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रात के आकाश के नीचे अकेला बैठा व्यक्ति, सितारों की ओर देखते हुए, चेहरे पर उदासी और जुदाई का भाव

अधूरा आशियाना

यह ग़ज़ल मोहब्बत, जुदाई और दिल की कश्मकश को बेहद खूबसूरती से बयां करती है। हर शेर में बिछड़ने का दर्द, इंतजार और यादों की टीस झलकती है, जो पाठक को भावनाओं की गहराई में डूबने पर मजबूर कर देती है।

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खिड़की के पास बैठी एक युवती, शहर की रोशनी को देखते हुए गहरी सोच में डूबी है, हाथ में फोन है लेकिन वह किसी को संदेश नहीं भेज रही, चेहरे पर हल्की उदासी और अनकही मोहब्बत का एहसास झलक रहा है।

खामोशी में छुपा प्यार

कभी-कभी प्यार शब्दों में नहीं, खामोशी में पनपता है। यह वही एहसास है जो दिल में चुपचाप जगह बना लेता है, बिना इज़हार के भी गहराता जाता है। इस अनकही मोहब्बत में एक सुकून भी है और एक हल्की सी कसक भी, जहां हर खामोशी के पीछे सिर्फ एक ही नाम छुपा होता है।

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