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वृद्ध माता-पिता की सूनी आँखें अपने बच्चों की राह निहारते हुए – माता-पिता की उपेक्षा और अकेलेपन पर भावपूर्ण हिंदी कविता।

सूनी आँखें

सूनी आँखें” एक मार्मिक हिंदी कविता है, जो वृद्ध माता-पिता के अकेलेपन, उपेक्षा और उनके मन में अपने बच्चों के प्रति अटूट प्रेम को भावपूर्ण शब्दों में व्यक्त करती है। यह कविता हमें याद दिलाती है कि माता-पिता की सेवा और सम्मान ही सच्चा धर्म और सबसे बड़ा मानवीय कर्तव्य है

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उखड़ने के बाद भी ना हारा… देखिए इस पीपल की जिद!

जड़ों से उखाड़े जाने के बाद भी मुस्कुराना कैसे संभव है, यह सांवेर रोड की पहाड़ी पर लगाए गए पीपल के तने से सीखा जा सकता है। बिना शाखाओं के रहकर भी उसने हरियाली का संदेश दिया है। नगर निगम की यह पहल न सिर्फ पर्यावरण बचाने की मिसाल है, बल्कि पेड़ ट्रांसप्लांटेशन की एक प्रेरणादायक कहानी भी है।

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रामायण गाथा : धर्म की विजय

यह पद्यांश रामायण की मुख्य घटनाओं का संक्षिप्त और भावपूर्ण चित्रण करता है। इसमें वर्णन है कि दशरथ के प्रिय पुत्र श्रीराम ने पिताजी की आज्ञा का पालन करते हुए राजपाट त्यागकर सीता और लक्ष्मण के साथ वनगमन किया। स्वर्ण मृग की माया से सीता का हरण रावण ने साधु का वेश धरकर किया, जिसके बाद श्रीराम और लक्ष्मण व्याकुल होकर वन-वन सीता की खोज में निकले।

मार्ग में घायल जटायू मिले, जिन्होंने अपने प्राण त्यागकर सीता हरण का समाचार दिया। आगे चलकर श्रीराम को हनुमान, सुग्रीव और वानर सेना का सहयोग मिला। हनुमान ने सीता को खोजकर उनकी निशानी अंगूठी पहुँचाई और लंका दहन किया। नल-नील की सहायता से समुद्र पर सेतु का निर्माण कर श्रीराम की सेना लंका पहुँची। वहाँ भीषण युद्ध हुआ, जिसमें रावण का वध कर धर्म की विजय स्थापित की गई। अंततः देवताओं और ऋषियों ने प्रभु राम का गुणगान किया और उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में वंदित किया।

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मेघालय की हरी-भरी पहाड़ियों के बीच परिवार के साथ यात्रा का सुंदर दृश्य

भागती रेल, हँसता परिवार और मेघालय की यादें

कोलकाता से ट्रेन, गुवाहाटी से बस और फिर मेघालय की मनमोहक वादियों तक पहुँची यह पारिवारिक यात्रा केवल एक शादी में शामिल होने का सफ़र नहीं, बल्कि हँसी, अपनापन, रोमांच और प्रकृति की सुंदरता से भरा अविस्मरणीय संस्मरण है।

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A poor woman in a faded saree stands near a luxurious modern apartment building

दीवार के उस पार..

एक मासूम बच्चा सिर्फ एक सुंदर बिल्डिंग को छूना चाहता था, लेकिन समाज ने उसे “चोर” कहकर थप्पड़ दे दिया। यह कहानी गरीबी, स्वाभिमान और सपनों के बीच खड़ी अदृश्य दीवारों की मार्मिक सच्चाई को उजागर करती है।

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खिड़की के पास बैठा व्यक्ति, मन की थकान और अकेलेपन को दर्शाता दृश्य

“मन थके तो कौन?”

मन की थकान वह पीड़ा है, जिसे शब्दों में बयां करना आसान नहीं होता। “मन थके तो कौन?” कविता इसी अदृश्य दर्द को उजागर करती है, जहाँ तन की बीमारी का इलाज तो मिल जाता है, लेकिन मन के घाव केवल एक सच्चे अपने की उपस्थिति से ही भरते हैं। यह कविता हमें याद दिलाती है कि कभी-कभी सबसे बड़ा सहारा सिर्फ सुनने वाला एक दिल होता है।

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20 बच्चों को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार

वीर बाल दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देश के 18 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश के 20 बच्चों को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से सम्मानित किया। यह पुरस्कार वीरता, खेल, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पर्यावरण, कला-संस्कृति और समाज सेवा के क्षेत्र में असाधारण योगदान के लिए प्रदान किया जाता है।

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खानदानी लोग

मेहनत और आत्मसम्मान के बल पर आगे बढ़ी मीना, शोध के दौरान अपने मार्गदर्शक राहुल से प्रेम कर बैठती है। तीन वर्षों के संबंध के बाद राहुल जाति-घमंड और स्वार्थ के आगे प्रेम को नकार देता है। मीना के सपने, विश्वास और आत्मा सब एक साथ टूट जाते हैं, और वह सामाजिक क्रूरता का नंगा सच देखती है।

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सच या मान्यता ?

हम जैसा सोचते हैं, वैसा ही देखने और मानने लगते हैं। यही प्रवृत्ति “कंफर्मेशन बॉयस” कहलाती है। सच्चाई चाहे कुछ भी हो, हमारा दिमाग उसे उसी रूप में देखना चाहता है जैसा हम मानते हैं। यही कारण है कि किसी व्यक्ति, विचार या विचारधारा से जुड़ने के बाद हम उसकी गलतियाँ भी नजरअंदाज कर देते हैं। असल में दिक्कत सच्चाई में नहीं होती दिक्कत हमारे देखने के “चश्मे” में होती है। कई बार दाग हकीकत में नहीं, चश्मे पर ही होते हैं।

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पैंतीस-चालीस की स्त्री

“पैंतीस-चालीस की स्त्री—घर की रौनक, रिश्तों की संरक्षक, प्रेम और वात्सल्य की सजीव प्रतिमूर्ति। बिना किसी दवा या शौक के, जीवन में खुशियाँ और आशा फैलाती। सच में, ये स्त्री कितनी खूबसूरत होती है।”

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