मित्र की मित्रता

आकांक्षा सिंह, प्रसिद्ध लेखिका, जबलपुर

राज बहुत दिन हुए तुम्हारी कोई खबर ही नहीं मिली। आखिर तुम हो कहाँ आजकल।

मैं कुछ बता नहीं पाऊँगा स्नेहा।

क्यों ऐसा क्या है जो तुम बता नहीं सकते।तुम्हे मालूम नहीं है क्या कि कॉलेज का ये आखिरी साल है। आये दिन एब्सेंट रहते हो।क्या रहेगा तुम्हारा परफॉर्मेंस एग्जाम में।

स्नेहा तुम्हारी बातें सही हैं।लेकिन मैं चाहकर भी डेली नहीं आ सकता।

क्यों? कुछ तो वजह होगी।बताओ शायद हम तुम्हारी मदद कर सके।

मेरी मदद अब केवल भगवान ही कर सकते हैं स्नेहा।

क्यों बताओ न बात क्या हुई।मेरा मन बैठा जा रहा है।

स्नेहा मेरे भाई की तबियब आजकल बहुत खराब रहती है।उसे हर पल मेरी जरूरत होती है।वो मेरे बगैर बिल्कुल नहीं रह सकता।

ऐसा क्या हुआ है। किसी अच्छे डॉक्टर को नहीं दिखाया।

शहर के सभी नामी गिरामी डॉक्टर को दिखा दिया। जो जिसने बताया वो सब किया लेकिन कोई कुछ बता ही नही पा रहा है कि उसे क्या हो गया।

अरे ऐसे कैसे कोई नहीं बता पा रहा है।लगता है तुम सही जगह पहुँच नही पा रहे हो।किसी बड़े शहर ले जाओ भाई को तो शायद कुछ हो सके। कुछ लग सके कि उसे हुआ क्या है।

कौन से शहर ले जाऊंगा ये भी तो पता होना चाहिए स्नेहा।किसके पास लेकर जाना है पता तो होना चाहिए।

मैं हूँ न, मुझे अभी तक पता नहीं था।कल मैं तुम्हें कॉल करती हूँ। सारी जानकारी लेकर तुम्हे बताती हूँ।

ओके स्नेहा!

अपना ख्याल रखो राज।और हाँ कॉलेज आते रहो जिससे तुम्हारी खबर भी रहे और तुम अपना लास्ट ईयर अच्छे से निकाल सको।ये तुम्हारे करियर के लिए जरूरी है।

बात तो तुम सही कह रही हो स्नेहा। करियर रहेगा तो हर मुश्किल आसान हो जाएगी।पर समय जाने क्यों मुझसे खिलवाड़ कर रहा है।

समय खिलवाड़ नहीं कर रहा है।केवल तुम्हारे धैर्य की परीक्षा ले रहा है। और तुम्हे समय की, जीवन की,और करियर की परीक्षा साथ मे पास करनी है वो भी बहुत अच्छे नम्बरों से समझे।

हाँ सही कह रही हो तुम।

मैं जो कुछ बन पाएगा वो सारी मदद करूंगी तुम्हारी। चिंता छोड़ दो अब।

ठीक है कल मिलते हैं जहां कहोगी वहाँ।

मैं तुम्हें कॉल करके बता दूँगी।

अच्छा ठीक है फिर तो।

अब चलती हूँ, बाय

बाय बाय।

स्नेहा अपने घर पर अपनी फैमिली के साथ बैठी है।तभी उसने कहा।

पापा एक बात बताइए वो जो अंकल जी हैं पी जी आई में उनसे आपका कोई सम्पर्क है।

क्यों?आज तुम्हें अंकल जी की याद क्यो आ रही है।

पापा मेरा क्लासमेट है उसके भाई की बहुत ज्यादा तबियब खराब है यहाँ शहर में कोई उसका इलाज नही कर पा रहा है।क्या अंकल जी उसकी कोई हेल्प कर सकते हैं।

हुआ क्या है उसे। कुछ जानकारी दो तो बात करें।

मुझे खास तो कुछ नहीं पता है उसके घर के पास से एक क्लासमेट और आता है उससे बात हुई तो पता चला कि वो चल फिर नही पा रहा है। पैर शायद उसके काम नहीं कर रहें हैं।

अच्छा।रुको उन भाई साहब से बात करता हूँ वो जरूर कुछ कर पाएंगे।क्योकि इस समय वो स्वास्थ्य सचिव हैं। रुको मैं बात करता हूँ।

हाँ पापा प्लीज़ बात कर लीजिए बेचारे के भाई की तबियत ठीक हो जाए।

इसमें प्लीज़ कहने की बात नहीं है बेटा मैं खुद बात करता हूँ।कहते हुए ही स्नेहा के पापा ने सचिव जी को कॉल कर दिया।

हैलो, भाई साहब!

अरे भाई साहब नमस्कार। कैसे याद किया घर मे सभी कुशल मंगल है।

जी भाई साहब सब ईश्वर की अनुकम्पा है।

जी वो है ही।आपकी तबियत कैसी है।

मैं बिल्कुल बढ़िया हूँ।हाँ एक मदद चाहिए आपसे।

अरे आज्ञा करें।

आज्ञा नही निवेदन है।मेरी बिटियारानी के साथ मे कोई बालक है उसके भाई की तबियब बहुत खराब है।तो क्या आप उसे पी जी आई के किसी डॉक्टर से उसके इलाज में मदद कर सकते हैं।

जी बिल्कुल करा सकते हैं बिटिया से कहिए अपने मित्र से कहे कि वो कल ही यहाँ आ जाएं।हम वहाँ के इंचार्ज से ही बात कर लेंगे।

बहुत बहुत शुक्रिया भाई साहब मैं बिटिया को बोल देता हूँ।

अरे किस बात का शुक्रिया भाई साहब ये तो हमारा काम है।हमें शर्मिंदा न करें।

ठीक है भाई साहब नमस्कार फिर बात करते हैं आपसे।

जी बिल्कुल, नमस्कार।

लो बेटा स्नेहा तुम्हारा काम अंकल जी ने कर दिया अब अपने क्लासमेट से बोलो वो तुरन्त भाई को लेकर पहुँच जाएं वहाँ।

जी पापा, मैं अभी बोल दे रही हूँ उसे।

हैलो, हैलो राज।

हाँ कौन है बेटा।

आंटी राज से बात हो जाएगी।

हां बेटा दो मिनट रुकना वो बाहर है बात कराती हूँ।

हैलो कौन

मैं स्नेहा हूँ राज।

हाँ स्नेहा बोलो।

राज अभी अभी अंकल जी से बात हुई है।तुम कल ही भाई को लेकर रवाना हो जाओ।

कौन से अंकल से बात हुई है,क्या बात हुई है, कहाँ जाना है जरा डिटेल में बताओगी।

अरे हाँ बाबा ! बताती हूँ। मेरे पापा के रिलेशन में ही एक अंकल हैं जो कि सचिव हैं इस समय वो भी स्वास्थ्य विभाग के।उनके लिए सब कुछ आसान हो जाता है।उन्होंने कहा है कि कल के कल ही तुम्हे वहाँ भेज दे मतलब पी जी आई भेज दें जो भी बेस्ट से बेस्ट होगा तुम्हें उपलब्ध कराया जाएगा।ठीक है।

ठीक है स्नेहा मैं कल के कल ही निकल जाता हूँ भाई को लेकर।अगर कोई जरूरत होगी तो फिर तुम्हे कॉल कर लूंगा।

अरे बेफिक्र होकर कॉल कर लेना।

तुम्हारी इस हेल्प के लिए कैसे शुक्रिया करूँ।

पहले भाई को ले जाओ।सब कुछ अच्छे से हो जाए फिर बात करना।

ओके।अब मैं तैयारी में जुट जाता हूँ। बाय

ठीक है बाय बाय।एंड बेस्ट ऑफ लक।

कुछ दिन बाद अचानक घर की कॉलबेल पर स्नेहा दौड़ कर दरवाजा खोलती हैं।तो देखती है राज अपने भाई के साथ आया है।

अरे राज तुम।अचानक कैसे आना हुआ।

कई दिनों से भाई बोल रहा था कि तुमसे इसे मिला दूँ। समय नहीं मिल पा रहा था।आज मिला तो सोचा चल कर तुम्हे सरप्राइज किया जाए।

अरे बहुत बढ़िया।अब कैसी तबियत है तुम्हारी।

स्नेहा तुम्हारे अंकल जी ने बहुत हेल्प की।मेरा भाई आज अपने पैरों पर खड़ा हुआ तो वो तुम्हारे और अंकल जी के कारण ही सम्भव हुआ।

नहीं राज, ऐसा नही है मैंने कुछ नही किया तुम्हारे जैसा भाई मिलना भी बहुत सौभाग्य की बात है।तुम असज के परिवेश के होते हुए भी भाई के लिए अपना जीवन भी दांव पर लगाने को तैयार हो गए थे।ये मिसाल से कम नही है।तुम्हें देखकर ही मन हो रहा था कुछ ऐसा हो जाए जिससे तुम्हारे जीवन से दुख दूर हो जाए। ये तुम्हारे समर्पण के अलावा और कुछ नही है।

ये तुम्हारे सहयोग के बिना अधूरा है स्नेहा।

चलो भई मान लिया ठीक है।बाकी मैंने कुछ किया नही है।सब तुम्हारा ही किया हुआ है।चलो बातें खत्म करो यही पर ।पहले तुम्हारे लिए कुछ खाने के लिए लाते हैं। फिर आगे बात करते हैं।ठीक है।

ठीक है।मधुर मुस्कान के साथ सभी की स्वीकृति मिल गयी।

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