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इसी तरह सोचो

यह कविता जीवन और संघर्ष की कठिनाइयों में महिलाओं को आत्मनिर्भर और साहसी बनने का संदेश देती है। कविता में बताया गया है कि जैसे लोहा आग में पिघलकर भी अपनी ताकत नहीं खोता, वैसे ही महिलाओं को भी कठिन परिस्थितियों में अपने साहस और आत्मविश्वास को बनाए रखना चाहिए। ‘बिटिया’ के माध्यम से यह संदेश दिया गया है कि जीवन के जंगल में जिंदा रहने के लिए हिम्मत, धैर्य और साहस आवश्यक हैं।

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यादें

यह भावपूर्ण हिंदी कविता बिछड़ने के बाद भी जीवन के हर कोने में जीवित रहने वाली यादों की कहानी कहती है। प्रेम, स्मृतियों और विरह की संवेदनशील अभिव्यक्ति।

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भारतीय सैनिक की वर्दी में खड़ा जवान, पृष्ठभूमि में तिरंगा और भावनात्मक माहौल

सैनिक का अंतर्मन

यह कविता एक सैनिक के अंतर्मन की उन गहराइयों को उजागर करती है, जहाँ कर्तव्य और भावनाएँ एक साथ सांस लेती हैं। वह अपने परिवारपत्नी, बहन, पिता और माँसे दूर होते हुए भी उनसे गहराई से जुड़ा रहता है, लेकिन देश के प्रति अपने वचन को सर्वोपरि रखता है। उसके भीतर का प्रेम त्याग में बदल जाता है, और उसकी हर विदाई एक अनकही पीड़ा के साथ-साथ गर्व का संदेश भी छोड़ जाती है। यह रचना बताती है कि एक सैनिक केवल सरहदों की रक्षा नहीं करता, बल्कि अपने दिल के सबसे करीब रिश्तों को पीछे छोड़कर पूरे देश को अपना परिवार मान लेता है।

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बगुलाभगत

तुमने मित्रता का हाथ बढ़ाया और मैंने उसे सच्चे मन से स्वीकार भी किया। यह अनुभव मुझे एक नई ख दे गया – कि हर नए मित्र को परखकर ही अपनाना चाहिए। तुम्हें यह भ्रम रहा कि तुम्हारी मित्रता मुझे जीवन भर अभिमान देगी, लेकिन धीरे-धीरे मैं समझने लगी कि मित्रता में स्वार्थ छिपा होता है और उसका सत्य अक्सर कटु होता है।
तुम्हारी खट्टी-मीठी बातें, दिखावे की आवभगत और गरिमामयी उपस्थिति मुझे किसी बगुला भगत से कम नहीं लगी। मेरी बेरंग जिंदगी में रंग भरने की तुम्हारी कोशिश झूठी थी, और प्रेम प्रसंगों की ठिठोली मेरी आस्था को भीतर ही भीतर जला रही थी। तुम्हारी झूठी तारीफें, बनावटी शानोशौकत और ऊँची-ऊँची बातें मेरी अस्मिता पर आघात कर रही थीं। मेरे कंधे तुम्हारे सपनों का बोझ ढोते रहे, और तुम्हारी प्रसिद्धि की लालसा मेरी आहुति को प्रश्नांकित करती रही। तब मैंने जाना कि तुम्हारी मित्रता सच में कफन जैसी सफेद और मौत जैसी ठंडी है।

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नवरात्रि में सजी हुई माँ दुर्गा की प्रतिमा, दीपों और भक्तों के साथ पूजा का दृश्य

माँ का आगमन

“माँ के आगमन का पैगाम” एक सुंदर और भावपूर्ण भक्ति कविता है, जो नवरात्रि के पावन अवसर पर माँ दुर्गा के आगमन की खुशी और आध्यात्मिक ऊर्जा को व्यक्त करती है। इस कविता में प्रकृति और मानव जीवन के बीच के उस गहरे संबंध को दर्शाया गया है, जो माँ के आगमन के साथ नवजीवन और उत्साह से भर उठता है।

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जीत

हार को स्वीकार करने का साहस ही सच्ची जीत की शुरुआत होता है। जो व्यक्ति विपरीत परिस्थितियों में भी अपना संयम और आत्मविश्वास बनाए रखता है, वही आगे चलकर मंज़िल तक पहुँचता है। रास्ते आज कठिन लग सकते हैं, पर यदि हौसलों से भरी कोशिश जारी रहे तो कल वही रास्ते सफलता की ओर ले जाते हैं। गिरना जीवन का स्वभाव है, पर हर बार गिरकर उठना और फिर आगे बढ़ना ही संघर्ष की असली पहचान है।

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आओ ज़रा जी लें

कविता में छिपे भाव जीवन की छोटी-छोटी खुशियों और अनदेखे लम्हों की याद दिलाते हैं। नीरसता और उदासी में भी हम अपने भीतर की रौशनी को खोज सकते हैं। यादों में मुस्कुराते हुए लम्हे, जीवन के कठिन समय में भी राहत और उत्साह की ठंडी हवा बनकर हमारे मन को सहलाते हैं। ये लम्हे हमें याद दिलाते हैं कि हर पल एक कविता है, जो जीवन की महाकाव्य रचना में नए छंद जोड़ती है। इसे जीना, उसे महसूस करना और हर पल को उत्सव में बदल देना ही जीवन की असली खुशी है।

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ये रेशमी जुल्फें

गाँव की गलियों में आजकल एक नई आवाज़ गूंजने लगी है. “माथा का बाल ले लो… पाँच हज़ार रुपए किलो!” पहली बार सुनने पर यह बात उतनी ही लुभावनी लगती है जितनी किसी मेले में सोने के दाम में चाँदी बेचने की। लेकिन सच्चाई कुछ और है .यह नया “धंधा” ग्रामीण महिलाओं की भोली मानसिकता और शहरी उद्योगों की चालाकी का संगम है।
गिरते बाल अब चिंता का नहीं, कमाई का विषय बन गए हैं। महिलाएँ इन्हें संभालकर रखती हैं, ताकि अगले महीने फेरीवाले से कुछ रुपये या सस्ता सामान पा सकें। पर असल में वे जिस चीज़ का सौदा कर रही हैं, वह उनका सौंदर्य और समझ दोनों हैं।ये बाल आगे चलकर विग, कॉस्मेटिक और विदेशी बाजारों में करोड़ों की कीमत पा जाते हैं।
सवाल यही है क्या हम सच में “बालों को बचा रहे हैं” या “अपनी समझ खो रहे हैं”?

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राधाष्टमी : राधा-कृष्ण प्रेम की अनंत व्याख्या

भारतीय संस्कृति में प्रेम का सर्वोच्च रूप राधा और कृष्ण के संबंध में मूर्त होता है। राधाष्टमी का पर्व केवल राधा के जन्म का उत्सव नहीं, बल्कि उस शाश्वत प्रेम का प्रतीक है, जिसमें आत्मा और परमात्मा का संगम झलकता है। राधा का व्यक्तित्व केवल सौंदर्य तक सीमित नहीं, बल्कि त्याग, समर्पण और आत्मविस्मृति का प्रतीक है। साहित्य में सूरदास, रसखान, बिहारी, जयदेव और नन्ददास जैसे कवियों ने राधा-कृष्ण प्रेम को लौकिक से परे जाकर अध्यात्म से जोड़ा है। राधा का प्रेम मिलन में ही नहीं, बल्कि विरह में भी पूर्ण है। यही निष्काम समर्पण उन्हें भक्ति का शिखर बनाता है। आज के समय में राधा-कृष्ण का प्रेम हमें सिखाता है कि सच्चा प्रेम अधिकार नहीं, बल्कि अर्पण से जीवित रहता है। राधाष्टमी का संदेश है—प्रेम को भौतिकता से ऊपर उठाकर जीवन को आध्यात्मिक सौंदर्य से भरना।

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“मन की देहरी: संवेदनाओं का प्रवेशद्वार”

“‘मन की देहरी’ एक ऐसा काव्य संग्रह है जो पाठक को भीतर तक छू जाता है। पूनम सिंह जी की सरल और भावपूर्ण कविताएँ प्रेम, स्मृति और स्त्री-मन की गहराई को उजागर करती हैं। प्रत्येक पंक्ति जैसे पाठक के अपने अनुभवों का प्रतिबिंब है। एक पुस्तक जो संवेदनाओं और आत्मिक प्रेम का संसार खोलती है।”

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