जीत का एहसास
“जीत का एहसास” एक प्रेरक हिंदी कविता है जो संघर्ष, धैर्य और आत्मविश्वास की शक्ति को दर्शाती है। यह कविता बताती है कि असली जीत मंजिल नहीं बल्कि मन में बसने वाला विश्वास और प्रयास है।

“जीत का एहसास” एक प्रेरक हिंदी कविता है जो संघर्ष, धैर्य और आत्मविश्वास की शक्ति को दर्शाती है। यह कविता बताती है कि असली जीत मंजिल नहीं बल्कि मन में बसने वाला विश्वास और प्रयास है।
सिंहस्थ मेले की तैयारियों में प्रशासन ने पार्किंग व्यवस्था को प्राथमिकता देते हुए नए स्थल चिन्हित किए हैं. मक्सी रोड की पार्किंग को धतरावदा शिफ्ट करने पर विचार किया जा रहा है, जिससे श्रद्धालुओं को घाट तक कम दूरी तय करनी पड़े.
आज विदाई का वह क्षण है, और मैं यहाँ अकेला खड़ा हूँ, यह सोचते हुए कि क्या कहूँ और शब्दों का सही चयन कैसे करूँ। मेरी आँखें भर आती हैं जब मैं अपने विद्यालय में पहले दिन की यादों को याद करता हूँ—वो उत्साह, वो नर्वसनेस, और दोस्तों के साथ की छोटी-छोटी शरारतें, जैसे क्लास में बंक मारना या किसी का टिफ़िन चुपके से ले जाना। वे निश्चिन्त, हँसी-खुशी भरे पल, दोस्तों के साथ की मस्ती, टीचरों को चिढ़ाना, खेल के मैदान और प्रार्थना की ध्वनि—ये सभी यादें हमेशा मेरे दिल में रहेंगी।
परिस्थितियाँ हमारे जीवन की दिशा तय नहीं करतीं, बल्कि हमारी सोच उन्हें अर्थ देती है। एक ही स्थिति में कोई टूट जाता है और कोई निखर जाता है अंतर केवल मानसिकता का होता है। जब मन में विश्वास होता है, तब कठिन रास्ते भी सहज हो जाते हैं। जीवन को बदलने के लिए पहले दृष्टिकोण को बदलना आवश्यक है।
वह कहती है—मत करो मुझे इतना प्यार, क्योंकि हमें पता है कि हमारा साथ अब लंबा नहीं है। फिर भी वह चाहती है कि इन कुछ पलों में वह सब समेट ले—सिंदूरी शाम, तारों से भरी चांदनी रात, भीनी-भीनी हवाएँ और उसका हाथ थामे उसकी मुस्कुराहट। उसकी चाहत बस इतनी है कि जब विदा का समय आए, तो उसकी आँखों में आंसुओं की जगह मुस्कान हो, और उसके जीवन का पिंजरे में बंधा पाखी उसी मुस्कान से मुक्त हो सके।
पहाड़ों पर ऐसी तबाही पहले कभी नहीं देखी गई। मानसून का इंतजार कर रहे इलाकों में अब प्रलय का मंजर है। उफनती नदियों ने अपनी हुंकार से पहाड़ों को रेत की तरह तोड़ डाला है। चट्टानें दरक रही हैं, रास्ते धंस रहे हैं और जगह-जगह भूस्खलन हो रहा है। नदी-नालों का जलस्तर बढ़ने से धरती जलमग्न होती जा रही है और पानी का तांडव जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर रहा है।
मैदानों में भी हालात कम भयावह नहीं हैं। सड़के सैलाब में तब्दील हो रही हैं, लोग अपने घरों से विस्थापित हो रहे हैं और बेबस होकर जान बचाने की जद्दोजहद कर रहे हैं। हर ओर त्राहि-त्राहि मची है।
महिदपुर रोड नगर के सर्किट हाउस से लेकर रेलवे स्टेशन तक मुख्य मार्ग पर किए गए सड़क चौड़ीकरण के श्रेष्ठ परिणाम अब स्पष्ट दिखाई देने लगे हैं। चौड़ी और व्यवस्थित सड़क ने नगर के स्वरूप को बदला-बदला बना दिया है।
पहले बढ़ते यातायात के दबाव और फुटकर ठेला-व्यापारियों की भीड़ के कारण इस मार्ग पर यात्री बसों व ट्रकों के चालकों को वाहनों को पार करने में भारी दिक़्क़तों का सामना करना पड़ता था। आए दिन जाम लगना आम बात थी। अब चौड़ीकरण के बाद नगर से होकर गुजरने वाले वाहनों को बार-बार के ट्रैफिक जाम से मुक्ति मिलेगी।
सिंहगढ़ रोड की चढ़ाइयों ने Pune Grand Tour 2026 के स्टेज-2 को बेहद चुनौतीपूर्ण बना दिया। 105.3 किमी की रेस में ल्यूक मुडग्वे ने लगातार दूसरी जीत दर्ज की।
महिला जागृति अभियान की पाँचवीं वर्षगांठ के अवसर पर इंदौर में आयोजित एक भव्य समारोह में वरिष्ठ साहित्यकार अरुणा खरगोनकर द्वारा संपादित विधवाओं की दशा पर केंद्रित स्मारिका का लोकार्पण किया गया. आयोजन विचार प्रवाह साहित्य मंच के तत्वावधान में इंदौर प्रेस क्लब स्थित एक रेस्तरां के सभागार में हुआ, जहाँ बड़ी संख्या में महिलाएँ उपस्थित थीं.कार्यक्रम का शुभारंभ महाराष्ट्र में विधवा प्रथा उन्मूलन आंदोलन के जनक प्रमोद झिंझड़े, वरिष्ठ पत्रकार व समाजकर्मी प्रसून लतांत, इंदौर प्रेस क्लब के मुकेश तिवारी, विचार प्रवाह साहित्य मंच की अध्यक्ष सुषमा दुबे और समाज चिंतक मनीष खरगोनकर ने संयुक्त रूप से किया.
राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना के संयोजक डॉ. प्रभु चौधरी के आकस्मिक निधन से शिक्षा और साहित्य जगत में शोक की लहर है।