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चूरन वाली चाची

विद्यालय के बाहर छोटी-सी दुकान लगाए बैठी चूरन वाली चाची जी बचपन की सबसे मीठी यादों में से एक हैं। झरबेरी के रंग-बिरंगे बेर, गुड़ वाली लाल इमली, संतरे वाला कम्पट और नमक लगा कमर उनका हर स्वाद मानो बचपन की जेब में छुपी खुशी जैसा। न दिखावा, न चालाकी बस सादगी, अपनापन और शुद्ध स्वाद का भरोसा। सच में, पूरे दिल से भोली-भाली थीं चूरन वाली चाची जी।

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ज़िंदगी आखिर कट ही जाएगी

ज़िंदगी अंत में कट ही जाती है चाहे हम मोहब्बत में डूबे हों या किसी की नफ़रत से लड़ रहे हों। कभी दर्द के साये में गुज़रती है, तो कभी हँसी की छोटी-सी किरण उसे रोशन कर देती है।
जीवन की यही सच्चाई है: दो पल का सफ़र, जो हाथ से फिसलते हुए भी हमें कुछ सिखा जाता है। खुशियाँ छोटी हों या बड़ी, बाँट देने से ही दिल हल्का होता है। ग़मों को अंदर दबाकर रखने से वे बोझ बन जाते हैं लेकिन किसी अपने के साथ उन्हें साझा कर लिया जाए तो वही दर्द ताकत में बदल जाता है।

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चाँदनी रात में शांत झील के किनारे सजे हुए रथ पर साथ बैठे भारतीय दंपति, जिनके चेहरे पर आत्मिक प्रेम, स्नेह और मधुर भावनाओं की झलक दिखाई दे रही है। आसपास खिलते फूल और चाँदनी कविता के श्रृंगार रस को साकार करते हैं।

प्रीति-रथ पर गीत बैठे

‘प्रीति-रथ पर गीत बैठे’ प्रेम, नेह और आत्मीय भावनाओं से ओतप्रोत एक मधुर हिंदी गीत है। इसमें चाँदनी, स्वप्न, रागिनी और प्रकृति के सुंदर बिंबों के माध्यम से प्रेम की कोमल अनुभूतियों को सजीव किया गया है। श्रृंगार रस से सुसज्जित यह कविता दो हृदयों के आत्मिक मिलन, जीवन की मधुर स्मृतियों और प्रेम की शाश्वत अनुभूति को अत्यंत भावपूर्ण शैली में प्रस्तुत करती है।

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बांद्रा टर्मिनस–जयपुर नॉनस्टॉप सुपरफास्ट स्पेशल ट्रेन

यात्रियों की सुविधा और अतिरिक्त भीड़ को समायोजित करने के उद्देश्य से पश्चिम रेलवे बांद्रा टर्मिनस और जयपुर के बीच विशेष किराये पर नॉनस्टॉप सुपरफास्ट स्पेशल ट्रेन चलाएगी.

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धुंधले शहर की पृष्ठभूमि में अकेला शायर, न्याय के तराज़ू और बिखरे हुए मुखौटों का प्रतीकात्मक दृश्य

किसे गुनहगार कहें

“किसे गुनहगार कहें” एक समकालीन हिंदी ग़ज़ल है, जो समाज, न्याय व्यवस्था और नैतिक मूल्यों पर गहरी चोट करती है। हर शेर वर्तमान समय की विडंबनाओं को उजागर करता है, जहाँ सच और झूठ की सीमाएँ धुंधली होती दिखाई देती हैं। बाज़ारवाद, न्याय, आरोप और सफलता के बदलते अर्थों पर तीखा व्यंग्य करती यह ग़ज़ल पाठकों को आत्ममंथन के लिए प्रेरित करती है। सरल लेकिन प्रभावशाली भाषा में लिखी गई यह रचना आज के सामाजिक यथार्थ का सशक्त प्रतिबिंब है।

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महिदपुर रोड स्कूल के छात्र-छात्राओं का बोर्ड परीक्षा परिणाम उत्कृष्ट, टॉपर्स सम्मानित

महिदपुर रोड के विद्यालयों का बोर्ड परीक्षा परिणाम उत्कृष्ट

महिदपुर रोड के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय और कन्या हाई स्कूल का बोर्ड परीक्षा परिणाम इस वर्ष उत्कृष्ट रहा। हायर सेकेंडरी में कई छात्रों ने 75% से अधिक अंक प्राप्त कर लैपटॉप हासिल किए, वहीं टॉपर्स को स्कूटी योजना का लाभ मिला। हाईस्कूल का परिणाम 90% और कन्या हाई स्कूल का 95% रहा, जिसमें नाजरिन, चंचल और ज्योति ने टॉप स्थान प्राप्त किया। विद्यार्थियों की सफलता पर विद्यालय परिवार में उत्साह का माहौल है।

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सिंहस्थ मेले में उज्जैन के नदी घाट के पास विशाल पार्किंग क्षेत्र और श्रद्धालुओं की भीड़

सिंहस्थ 2028 का मेगा पार्किंग प्लान तैयार

सिंहस्थ 2028 के लिए प्रशासन ने भीड़ और ट्रैफिक प्रबंधन का बड़ा खाका तैयार किया है। घाट से 1–2 किमी की परिधि में 3-लेवल पार्किंग बनाई जाएगी, जिसमें 5 से 7 लाख वाहनों की क्षमता होगी। फोर-लेन और सिक्स-लेन मार्गों से जुड़ी पार्किंग, अंडरपास और वैकल्पिक रूट के जरिए श्रद्धालुओं को कम पैदल दूरी और तेज निकासी का अनुभव देने की तैयारी है।

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गुरु की छाया में गढ़ता जीवन

शिक्षक जीवन के आधार स्तंभ होते हैं। जैसे कुम्हार कच्ची मिट्टी को चाक पर घुमाकर नया आकार देता है, वैसे ही शिक्षक बच्चों के कोमल और अबोध मन को गढ़ते हैं। बचपन में माता-पिता से बोलना, चलना और सहारा लेना सीखा जाता है, लेकिन जब शिक्षा के मंदिर में पहला कदम रखा जाता है, तब बच्चा पहली बार माता-पिता का हाथ छोड़कर एक नए वातावरण में प्रवेश करता है।

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दोस्ती कैसे करें

दोस्ती का साइंस: नए दोस्त बनाने के 5 आसान तरीके

मनोविज्ञान के अनुसार दोस्ती बनाना कोई कठिन कला नहीं, बल्कि एक समझी जा सकने वाली प्रक्रिया है. बार-बार मिलना, खुलकर बातचीत करना, पहल करना और रिश्तों को समय देना ये छोटे लेकिन असरदार कदम किसी भी व्यक्ति को मजबूत और लंबे समय तक चलने वाली दोस्ती बनाने में मदद कर सकते हैं.

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कभी-कभी कोई दर्दनाक घटना सुनने भर से ही दिल काँप जाता है। पर जब ऐसा पता चलता है कि वह दर्द किसी ऐसे इंसान के साथ हुआ है जिसे हम रोज़ देखते थे, जिसके बच्चे हमारे सामने खेलते थे,

काली राख की बस्ती

कभी-कभी कोई दर्दनाक घटना सुनने भर से ही दिल काँप जाता है। पर जब ऐसा पता चलता है कि वह दर्द किसी ऐसे इंसान के साथ हुआ है जिसे हम रोज़ देखते थे, जिसके बच्चे हमारे सामने खेलते थे,

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