प्यार, दर्द और यादों का अनकहा सफर

प्रतिभा इंदु, भिवाड़ी (राजस्थान)
मौसम रुला रहे हैं तेरे इंतज़ार के,
हालात आके देख दिले बेकरार के ।
दिल में महक रहे हैं ये ज़ख्मों के फूल भी ,
मौसम हसीन आ गये हैं एतबार के ।
रातें गुज़र रहीं हैं उदासी में आज तक ,
लम्हात याद आ रहे हैं तेरे प्यार के।
दर्दे जु़दाई की मुझे न और दो सज़ा ,
तड़पा रहे हैं दिन वो तेरी यादगार के।
मुझको न मिल सके तुम इस बात का है ग़म ,
इंदु कहां गये दिन दिल के क़रार के !
