
रीता मिश्रा तिवारी, प्रसिद्ध लेखिका
मैं तुमसे वैसे ही प्यार करता हूँ जैसे
किसी अंधेरी रात में जुगनू..!
जैसे अंधेरों से सुक्ष्म रूप में
छाया और आत्मा के बीच प्रेम..!
मैं तुमसे वैसे ही प्यार करता हूँ जैसे किसी
अंधेरी कोठरी में दिया और बाती..!
मैं चुनता हूँ तुम्हें तुम्हारे शब्दों की सीमा से परे
तुम्हारी ख़ामोशी को गले लगाना..!
मैं चाहता हूँ तुम्हारे एकांत को प्रेम करना
क्यूंकि वहां किसी का अधिपत्य नहीं होता..!
इसीलिए चाहता हूँ तुम्हें मेरे ख्यालों में पकड़ कर रखना
क्योंकि सपनों में तुम्हारा अंत नहीं होता..!
मेरी सांसों की डोर टूटने तक ब्रह्मांड से तुम्हें मांगता हूँ
इसलिए कि मैं तुम्हें छोड़ नहीं सकता..!

Really emotional connection !