अगर मुड़ के देखे, जो तू मुझको एक बार…
कभी कोई लौटकर सिर्फ एक बार मुड़कर देख ले, तो बरसों की रंजिशें मिट सकती हैं। यह कविता प्रेम, इंतज़ार, विरह और बीते पलों की उन यादों को स्वर देती है, जो आज भी दिल में जीवित हैं।

कभी कोई लौटकर सिर्फ एक बार मुड़कर देख ले, तो बरसों की रंजिशें मिट सकती हैं। यह कविता प्रेम, इंतज़ार, विरह और बीते पलों की उन यादों को स्वर देती है, जो आज भी दिल में जीवित हैं।
श के ग्रामीण इलाकों में गेहूं की कटाई और मड़ाई के दौरान थ्रेसर मशीनों का उपयोग तेजी से बढ़ा है। जहां ये मशीनें किसानों की मेहनत को आसान बनाती हैं, वहीं इनके कारण होने वाले हादसों में भी लगातार वृद्धि देखी जा रही है। यह घटनाएं केवल आंकड़े नहीं हैं, बल्कि इनके पीछे कई परिवारों का दर्द और टूटते सपने छिपे होते हैं।
यह मूर्तिकार, जो छेनी-हथौड़ी से पत्थरों को तराशते-तराशते खुद भी एक पाषाण शिला सा बन गया है। उसके भीतर का प्रेम कहीं उसकी बनाई मूर्तियों में समा गया, या कहें कि बुत बनकर रह गया। कल जो प्रेम से लबालब था, आज वह भीतर से सूख चुका है—दरकती पपड़ी जैसा। समय की नश्वरता को समझते हुए भी उसने उसे नज़रअंदाज़ किया, क्योंकि उसके जीवन में अब बस औज़ारों का ही महत्व रह गया है। यही औज़ार उसके जीवनयापन का साधन हैं, उसकी भूख मिटाने का माध्यम हैं—उसका एकमात्र साथ।
बढ़ते साइलेंट अटैक के मामलों ने लोगों में डर पैदा कर दिया है। बिना स्पष्ट लक्षण के होने वाला यह हार्ट अटैक खतरनाक हो सकता है, लेकिन सही जानकारी, नियमित जांच और संतुलित जीवनशैली अपनाकर इससे बचाव संभव है।
सिगड़ी की गर्माहट, मैया का स्नेह, ताई जी का अनुशासन और मम्मी की टोका-टाकी संयुक्त परिवार के वे दिन आज भी दिल को छू जाते हैं। यह संस्मरण बचपन, संस्कार और रिश्तों की उस दुनिया में ले जाता है, जहाँ हर सीख स्नेह के साथ मिली।
हित्य में अब चमत्कारों की कोई कमी नहीं रही। कुछ लेखक तो इतने पारंगत हो गए हैं कि बीस कहानियों को छह अलग-अलग पुस्तकों में बाँटकर छाप देते हैं—हर पुस्तक में पाँच कहानियाँ कॉमन! और जब यह भी कम पड़ता है तो बालकथा और कविता की पतली-पतली किताबें छपवाकर अपने खाते में पुस्तकों की संख्या बढ़ा लेते हैं।पाठक भी भाग्यशाली होते हैं—उन्हें एक ही कहानी पाँच–छह बार, अलग-अलग शीर्षकों से पढ़ने का अवसर मिलता है।
“अगर अलग मुद्रा की पहचान न होती, तो कभी न जान पाती कि किसी और ज़मीन पर हूँ!”
नेपाल—एक ऐसा देश, जहाँ हर गली, हर मोड़ पर आस्था की झलक है। साधारणता में भी गरिमा है, और गरीब कहलाने के बावजूद आत्मसम्मान की ऐसी मिसाल देखने को मिली जो अमीर देशों को भी सीख दे सके। महिलाएं व्यापार की कमान संभालती हैं, ईमानदारी हर चेहरे पर झलकती है, और हिंदी को जिस तरह से अपनाया गया है, वह दिल को छू जाता है। यह यात्रा केवल एक देश की नहीं, बल्कि आत्मिक अनुभव की रही।