर देखें तो जीवन की अधिकांश उलझनें स्वतः समाप्त हो जाती हैं। विद्या वही है जो हमें भीतर से शुद्ध बनाए, आत्मा को जानने का अवसर दे और बाहरी दिखावे के मोह से दूर रखे।

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पुणे में ‘कलांगन वाटिका’ का आयोजन

भारतीय शास्त्रीय संगीत और कला को आम लोगों तक पहुंचाने के उद्देश्य से पुणे स्थित प्रतीक राजकुमार के संगठन ‘साउंड्स ऑफ बीट्स’ द्वारा ‘कलांगन वाटिका’ नामक एक अनोखी सांस्कृतिक पहल का आयोजन किया जा रहा है। इसके तहत दो दिवसीय कार्यक्रम शुक्रवार, 19 दिसंबर और शनिवार, 20 दिसंबर को आयोजित होंगे।

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मुर्दों की सभा में कर्मों का हिसाब दिखाती हिंदी कविता

 “मुर्दों की हुई सभा”

अगर मृत्यु के बाद इंसान अपने जीवन का हिसाब खुद देख सके, तो उसके पास क्या बचेगा—धन, दौलत, रिश्ते या केवल कर्म? “मुर्दों की हुई सभा” इसी सवाल के माध्यम से जीवन का गहरा सच सामने रखती है।

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मातरानी के अनन्य स्वरूप

मातारानी की महिमा असीमित और अनन्य है। सृष्टि की हर क्रियाशीलता में उनका वंदन और पूजन होता है। दया, शांति, चेतना और सामर्थ्य के प्रतिरूप के रूप में, माँ ज्ञान से पूर्ण प्रकाशपुंज हैं। वह जीवन की सर्वशक्तिप्रदायिनी हैं, जो समस्त जगत की असुरी शक्तियों का संहार करती हैं और यश, रूप, आरोग्य व सौभाग्य प्रदान करती हैं।

माँ अमिय-स्रोत जैसी निरंतर नाद करती हैं और दुष्टों का दमन करने के लिए विकराल रूप धारण कर लेती हैं। प्रचंड दामिनी और रमा कामिनी के स्वरूप में वह भक्तों के हर संताप को हरती हैं और उनके मनोवांछित फल प्रदान करती हैं।

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