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मोह और प्रेम

लिखने को कुछ नहीं था, परंतु शब्द मस्तिष्क में ऐसे कुलबुला रहे थे मानो बाहर आने को व्याकुल हों।
मन के दो छोर सामने थे—एक ओर मोह, जो मुट्ठी में क़ैद था, और दूसरी ओर प्रेम, जो आज़ाद पंछी की तरह उड़ना चाहता था। यह विडंबना ही थी कि प्रेम ने ही मोह को जन्म दिया, फिर भी उसी की कैद प्रेम को असह्य हो गई।मोह के भीतर संदेह के जीवाणु पलते रहे, जिन्हें प्रेम ने कभी स्वीकार नहीं किया।प्रेम बसंत की शुरुआत था—नवजीवन का उत्सव, जबकि मोह पतझड़ का सूना संदेश।
प्रेम उमड़ते समंदर की लहर था, मोह रेत का वह कण, जो मुट्ठी में थमता ही नहीं और फिसल जाने को आतुर रहता है।

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टूटी हुई कठपुतली की डोरियों के साथ आत्मविश्वास से खड़ी एक भारतीय महिला, जिसके चेहरे पर आत्मसम्मान, स्वतंत्रता और नई शुरुआत का भाव झलक रहा है। पृष्ठभूमि में अंधकार से उजाले की ओर जाता दृश्य नारी सशक्तिकरण और स्वतंत्र अस्तित्व का प्रतीक है।

कठपुतली

‘कठपुतली’ एक विचारोत्तेजक हिंदी कविता है, जो स्त्री को केवल रिश्तों या सामाजिक बंधनों तक सीमित नहीं करती, बल्कि उसे सृजन, चेतना, आत्मसम्मान और स्वतंत्र अस्तित्व का प्रतीक मानती है। कविता यह संदेश देती है कि स्त्री किसी की कठपुतली नहीं, बल्कि अपने जीवन की स्वयं निर्माता है। संवेदनशील शब्दों और सशक्त भावों से सजी यह रचना नारी सम्मान, समानता और आत्मविश्वास की प्रेरणा देती है।

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एक हरे-भरे पार्क में भावुक आलिंगन का दृश्य, जहां एक युवा दंपति, एक मां और उसका बेटा तथा दो मित्र एक-दूसरे को गले लगाकर प्रेम, अपनापन और भावनात्मक जुड़ाव का एहसास कर रहे हैं।

आलिंगन की ताकत

कभी-कभी एक सच्चा आलिंगन वह सब कह देता है, जो हजारों शब्द नहीं कह पाते। गले लगाना केवल प्रेम का इज़हार नहीं, बल्कि सुरक्षा, विश्वास और भावनात्मक जुड़ाव का एहसास भी है। जानिए क्यों एक छोटा-सा आलिंगन रिश्तों में बड़ी खुशियां ला सकता है।

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“कंधों पर दुनिया, आँखों में समंदर”

पुरुष ज़ुबां से कम बोलते हैं, पर उनकी आँखें सब कह देती हैं. प्यार, फ़िक्र, थकान और छुपी हुई नमी। ज़िम्मेदारियों में दबे हुए भी वे घर की जड़ बनकर सबकी खुशी में खुद को भूल जाते हैं।

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रविवार, 13 जुलाई को मध्य रेल पर मेगा ब्लॉक
– कई एक्सप्रेस और लोकल ट्रेनें प्रभावित

13 जुलाई, रविवार को मध्य रेल के मुंबई मंडल में विद्याविहार–ठाणे और कुर्ला–वाशी के बीच मेगा ब्लॉक लागू रहेगा। इस दौरान कई मेल/एक्सप्रेस ट्रेनें डायवर्ट की जाएंगी और हार्बर लाइन की उपनगरीय सेवाएं रद्द रहेंगी। रेलवे ने यात्रियों को असुविधा से बचने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था और विशेष लोकल ट्रेनों की सुविधा भी उपलब्ध कराई है।

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एक भारतीय महिला शांत भाव से आकाश की ओर देखती हुई, चेहरे पर प्रेम और संतोष की चमक, आध्यात्मिक मिलन और आंतरिक खुशी का प्रतीक

“मुझे मिल गया मन का मीत”

“मुझे मिल गया मन का मीत” एक भावपूर्ण हिंदी कविता है, जिसमें प्रेम, भक्ति और आत्मसमर्पण की गहराई को सुंदर शब्दों में व्यक्त किया गया है। यह कविता एक ऐसे मिलन की अनुभूति कराती है, जहाँ मन को सच्चा साथी मिलता है और जीवन संगीत से भर उठता है। नारी-मन की संवेदनाओं, प्रतीक्षा और पूर्णता का यह काव्यात्मक चित्रण पाठकों को भाव-विभोर कर देता है।

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पूर्णिमा की शांत रात में भारतीय शहर की एक संकरी गली, सामने खेतों के ऊपर उगता सुनहरी रोशनी से दमकता चाँद, धुंध में नहाया स्ट्रीट लाइट और हल्की एम्बर रोशनी में चमकते घर; माहौल में सादगी, स्मृति और अपनापन झलकता है।

पून्नो का चाँद

यह रचना पूर्णिमा की रात के एक दुर्लभ दृश्य को माँ की लोकबोली से जोड़ती है। चाँद सिर्फ आकाशीय पिंड नहीं रह जाता, बल्कि स्मृतियों, रिश्तों और भाषा के स्नेहिल स्पर्श में बदल जाता है—जहाँ “पूर्णिमा” माँ के लिए “पुन्नो” बन जाती है।

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“वृंदावन में बाँके बिहारी मंदिर के बाहर श्रद्धालुओं की भीड़ और आध्यात्मिक वातावरण”

वृंदावन की पुकार

यह लेख एक ऐसी वृंदावन यात्रा का वर्णन करता है, जो केवल स्थान परिवर्तन नहीं बल्कि आत्मा से संवाद बन गई। बाँके बिहारी मंदिर के दर्शन, बरसाना की अनुभूति और यमुना तट की शांति ने इसे एक दिव्य अनुभव बना दिया।

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यदि प्रेम में होते बुद्ध…

अगर बुद्ध प्रेम में होते, तो शायद वे किसी वृक्ष की छाया के बजाय किसी प्रिय की मुस्कान को ध्यानस्थ होने का स्थान चुनते। उनके उत्तर तब भी मौन होते, लेकिन उस मौन में प्रेम की एक गहरी समझ समाई होती। वे प्रेमिका की आँखों में जीवन का अर्थ खोजते, जैसे निर्वाण की झलक किसी मानस में देख रहे हों। वे प्रेम को उसी तरह थामते जैसे उन्होंने उस कटोरे को थामा था जिसमें संसार का सारा दुःख समाया था—बिना अपेक्षा, बिना आहट। उनका प्रेम निःस्वार्थ और निर्लिप्त होता, जैसे संन्यास लिया हो—पूरी तरह समर्पित, फिर भी पूर्ण स्वतंत्र। न उसमें मोह होता, न विरक्ति—सिर्फ सहज स्वीकृति। प्रेम, उनके लिए, कोई उन्माद नहीं बल्कि एक शांत, स्थिर जलधारा होता, जो “मैं” और “तू” के पार ले जाती। तब शायद हम भी समझ पाते कि प्रेम भी एक मार्ग है—मोक्ष की ओर, जहाँ खोना ही पाना है, और समर्पण ही सबसे बड़ा बोध।

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Elite international cyclists competing in Bajaj Pune Grand Tour 2026 on scenic Western Ghats route near Pune during UCI 2.2 road cycling race.

बजाज पुणे ग्रैंड टूर-2026 वैश्विक स्तर पर

बजाज पुणे ग्रैंड टूर 2026 के जरिए भारत की पहली UCI 2.2 बहु-चरणीय रोड साइक्लिंग प्रतियोगिता का वैश्विक मंच पर भव्य आगाज हुआ है. 80 से अधिक देशों में सीधा प्रसारण और ओलंपिक क्वालिफिकेशन अंकों के साथ यह दौड़ भारतीय साइक्लिंग के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि मानी जा रही है.

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