चैत्र से फाल्गुन तक हिंदी महीनों और भारतीय त्योहारों को दर्शाती रंगीन बाल कविता चित्रात्मक प्रस्तुति

हिंदी महीनों के नाम

“हिंदी महीनों के नाम” एक सुंदर और शिक्षाप्रद बाल कविता है, जो चैत्र से फाल्गुन तक भारतीय पंचांग के बारह महीनों का सरल और रोचक परिचय देती है। प्रत्येक महीने को उससे जुड़े मौसम और प्रमुख त्योहारों के माध्यम से बच्चों के लिए यादगार बनाया गया है। यह कविता ज्ञान और संस्कृति का सुंदर संगम प्रस्तुत करती है।

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विषाद

महेश चार साल बाद घर लौटा था. सिर्फ राखी के लिए, और शायद इसलिए भी कि ज़िंदगी उसे एक मोड़ पर ले आई थी। उसके साथ थी भवानी एक आत्मविश्वासी, पढ़ी-लिखी और दृढ़ स्वभाव वाली स्त्री, जिसने घर की दहलीज़ पर कदम रखते ही सभी पुराने समीकरण बदल दिए। पिता की कटु टिप्पणियाँ, चाचा की चालें, और परिवार का दोगलापन सब उसकी शांत मुस्कान और सधे हुए शब्दों के आगे फीके पड़ने लगे। बहनें, जिनके लिए महेश ने जीवन खपा दिया, पहली बार किसी बाहरी से अपार स्नेह महसूस कर रही थीं। तीन दिनों ने वर्षों पुरानी दूरी को उधेड़कर रख दिया

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वह अफ़साना…

अश्विन सर, मुझे लेकर, कहां जा रहे हैं ? और क्यों ? छोटा शहर है, किसी ने मुझे इनके साथ देख लिया तो न जाने मेरे बारे में क्या सोचेगा ।
सर, ने मुझे एक एंप्लॉय से ज्यादा दोस्त समझा, मुझ पर विश्वास किया, और अपनी कुछ ऐसी बातें शेयर की जो वह शायद किसी और से कह नहीं सकते थे….. लेकिन उन्होंने जो कहा उसे सुनकर मैं सकते में आ गई …….. दोस्त समझा तो सही सलाह देना मेरा फर्ज था

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शिक्षक का आशीर्वाद

बचपन में मैंने अक्सर शिक्षक बनने का खेल खेला था। आज समझ आता है कि वह खेल केवल खेल नहीं था, बल्कि एक गहरी सीख थी। शिक्षक होना वास्तव में प्रेम, धैर्य और आनंद की कला है। हर विद्यार्थी अलग होता है और उसके लिए नए ढंग से समझ का ताना-बाना बुनना पड़ता है।

शिक्षक की सबसे बड़ी पहचान उसकी सरलता है—वह कठिन से कठिन विषय भी सहज तरीके से समझा देता है। यही ईश्वर का दिया हुआ अमूल्य उपहार है। गुरु और शिष्य का रिश्ता पवित्र और जीवनभर साथ रहने वाला होता है। गुरु का आशीर्वाद शब्दों से भी भारी है, क्योंकि वही जीवन की सबसे बड़ी पूँजी है।

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महिदपुर रोड में महावीर जन्म कल्याणक पर निकला भव्य जुलूस, श्रद्धालु जयकारे लगाते हुए

महावीर जन्म कल्याणक पर श्रद्धा में डूबा नगर

महिदपुर रोड में महावीर जन्म कल्याणक पर भव्य चल समारोह निकाला गया, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर नगर को भक्ति में सराबोर कर दिया।

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चांदी ने रचा नया इतिहास, कीमत 2 लाख 6 हजार पार

सोने-चांदी के बाजार में बुधवार को ऐसा तूफान आया कि इतिहास के सभी पुराने रिकॉर्ड टूट गए. चांदी ने पहली बार 2 लाख रुपये का आंकड़ा पार करते हुए 2 लाख 6 हजार रुपये प्रति किलो का ऑल टाइम हाई बना लिया. एक ही दिन में चांदी की कीमत में 9,500 रुपये की जबरदस्त उछाल दर्ज की गई. वहीं सोना भी रिकॉर्ड ऊंचाई पर मजबूती से टिका हुआ है. 24 कैरेट सोना 1 लाख 36 हजार 500 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बना हुआ है.

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मध्यप्रदेश के गांव में होली के बाद लगने वाला डोल मेला और अंगारों पर चलते श्रद्धालु

होली और रंगपंचमी पर लगने वाला डोल मेला

मध्यप्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में होली और रंगपंचमी के अवसर पर लगने वाला डोल मेला आस्था, परंपरा और लोक संस्कृति का अनूठा संगम है। झरावदा, गोगापुर और कसारी जैसे गांवों में श्रद्धालु अंगारों पर चलकर अपनी आस्था प्रकट करते हैं।

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नारी के मौन, संघर्ष और आत्मसम्मान को दर्शाती भावनात्मक हिंदी कविता का दृश्य

मौन

‘मौन’ स्त्री जीवन की उस पीड़ा और संघर्ष की कविता है, जहाँ सदियों से लादी गई अपेक्षाएँ, रिश्तों के बोझ और पहचान की तलाश एक तीखा प्रश्न बनकर उभरते हैं। यह कविता नारी की चुप्पी नहीं, उसके भीतर के प्रतिरोध और आत्मसम्मान की आवाज़ है।

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जब जीने की इच्छा खत्म हो जाए: इच्छा मृत्यु का मनोवैज्ञानिक विश्लेषण

जीने की इच्छा खत्म होना भी इच्छा मृत्यु ही है

जब किसी व्यक्ति के भीतर जीवन के प्रति आशा, उद्देश्य और उत्साह खत्म होने लगता है, तो वह मानसिक रूप से बेहद कठिन स्थिति से गुजर रहा होता है. मनोविज्ञान के अनुसार जीने की इच्छा का समाप्त होना केवल निराशा नहीं बल्कि गहरे मानसिक संघर्ष का संकेत है. इस लेख में इसी विचार का मनोवैज्ञानिक विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है.

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नई शुरुआत

यह कविता हमें याद दिलाती है कि पराजय को भूलकर स्वयं पर विश्वास करना और पुनः शुरुआत करना आवश्यक है। आने वाला कल बेहतर होगा, और प्रसन्नता, धैर्य, हौसला और सतत प्रयास हमें निराशा से आगे बढ़ने में मदद करेंगे। अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करके, अच्छे कर्म करते हुए हम सफलता और खुशियों की राह प्रशस्त कर सकते हैं।

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