हम कोख़जाये नहीं… मनजाये हैं…
लोकल ट्रेन की भीड़ में बने एक ऐसे भाई-बहन के रिश्ते की कहानी, जिसका कोई खून का रिश्ता नहीं, फिर भी उसमें अपनापन, सम्मान और भावनाओं की गहराई है.

लोकल ट्रेन की भीड़ में बने एक ऐसे भाई-बहन के रिश्ते की कहानी, जिसका कोई खून का रिश्ता नहीं, फिर भी उसमें अपनापन, सम्मान और भावनाओं की गहराई है.
यह कहानी एक ऐसे युवा की है जो अपने बीमार भाई के लिए पढ़ाई, करियर और भविष्य तक को दाँव पर लगाने को तैयार है। दोस्ती, परिवार और मानवता जब साथ खड़ी होती है, तो असंभव भी संभव हो जाता है।