इंतज़ार का मौसम

बरसात में खिड़की के पास बैठा उदास व्यक्ति, इंतज़ार और जुदाई की भावनाओं में खोया हुआ.

प्यार, दर्द और यादों का अनकहा सफर

प्रतिभा इंदु, भिवाड़ी (राजस्थान)

मौसम रुला रहे हैं तेरे इंतज़ार के,

हालात आके देख दिले बेकरार के ।

दिल में महक रहे हैं ये ज़ख्मों के फूल भी ,

मौसम हसीन आ गये हैं एतबार के ।

रातें गुज़र रहीं हैं उदासी में आज तक ,

लम्हात याद आ रहे हैं तेरे प्यार के।

दर्दे जु़दाई की मुझे न और दो सज़ा ,

तड़पा रहे हैं दिन वो तेरी यादगार के।

मुझको न मिल सके तुम इस बात का है ग़म ,

इंदु कहां गये दिन दिल के क़रार के !

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