Live Wire News literary portal with Gulmohar and Rajnigandha flowers

सिक्किम और अरुणाचल की हिमालयी झीलों का मूल्यांकन

नागालैंड विश्वविद्यालय की अगुवाई में सिक्किम और अरुणाचल की ऊँचाई वाली झीलों पर आधारित एक बहुवैज्ञानिक शोध परियोजना के तहत बर्फीली झीलों के फटने (GLOF) की संभावनाओं का गहराई से मूल्यांकन किया जा रहा है। बाथीमेट्रिक सर्वे, ड्रोन मैपिंग और 2D/3D फ्लड मॉडलिंग के ज़रिए इन झीलों की स्थिरता, पारिस्थितिकीय खतरे और जलवायु परिवर्तन से जुड़े प्रभावों का अध्ययन किया जाएगा।

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वृंदावन में संध्या समय बांसुरी बजाते कृष्ण और लज्जा से झुकी नजरों के साथ खड़ी राधा का दिव्य दृश्य

लज्जा

‘लज्जा’ कविता राधा-कृष्ण के दिव्य प्रेम, सौंदर्य और भावनात्मक गहराई को बेहद सुंदरता से प्रस्तुत करती है। इसमें लज्जा, भक्ति और प्रेम का अद्भुत संगम है, जो पाठक को वृंदावन की मनमोहक और आध्यात्मिक दुनिया में ले जाता है।

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बदलता गणपति उत्सव : भक्ति से दिखावे तक

गणपति बप्पा मोरया!….

यह जयघोष जब गूंजता है तो वातावरण भक्तिभाव से भर उठता है. लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने जब 1893 में मुंबई में सार्वजनिक गणेशोत्सव की परंपरा शुरू की थी, तब इसके पीछे केवल धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि एक गहरा सामाजिक और राजनीतिक उद्देश्य था. गुलामी की बेड़ियों में जकड़े भारतवासियों को एकजुट करने और स्वतंत्रता संग्राम की चेतना जगाने का यह एक सशक्त माध्यम बना. उस दौर में गणेशोत्सव ने समाज को जोड़ने, समानता और भाईचारे का संदेश देने का काम किया.

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आदिवासी गोदना से प्रेरित धरती पर उकेरी हरियाली, जंगल, नदियाँ और वृक्षों का प्रतीकात्मक कलात्मक दृश्य।

गोदना

‘गोदना’ कविता आदिवासी परंपरा और प्रकृति के गहरे संबंध को रूपक बनाकर धरती पर जंगलों और हरियाली को स्थायी पहचान की तरह सहेजने का संदेश देती है। यह कविता पर्यावरण, स्मृति और जीवन के सौंदर्य का हरित घोषणापत्र बन जाती है।

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अमरनाथ यात्रा मार्ग पर बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए जाते श्रद्धालु और स्वच्छता अभियान के तहत लगाए गए डस्टबिन

अमरनाथ यात्रा 2026: बाबा बर्फानी का स्वच्छ संदेश

अमरनाथ यात्रा 2026 देश की पहली जीरो लैंडफिल धार्मिक यात्रा बनने जा रही है। जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने 4 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के लिए कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन, बायोगैस निर्माण और प्लास्टिक मुक्त व्यवस्था की व्यापक तैयारी की है।

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मानस का परिमल

यह कविता विकसित मानस, सद्भाव, मानवता और वैचारिक चेतना की सुगंध को रेखांकित करती है। संकीर्ण सोच से ऊपर उठकर सत्य और परहित के मार्ग पर चलने का संदेश देती सशक्त रचना।

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महिला खिड़की के पास बैठकर कविता लिखते हुए, भावनात्मक और रचनात्मक माहौल

मेरी प्रिय कविता

“मेरी प्रिय कविता” एक ऐसी भावनात्मक रचना है, जिसमें कवयित्री ने अपने मन और शब्दों के बीच के गहरे संबंध को बेहद सहज और सुंदर तरीके से प्रस्तुत किया है। यह कविता बताती है कि कैसे कविता केवल शब्दों का समूह नहीं होती, बल्कि यह मन की उलझनों को सुलझाने का माध्यम भी बन जाती है।

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माँ तो माँ होती है…

माँ का साथ शब्दों का मोहताज नहीं होता। कभी वह धूप में छाता बन जाती है, तो कभी जीवन की भीड़ में सहारा। उम्र भले ही शरीर पर अपना असर छोड़ दे, पर माँ की मौजूदगी वही सुकून देती है. निःशब्द, निःस्वार्थ और पूरी तरह सुरक्षित। माँ के साथ बिताया हर पल स्मृति बनकर जीवन भर साथ चलता है

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सुहाग पर्व करवा चौथ

यह कविता भारतीय विवाहिता की भावनाओं और सांस्कृतिक परंपराओं का जीवंत चित्र प्रस्तुत करती है। माता-पिता से विदा होकर नए घर में प्रवेश, पति के प्रति समर्पण और सुहागन होने का गौरव इसमें प्रमुख हैं। सोलह श्रृंगार, लाल चुनरी, मांग टीका, मेहंदी, पायल, चूड़ियाँ और मंगलसूत्र जैसे आभूषण उसकी पारंपरिक सुंदरता और सांस्कृतिक पहचान को उजागर करते हैं। कविता में करवाचौथ व्रत और चौथ माता से अखंड सुहाग की कामना का भी उल्लेख है। यह अंश स्त्री के नए गृह जीवन, आशाओं और प्रेम भरे संबंधों की महत्ता को भावपूर्ण रूप से व्यक्त करता है।

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राम भक्त हनुमान दिव्य छवि

राम भक्त हनुमान

राम भक्त हनुमान पर आधारित यह भावपूर्ण हिंदी कविता उनकी भक्ति, शक्ति और संकट मोचन स्वरूप का सुंदर वर्णन करती है। पवनपुत्र की महिमा को समर्पित यह रचना आस्था और श्रद्धा से भर देती है।

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