इंतज़ार का मौसम
यह ग़ज़ल इंतज़ार, जुदाई और प्यार की गहराई को बेहद खूबसूरती से बयां करती है, जहां हर लफ्ज़ दिल की बेचैनी और यादों का दर्द महसूस कराता है।

यह ग़ज़ल इंतज़ार, जुदाई और प्यार की गहराई को बेहद खूबसूरती से बयां करती है, जहां हर लफ्ज़ दिल की बेचैनी और यादों का दर्द महसूस कराता है।
मेरी क़िस्मत में तेरा साथ अगर हो जाएज़िंदग़ी का मेरा आसान सफ़र हो जाएऔर कुछ भी नहीं ख़्वाहिश मेरी अब इसके सिवामेरे महबूब की बस मुझ पे नज़र हो जाए.