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ख़्वाब बुनती रात कविता रात और सपनों की भावनात्मक हिंदी रचना

ख़्वाब बुनती रात

“ख़्वाब बुनती रात” एक संवेदनशील कविता है, जो रात के सन्नाटे में जन्म लेती भावनाओं, सपनों और कल्पनाओं को शब्दों में ढालती है। यह कविता दिल और ज़ेहन के बीच चल रहे अनकहे संवाद को बेहद खूबसूरती से प्रस्तुत करती है।

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एक ही टेबल पर अलग-अलग खाना खाते भारतीय कपल

फूड डिवोर्सः डिनर टेबल पर भी ‘नो कॉम्प्रोमाइज’

‘फूड डिवोर्स’ सुनकर भले ही आपको रिश्ते के टूटने का ख्याल आए, लेकिन इसका मतलब बिल्कुल अलग है. यह ऐसा रिलेशनशिप ट्रेंड है जिसमें कपल्स एक साथ रहते हुए भी अपनी पसंद, डाइट और समय के अनुसार अलग-अलग खाना खाते हैं. एक पार्टनर हेल्दी डाइट लेना चाहता है, जबकि दूसरे को पसंद का सामान्य या बाहर का खाना अच्छा लगता है. कई बार खाने का समय भी अलग होता है. ऐसे में हर दिन ‘आज क्या खाएं?’ को लेकर होने वाली बहस से बचने के लिए कपल्स अलग खाना चुनते हैं.

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राष्ट्रीय कवि संगम नवी मुंबई की प्रथम काव्य गोष्ठी में उपस्थित साहित्यकार

राष्ट्रीय कवि संगम, नवी मुंबई की प्रथम काव्य गोष्ठी संपन्न

राष्ट्रीय कवि संगम, नवी मुंबई की प्रथम काव्य गोष्ठी 9 अक्टूबर को केंद्रीय विहार, सीवुड्स में आयोजित हुई। डॉ. सुरेन्द्र प्रसाद गांई की अध्यक्षता में हुए कार्यक्रम में साहित्यकारों ने काव्य पाठ कर राष्ट्र जागरण में कलमकारों की भूमिका पर जोर दिया।

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बंगलौर में मिथिला महोत्सव:

“बंगलौर की धरती पर मिथिला समाज ने पहली बार संगठित होकर अपनी सांस्कृतिक शक्ति का एहसास कराया। पान, माछ, मखान के स्वाद और धरती से जुड़ने की परंपरा ने यह साबित कर दिया कि अपनी जड़ों से जुड़कर ही पहचान बचती है।”

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खामोशी का बोलता सफर

बीस साल बाद एक ट्रेन के कंपार्टमेंट में हुई ये आकस्मिक मुलाकात जहाँ न शब्द थे, न शिकायते सिर्फ वही पुरानी खुशबू, वही मोहब्बत और दो लोगों के बीच पसरी खामोशी, जो बोलती तो थी… मगर सिर्फ दिलों में

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पालने में सोते अनाथ बच्चे के पास मंडराती चिड़िया और ममता से भरी स्त्री

चिड़िया

कहीं एक स्त्री अपनी गोद के लिए तरस रही है और कहीं एक नन्हा बच्चा माँ की ममता के लिए। पालने के आसपास मंडराती एक चिड़िया इस मार्मिक कहानी को रहस्य और संवेदना से भर देती है।

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अकेला तन, भरा मन…

“24 सितंबर 2023 की एक आध्यात्मिक संध्या में, महिदपुर के गंगावाड़ी में संकीर्तन के दौरान भगवान की प्रेरणा से गोवर्धन की दंडवत परिक्रमा का विचार जागा। बिना किसी योजना और साथी के, केवल श्रद्धा और ईश्वर के भरोसे पर यह यात्रा शुरू हुई। मथुरा, यमुना स्नान, मुखारविंद दर्शन और तपस्वियों की प्रेरणा से भरपूर यह अनुभव, तन को थका कर भी आत्मा को जाग्रत कर गया। गिरिराज महाराज की कृपा से यह यात्रा एक भक्ति, साहस और समर्पण की जीवंत कथा बन गई।”

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सरकारी नौकरी मांगते मदन के सामने बैठे नेता जी, राजनीतिक व्यंग्य लघुकथा ‘डिग्री’ का दृश्य

डिग्री

नेता की सेवा में दिन-रात लगे मदन को उम्मीद है कि उसके बदले उसे पक्की नौकरी मिल जाएगी। लेकिन सरकारी नौकरी के लिए नेता जी के जवाब में छिपा व्यंग्य पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर देता है।

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