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महिदपुर रोड में नेमिनाथ भगवान जन्म कल्याणक महोत्सव में पूजा और महाभिषेक करते श्रद्धालु

जन्म कल्याणक महोत्सव में भक्ति में डूबा महिदपुर रोड

महिदपुर रोड में भगवान नेमिनाथ के जन्म कल्याणक महोत्सव का भव्य आयोजन हुआ. गिरनार तीर्थ की प्रतिकृति, शक्रस्तव अष्टोत्तरी महाभिषेक, 14 महास्वप्नों की प्रस्तुति और भक्ति नृत्य ने आयोजन को विशेष बना दिया.

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ज्ञान का दीप जलाते हुए गुरुदेव, चरणों में नतमस्तक शिष्य, गुरु वंदना पर आधारित भक्ति भजन।

गुरु ज्ञान का दीप

“गुरुदेव तुम्हारा अभिनंदन” गुरु के प्रति श्रद्धा, समर्पण और कृतज्ञता से भरा एक भावपूर्ण हिंदी भजन है। इसमें गुरु को ज्ञान का दीप, जीवन का आधार और अज्ञान के अंधकार को दूर करने वाला मार्गदर्शक बताया गया है। यह भजन गुरु-शिष्य परंपरा की महिमा का सुंदर वर्णन करता है और गुरु पूर्णिमा, सत्संग तथा आध्यात्मिक आयोजनों के लिए उपयुक्त है।

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चाँदनी रात में खिड़की के पास चिंतन में बैठी एक महिला के सामने स्वप्न में प्रकट हुआ एक प्राचीन भारतीय बादशाह, जिसकी शांत मुद्रा अतीत से सीख लेकर वर्तमान और भविष्य की ओर बढ़ने का संदेश देती है।

गुज़ारिश

‘गुज़ारिश’ एक गहन चिंतनशील कविता है, जिसमें स्वप्न में आए एक गुज़रे दौर के बादशाह के माध्यम से अतीत, इतिहास, समय और वर्तमान पर सार्थक संवाद प्रस्तुत किया गया है। कविता यह संदेश देती है कि बीते समय की गलतियों में उलझकर वर्तमान और भविष्य को नहीं खोना चाहिए। कर्म, सकारात्मक सोच और बदलते समय के साथ आगे बढ़ने का संदेश देने वाली यह रचना पाठकों को आत्ममंथन के लिए प्रेरित करती है

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सूरज रे तू बढ़ता चल

सूरज रे तू बढ़ता चल” एक प्रेरणादायक कविता है जो अंधकार, थकान और कठिन परिस्थितियों के बीच निरंतर आगे बढ़ते रहने का संदेश देती है। सूरज यहाँ केवल एक खगोलीय पिंड नहीं, बल्कि साहस, उम्मीद और उजाले का प्रतीक बनकर उभरता है।

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स्त्री

प्रेम में डूबी स्त्री कभी नादान-सी लगती है, कभी इतनी कोमल कि जैसे स्पर्श से बिखर जाए। उसके भीतर सपनों की हलचल है. उमड़ती-घुमड़ती, तितर-बितर होती तमन्नाएँ। वह तितली-सी है, जिसे उड़ना तो है, आसमान को छूना भी है, पर उसके चारों ओर फैली दुनिया उसे फूलों के दायरे से बाहर जाने ही नहीं देती। आसमान ऊँचा है, अपने ही गर्व में अडिग; और ज़मीन पर खड़ी वह स्त्री अपने पंख फैलाने को तैयार होते हुए भी उड़ नहीं पाती।

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प्रभा का अस्तित्व

प्रभा बचपन से ही संकोची स्वभाव की थी, त्याग और समर्पण उसकी परवरिश का हिस्सा रहे। संयुक्त परिवार में पली-बढ़ी प्रभा ने हमेशा दूसरों की इच्छाओं को प्राथमिकता दी, लेकिन अंततः अपनी खोई पहचान को पुनः प्राप्त किया। एक साधारण स्त्री से विद्यालय संचालिका बनने तक का उसका सफर आत्मबल, आत्म-साक्षात्कार और स्वाभिमान की मिसाल बन गया।

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तन्हाई और मोहब्बत के दर्द को दर्शाती हिंदी ग़ज़ल की भावनात्मक प्रस्तुति

मोहब्बत, खामोशी और कसक

कभी-कभी मोहब्बत शब्दों से नहीं, खामोशियों से समझ आती है। सामने वाला साथ होने का दावा करता है, लेकिन हर भीड़ में एक अजीब-सी तन्हाई घिर आती है। यादें तस्वीरों में कैद तो हो जाती हैं, मगर उनमें छिपी खाली जगह हर बार दिल को चुभती है। शायद यही इश्क़ की सच्चाई है जहाँ चाहत तो पूरी होती नहीं, और उसकी कसक हर पल साथ चलती रहती है।

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नज़रिया…!

अगर हमारी सोच सकारात्मक और निर्मल है तो हम साधारण को भी असाधारण बना सकते हैं। परंतु यदि हम नकारात्मकता और पूर्वाग्रह से ग्रसित हैं तो अच्छे से अच्छे में भी खोट ढूंढ़ लेंगे। प्रस्तुत लघुकथा एक सरल उदाहरण के माध्यम से यही संदेश देती है कि कई बार दोष न सामने वाले का होता है, न परिस्थिति का, बल्कि हमारी अपनी “नज़र” का होता है — जिसे बदलकर ही हम दुनिया को सही रूप में देख सकते हैं। जब तक हम अपनी खिड़की के शीशे साफ नहीं करते, हर दृश्य धुंधला और दोषपूर्ण ही नज़र आएगा।

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मित्र की मित्रता

यह कहानी एक ऐसे युवा की है जो अपने बीमार भाई के लिए पढ़ाई, करियर और भविष्य तक को दाँव पर लगाने को तैयार है। दोस्ती, परिवार और मानवता जब साथ खड़ी होती है, तो असंभव भी संभव हो जाता है।

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शब्दों में बंधा मेरा दिल

तुम्हारी लिखी हर पंक्ति ने मुझे भीतर तक छू लिया। तुम्हारे शब्दों में गंभीरता और स्त्री‑सम्मान की झलक थी। धीरे‑धीरे तुम्हारा व्यक्तित्व मेरे मन में उतर गया, और अब मुझे लगता है कि मैं तुम्हारी लेखनी की प्रेयसी बन चुकी हूँ। हर रोज़ तुम्हारा लिखा पढ़ना, मेरे लिए एक नयी दुनिया की खोज और प्रेम का अनुभव है।

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