मैं नारी हूँ पर अबला नहीं

मैं नारी हूँ, पर अबला नहीं। मेरे आँसुओं में कमजोरी नहीं है, बल्कि वह आग है जो सबको झुलसा सकती है। नारी ईश्वर की अनुपम रचना है। वह घर-आँगन और खेत-खलिहान में गीतों की तरह झूमती है। ममता की गागर और जीवन की धारा उसकी आत्मा में प्रवाहित हैं। वह सृजन की मिट्टी से गढ़ी गई और करुणा से सींची गई है।

फिर भी, कभी उसे भोग्या बना दिया गया, कभी जायदाद समझा गया, और कभी बंधनों में बाँध दिया गया। लेकिन वही नारी मातृशक्ति बनी, महिषासुर का वध किया और अपने परिवार की रक्षा करती रही। अब वह निर्भीक होकर खड़ी है, अन्याय से डरती नहीं और चुनौतियों का सामना करते हुए अपने अस्तित्व को आज़ाद कराती है। स्वतंत्र देश की स्वतंत्र नारी नवयुग का स्वर्णिम आगाज़ है।

Read More

रिश्तों को तह करती औरत

औरत हर दिन अपने रिश्तों को ऐसे तह करती है जैसे बिस्तर पर फैले कपड़े। शिकायतों की सलवटें मोड़कर छुपा देती है, बेरुख़ी को मुस्कान के पल्लू में ढँक लेती है। आँसुओं में धोकर, सहनशीलता की धूप में सुखाए इन रिश्तों को वह अपनी आत्मा के धागों से सीती रहती है। कुछ रिश्ते पुराने कुरतों जैसे ढीले हो चुके हैं, कुछ दुपट्टों जैसे बार-बार फिसलते हैं—फिर भी वह संभालती जाती है। लेकिन रात के सन्नाटे में उसके मन में एक सवाल उभरता है—क्या कभी कोई उसे भी इसी तरह तह करके सँभाले रखता होगा, या वह खुद ही वह अलमारी है, जिसमें सब रखा जाता है, पर कोई कभी खोलकर नहीं देखता।

Read More

पाकिस्तान में आटा 135 रुपये किलो पार

इस्लामाबाद.पाकिस्तान इस समय अपने इतिहास के सबसे गंभीर भूख और महंगाई संकट का सामना कर रहा है. गेहूं और आटे की कीमतों में बेतहाशा उछाल ने हालात बिगाड़ दिए हैं. सरकार भले ही पर्याप्त स्टॉक होने का दावा कर रही हो, लेकिन बाजार की तस्वीर कुछ और ही बयां कर रही है. कराची समेत देशभर…

Read More

जालंधर में बाढ़ का संकट गहराया, कई ट्रेनें रद्द और डायवर्ट

पंजाब में लगातार हो रही भारी बारिश ने हालात गंभीर बना दिए हैं. नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है और कई ज़िले बाढ़ की चपेट में आ चुके हैं. अब जालंधर में भी खतरा बढ़ गया है. सतलुज नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद निचले इलाकों में पानी भरना शुरू हो गया है, जिससे आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है. मिली जानकारी के अनुसार, गिदड़पिंडी- मखू रेलखंड पर बने पुल नंबर 84 पर पानी का स्तर खतरे के निशान के करीब पहुँच गया है

Read More

गौशाला से अस्पताल तक: सेवा ही जीवन

सालों की नौकरी के बाद जब जोशी जी ने रिटायरमेंट ली, तो सोचा था अब परिवार संग सुखमय समय बिताएँगे। लेकिन हकीकत कुछ और थी—अकेलापन और खालीपन ने उन्हें भीतर से तोड़ दिया। तभी जीवन ने नया मोड़ दिया। पहले गौशाला की सेवा, फिर अस्पताल में मैनेजर की जिम्मेदारी… और यहीं से शुरू हुई उनकी दूसरी पारी। आज वे सम्मान और आत्मविश्वास के साथ जी रहे हैं, यह साबित करते हुए कि “रिटायरमेंट अंत नहीं, बल्कि नई सुबह की शुरुआत है।”

Read More

“महाकाल” का गर्भगृह आम भक्तों के लिए नहीं खुलेगा

उज्जैन के महाकाल मंदिर के गर्भगृह में आम भक्तों को प्रवेश नहीं मिलेगा. मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने गर्भगृह में आम भक्तों के प्रवेश पर रोक और वीआईपी श्रद्धालुओं को विशेष अनुमति देने के उज्जैन कलेक्टर के आदेश को सही ठहराया है. कोर्ट ने साफ कर दिया है कि गर्भगृह में किसे प्रवेश मिलेगा, इसका फैसला सिर्फ कलेक्टर ही करेंगे.

Read More

पंजाब: संकट की घड़ी में मसीहा बने सोनू सूद

पंजाब इन दिनों भयंकर बाढ़ की चपेट में है. कई जिले पानी में डूब गए हैं, हज़ारों लोग बेघर हो गए हैं और जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है. ऐसे मुश्किल वक्त में अभिनेता और समाजसेवी सोनू सूद एक बार फिर लोगों की मदद के लिए आगे आए हैं.
सोनू सूद, जो खुद पंजाब से हैं, ने प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री पहुँचाने का काम शुरू कर दिया है. टीम द्वारा भोजन, दवाइयाँ और आश्रय उपलब्ध कराया जा रहा है. बचाव कार्यों में नावों का उपयोग कर कई परिवारों को सुरक्षित स्थानों तक पहुँचाया गया है.

Read More

इश्क़ और जुदाई

ज़िंदगी अब बेबस-सी हो गई है, मानो किसी अपने को खो देने के बाद उसका सहारा ही छिन गया हो। आँखों में आँसू हैं, जिन्हें नजरों में छुपाकर रखा गया है। तालीम और सीख की राह इतनी आसान नहीं होती, क्योंकि उस्ताद को नादान बनाकर कभी सीखा नहीं जा सकता।
अहसान का कर्ज़ कभी अदा नहीं हो सकता, और फिर भी लोग फर्ज़ भूलकर अहसान को भी भुला देते हैं। जब यादों की धूप छूने लगती है तो उदासी का साया पास बैठ जाता है।इश्क़ कोई बाज़ी नहीं, बल्कि दिल का अफसाना है। इसे जीतने के लिए चुराना पड़े तो उसमें मज़ा नहीं रह जाता। नादान दिल इश्क़ में डूब चुका है, आँसुओं के सैलाब में बरबाद हो गया है।

Read More

बदलता गणपति उत्सव : भक्ति से दिखावे तक

गणपति बप्पा मोरया!….

यह जयघोष जब गूंजता है तो वातावरण भक्तिभाव से भर उठता है. लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने जब 1893 में मुंबई में सार्वजनिक गणेशोत्सव की परंपरा शुरू की थी, तब इसके पीछे केवल धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि एक गहरा सामाजिक और राजनीतिक उद्देश्य था. गुलामी की बेड़ियों में जकड़े भारतवासियों को एकजुट करने और स्वतंत्रता संग्राम की चेतना जगाने का यह एक सशक्त माध्यम बना. उस दौर में गणेशोत्सव ने समाज को जोड़ने, समानता और भाईचारे का संदेश देने का काम किया.

Read More

सितंबर अहा!

सितंबर आते ही ऋतु-संधि का मधुर प्रकाश धरती पर उतर आता है। बरखा की विदाई और शरद की मुस्कान एक साथ झलकने लगती है। खेतों में धान और मक्का लहलहाते हैं, तो आँगनों में गेंदा और कमल अपनी सुगंध बिखेरते हैं। यह महीना केवल प्रकृति के बदलते रंगों का ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक उत्सवों का भी साक्षी है। पितृपक्ष की श्रद्धा और गणपति का उल्लास, दोनों एक साथ वातावरण को भक्ति और आनंद से भर देते हैं। नीलम-से गगन में पुखराज-सा सूरज चमकता है और मन के आँगन में एक नया उजास जगाता है। सचमुच, सितंबर नवजीवन का संदेश लेकर आता है।

Read More