कि मुझे सब याद है

…कि मुझे सब याद है

वह उन जगहों, एहसासों और यादों से दूर भागना चाहती है, जहाँ कभी उनका साथ था। फिर भी सच यही है कि सब कुछ बारिशें, स्पर्श, वादे और वो पल उसके भीतर अब भी ज़िंदा हैं। लेकिन वह चुप रहना चुनती है, क्योंकि कुछ यादें कह देने से नहीं, छुपा लेने से बचती हैं।

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उगते सूरज की रोशनी में आत्मगौरव और राष्ट्रप्रेम के भाव के साथ आगे बढ़ते लोगों का प्रेरक दृश्य, देशभक्ति हिंदी कविता का प्रतीकात्मक चित्र।

आत्मगौरव

आत्मगौरव, राष्ट्रभक्ति और मानव कल्याण के भावों से सजी यह हिंदी कविता देश की शक्ति, संस्कृति और विश्व कल्याण के संकल्प को प्रभावशाली शब्दों में व्यक्त करती है।

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फैटी लिवर

वर्ल्ड लिवर डे विशेष: जीवनशैली लिवर पर भारी तो नहीं?

“आज के समय में फैटी लिवर केवल एक सामान्य बीमारी नहीं रही, बल्कि यह लाइफस्टाइल डिसऑर्डर का संकेत बन चुकी है। कम उम्र में इसके बढ़ते मामले चिंताजनक हैं। यदि समय रहते खानपान में सुधार, नियमित व्यायाम और शुगर व ब्लड प्रेशर पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो यह आगे चलकर गंभीर लिवर और हृदय रोगों का कारण बन सकता है।”

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सौ सुनार की, एक लोहार की !

जब समाज सवाल करता है, तब एक माँ का विश्वास ही बेटी की सबसे बड़ी ताकत बनता है। तानों और वर्जनाओं के बीच पली उम्मीदें जब मुकाम तक पहुँचती हैं, तो हर बंद उँगली अपने आप हट जाती है और सपने इतिहास बन जाते हैं।

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खुली किताब से निकलती रोशनी और भावनाओं का संसार, साहित्य की शक्ति को दर्शाता दृश्य

किताबों की खुशबू

किताबों की खुशबू में एक ऐसा संसार बसता है, जहाँ शब्द नहीं, भावनाएँ बोलती हैं। साहित्य केवल अक्षरों का मेल नहीं, बल्कि आत्मा की आवाज़ है, जो हर युग में मन को छूती है। यह कभी भक्ति, कभी सत्य, तो कभी प्रेम और जीवन की गहराई बनकर हमारे भीतर उतरता है। अंधेरों में यही एक दीप बनकर राह दिखाता है और उलझनों में उत्तर बनकर सामने आता है। इसलिए किताबों से जुड़ना, दरअसल खुद से जुड़ना है क्योंकि साहित्य ही हमें इंसान बनने का सच्चा अर्थ सिखाता है।

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…अगर ज़िंदगी फिर से मुड़ जाए

इस कविता में एक स्त्री अपने जीवन के उस मोड़ पर खड़ी होकर गुज़रे समय को फिर से जीने की ख्वाहिश करती है — वो अधूरे सपने, वो रिश्ते, वो बचपन की अलमारी, और माँ की बातें… सब कुछ एक बार फिर सहेजने की उम्मीद लिए। यह एक आत्ममंथन है, एक नई शुरुआत की ओर बढ़ने का भावुक आह्वान।”

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तिरंगा – हमारा मान

भारत में “तिरंगा” शब्द भारतीय राष्ट्रीय ध्वज को संदर्भित करता है। हर स्वतंत्र राष्ट्र का अपना ध्वज होता है, जो उसकी स्वतंत्रता का प्रतीक है। भारत के राष्ट्रीय ध्वज को उसके वर्तमान स्वरूप में 15 अगस्त 1947 को अंग्रेजों से भारत की स्वतंत्रता से कुछ दिन पहले, 22 जुलाई 1947 को आयोजित संविधान सभा की बैठक के दौरान अपनाया गया था। यह 15 अगस्त 1947 से 26 जनवरी 1950 तक भारत के राष्ट्रीय ध्वज के रूप में और उसके बाद भारत गणराज्य के राष्ट्रीय ध्वज के रूप में कार्य करता रहा।

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जीवन चक्र और अंतिम विदाई

50 वर्षों का साथ, सुख-दुख की साझेदारी और परिवार की खुशियाँ — सब एक क्षण में बदल जाती हैं जब जीवन साथी इस संसार से विदा हो जाता है। यह अनुभव अकेलेपन, स्मृतियों और जीवन के चक्र की गहनता को सामने लाता है। इस लेख में हम एक पति के दृष्टिकोण से उस अंतिम विदाई और जीवन के अनुभवों की झलकियाँ साझा कर रहे हैं, जिन्होंने वर्षों तक परिवार और बच्चों के लिए समर्पण किया।

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बसंत के मौसम में खिले फूलों और हरियाली के बीच खड़ी एक मुस्कुराती महिला

मौसम-ए-बहार

“मौसम-ए-बहार” एक खूबसूरत हिंदी कविता है, जो बसंत ऋतु की ताजगी, प्रकृति की रंगीन छटा और मन की गहरी भावनाओं को बेहद कोमलता से व्यक्त करती है। इस कविता में बाग-बगीचों की हरियाली, खिलते फूल, और हल्की-हल्की हवाओं का स्पर्श एक जीवंत दृश्य रचते हैं, जो पाठक को सीधे प्रकृति की गोद में ले जाता है।

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एक भारतीय महिला शांत भाव से आकाश की ओर देखती हुई, चेहरे पर प्रेम और संतोष की चमक, आध्यात्मिक मिलन और आंतरिक खुशी का प्रतीक

“मुझे मिल गया मन का मीत”

“मुझे मिल गया मन का मीत” एक भावपूर्ण हिंदी कविता है, जिसमें प्रेम, भक्ति और आत्मसमर्पण की गहराई को सुंदर शब्दों में व्यक्त किया गया है। यह कविता एक ऐसे मिलन की अनुभूति कराती है, जहाँ मन को सच्चा साथी मिलता है और जीवन संगीत से भर उठता है। नारी-मन की संवेदनाओं, प्रतीक्षा और पूर्णता का यह काव्यात्मक चित्रण पाठकों को भाव-विभोर कर देता है।

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