इस्लामाबाद.
पाकिस्तान इस समय अपने इतिहास के सबसे गंभीर भूख और महंगाई संकट का सामना कर रहा है. गेहूं और आटे की कीमतों में बेतहाशा उछाल ने हालात बिगाड़ दिए हैं. सरकार भले ही पर्याप्त स्टॉक होने का दावा कर रही हो, लेकिन बाजार की तस्वीर कुछ और ही बयां कर रही है. कराची समेत देशभर में गेहूं और आटा रिकॉर्ड दामों पर बिक रहा है. आम जनता की थाली से रोटी छिनती नज़र आ रही है और भूख व राजनीतिक अस्थिरता का खतरा मंडरा रहा है.
बाजार में दाम बेलगाम
कराची के थोक बाजार में गेहूं का भाव 90 रुपये किलो पहुँच गया है, जो जुलाई में 62 और अगस्त के मध्य में 72 रुपये किलो था. चक्की आटा 135 रुपये किलो तक बिक रहा है. महज एक महीने में इसमें करीब 20 रुपये किलो की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
फाइन आटा 103 रुपये किलो और 10 किलो गेहूं आटे का पैकेट 794 रुपये तक पहुँच गया है, जबकि 20 किलो का पैकेट 1,700 से 2,100 रुपये के बीच बिक रहा है. व्यापारियों का कहना है कि अगर हालात नहीं सुधरे, तो आने वाले महीनों में आटा 200 रुपये किलो के पार जा सकता है.
सरकार बनाम बाजार की हकीकत
फेडरल फूड सिक्योरिटी मंत्री राना तनवीर हुसैन का दावा है कि देश में 33.47 मिलियन टन गेहूं उपलब्ध है और आयात की कोई जरूरत नहीं है. हालांकि, उद्योग जगत और मिलर्स इसे झूठा बता रहे हैं. कराची होलसेलर्स ग्रोसर्स एसोसिएशन के चेयरमैन रऊफ इब्राहीम के मुताबिक असल उत्पादन सिर्फ 2930 मिलियन टन है, जिसमें से 34 मिलियन टन पशुओं के चारे में चला गया. उनका आरोप है कि सरकारी नीतियों ने कृत्रिम संकट खड़ा कर दिया है.
भारी मानसूनी बारिश ने हजारों एकड़ फसलें चौपट कर दी हैं. अब तक 20 लाख से अधिक लोग विस्थापित हो चुके हैं और 50 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. बाढ़ का पानी सिंध की ओर बढ़ रहा है. संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि यह केवल प्राकृतिक आपदा नहीं बल्कि जलवायु परिवर्तन का असर है.
आर्थिक संकट और गेहूं की कमी
पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार पहले ही 9 अरब डॉलर से नीचे है. अगर गेहूं आयात करना पड़ा, तो इस पर 1.5 अरब डॉलर से अधिक खर्च आएगा. 2023 में पाकिस्तान ने 2.2 मिलियन टन गेहूं खरीदा था, जबकि 202425 में 3 मिलियन टन से अधिक की कमी की आशंका है. विश्व बैंक ने पाकिस्तान को जलवायु-प्रतिरोधी कृषि और सिंचाई सुधार के लिए 20 अरब डॉलर का पैकेज देने की घोषणा की है.
भूख से उपजने वाली अशांति का डर
पाकिस्तान की 72% आबादी की कैलोरी खपत गेहूं पर आधारित है. ऐसे में नान और रोटी बेचने वाले दाम बढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं. कराची के व्यापारियों का कहना है कि अगर यही हाल रहा तो करोड़ों परिवारों के लिए आटा पहुंच से बाहर हो जाएगा, जिससे देशभर में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन भड़क सकते हैं.
