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कुसुम का धागा

सुबह की चाय का कप हाथ में लिए मैं अख़बार पढ़ रही थी कि एक खबर ने जैसे दिल को भीतर तक हिला दिया इंदौर में बस में छूटा नवजात शिशु, मां-बाप फरार.
खबर छोटी थी, पर असर बड़ा. कुछ पंक्तियों में लिखी उस घटना के पीछे जाने कितनी कहानियां दबी थीं. लिखा था. एक दंपत्ति बस में सवार हुए, गोद में एक नन्हा सा बच्चा था, मुश्किल से पंद्रह दिन का. थोड़ी देर बाद वे बोले कि कुछ सामान लेना है, बस से उतर गए.

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जीवन चक्र और अंतिम विदाई

50 वर्षों का साथ, सुख-दुख की साझेदारी और परिवार की खुशियाँ — सब एक क्षण में बदल जाती हैं जब जीवन साथी इस संसार से विदा हो जाता है। यह अनुभव अकेलेपन, स्मृतियों और जीवन के चक्र की गहनता को सामने लाता है। इस लेख में हम एक पति के दृष्टिकोण से उस अंतिम विदाई और जीवन के अनुभवों की झलकियाँ साझा कर रहे हैं, जिन्होंने वर्षों तक परिवार और बच्चों के लिए समर्पण किया।

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शिक्षक का आशीर्वाद

बचपन में मैंने अक्सर शिक्षक बनने का खेल खेला था। आज समझ आता है कि वह खेल केवल खेल नहीं था, बल्कि एक गहरी सीख थी। शिक्षक होना वास्तव में प्रेम, धैर्य और आनंद की कला है। हर विद्यार्थी अलग होता है और उसके लिए नए ढंग से समझ का ताना-बाना बुनना पड़ता है।

शिक्षक की सबसे बड़ी पहचान उसकी सरलता है—वह कठिन से कठिन विषय भी सहज तरीके से समझा देता है। यही ईश्वर का दिया हुआ अमूल्य उपहार है। गुरु और शिष्य का रिश्ता पवित्र और जीवनभर साथ रहने वाला होता है। गुरु का आशीर्वाद शब्दों से भी भारी है, क्योंकि वही जीवन की सबसे बड़ी पूँजी है।

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आन है हिंदी

हिंदी हमारी मातृभाषा ही नहीं, बल्कि देश का सम्मान और अभिमान है। इसमें प्रेम बसता है, स्वरों की मधुर तान गूंजती है और हर शब्द अपनी सरस लय से हृदय को छू लेता है। यह हमारी सभ्यता और सरल आचरण की पहचान है, जो चरित्र को निखारती और राष्ट्र की शान को बढ़ाती है। हिंदी के बिना ज्ञान अधूरा है, इसलिए इसे सदा सर्वोपरि रखना ही हमारा कर्तव्य है।

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यदि प्रेम में होते बुद्ध…

अगर बुद्ध प्रेम में होते, तो शायद वे किसी वृक्ष की छाया के बजाय किसी प्रिय की मुस्कान को ध्यानस्थ होने का स्थान चुनते। उनके उत्तर तब भी मौन होते, लेकिन उस मौन में प्रेम की एक गहरी समझ समाई होती। वे प्रेमिका की आँखों में जीवन का अर्थ खोजते, जैसे निर्वाण की झलक किसी मानस में देख रहे हों। वे प्रेम को उसी तरह थामते जैसे उन्होंने उस कटोरे को थामा था जिसमें संसार का सारा दुःख समाया था—बिना अपेक्षा, बिना आहट। उनका प्रेम निःस्वार्थ और निर्लिप्त होता, जैसे संन्यास लिया हो—पूरी तरह समर्पित, फिर भी पूर्ण स्वतंत्र। न उसमें मोह होता, न विरक्ति—सिर्फ सहज स्वीकृति। प्रेम, उनके लिए, कोई उन्माद नहीं बल्कि एक शांत, स्थिर जलधारा होता, जो “मैं” और “तू” के पार ले जाती। तब शायद हम भी समझ पाते कि प्रेम भी एक मार्ग है—मोक्ष की ओर, जहाँ खोना ही पाना है, और समर्पण ही सबसे बड़ा बोध।

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अपने परिवार के साथ खड़े एक स्नेही और संघर्षशील भारतीय पिता का भावपूर्ण दृश्य, जो प्रेम, त्याग, सुरक्षा और पारिवारिक मूल्यों का प्रतीक है।

पिता का प्रेम

पिता केवल एक रिश्ता नहीं, बल्कि परिवार की नींव, विश्वास का स्तंभ और त्याग का दूसरा नाम हैं। प्रस्तुत है पिता के प्रेम, संघर्ष और समर्पण को समर्पित एक हृदयस्पर्शी कविता।

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खानदानी लोग

मेहनत और आत्मसम्मान के बल पर आगे बढ़ी मीना, शोध के दौरान अपने मार्गदर्शक राहुल से प्रेम कर बैठती है। तीन वर्षों के संबंध के बाद राहुल जाति-घमंड और स्वार्थ के आगे प्रेम को नकार देता है। मीना के सपने, विश्वास और आत्मा सब एक साथ टूट जाते हैं, और वह सामाजिक क्रूरता का नंगा सच देखती है।

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सूर्यास्त के समय प्रकृति के बीच खड़ा एक जोड़ा, जो खामोशी में गहरे प्रेम और जुड़ाव को महसूस कर रहा है

प्रेम और चाहत

चाहत अक्सर एक इच्छा से जन्म लेती है—किसी को पाने, उसे अपने करीब रखने और उसके साथ अपने सपनों को पूरा करने की चाह। इसलिए समय, परिस्थितियों और मनःस्थिति के बदलने के साथ चाहत भी बदल सकती है। जब उम्मीदें पूरी नहीं होतीं या हालात साथ नहीं देते, तो चाहत का रंग फीका पड़ने लगता है।

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मोबाइल पर डिजिटल जनगणना फॉर्म भरता हुआ व्यक्ति

घर बैठे जनगणना: अब मोबाइल से भरें फॉर्म

भारत में पहली डिजिटल जनगणना के तहत नागरिक 16 से 30 अप्रैल तक घर बैठे ऑनलाइन फॉर्म भर सकते हैं। फॉर्म सबमिट करने के बाद उन्हें SE-ID मिलेगी, जिससे डेटा का सत्यापन किया जाएगा।

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भारत में रोटी के लिए लाइन में खड़े अमीर और गरीब लोग, भूख और जीवन संघर्ष को दर्शाता भावुक यथार्थवादी दृश्य।

सब लोग तेरे दीवाने

“सब लोग तेरे दीवाने” एक संवेदनशील हिंदी कविता है, जो रोटी के महत्व और भूख की पीड़ा को गहराई से व्यक्त करती है। यह कविता बताती है कि अमीर हो या गरीब, हर इंसान की पहली जरूरत रोटी ही है। जीवन के संघर्ष, इच्छाओं और हालातों के बीच रोटी की तलाश कभी खत्म नहीं होती। कवि ने सरल शब्दों में समाज की वास्तविकता, गरीबी और मानवीय जरूरतों को बेहद प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया है। यह कविता पाठकों को सोचने पर मजबूर करती है कि रोटी केवल भोजन नहीं, बल्कि जीवन का आधार है।

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