इंतज़ार का मौसम
यह ग़ज़ल इंतज़ार, जुदाई और प्यार की गहराई को बेहद खूबसूरती से बयां करती है, जहां हर लफ्ज़ दिल की बेचैनी और यादों का दर्द महसूस कराता है।

यह ग़ज़ल इंतज़ार, जुदाई और प्यार की गहराई को बेहद खूबसूरती से बयां करती है, जहां हर लफ्ज़ दिल की बेचैनी और यादों का दर्द महसूस कराता है।
यह ग़ज़ल मोहब्बत, जुदाई और दिल की कश्मकश को बेहद खूबसूरती से बयां करती है। हर शेर में बिछड़ने का दर्द, इंतजार और यादों की टीस झलकती है, जो पाठक को भावनाओं की गहराई में डूबने पर मजबूर कर देती है।
कभी-कभी प्यार शब्दों में नहीं, खामोशी में पनपता है। यह वही एहसास है जो दिल में चुपचाप जगह बना लेता है, बिना इज़हार के भी गहराता जाता है। इस अनकही मोहब्बत में एक सुकून भी है और एक हल्की सी कसक भी, जहां हर खामोशी के पीछे सिर्फ एक ही नाम छुपा होता है।