बड़ी होटल : जब खबरें साँस लिया करती थीं

बड़ी होटल केवल एक होटल नहीं थी, बल्कि पूरे गाँव की धड़कन थी। वाल्व वाले रेडियो की गूंज में लोग अपने सुख-दुख, गर्व और शोक साझा करते थे। वहीं से देश-दुनिया की खबरें गाँव की गलियों में उतरती थीं और पोरवाल परिवार की सेवा-परंपरा ने इसे सच्चा सूचना केंद्र बना दिया।

Read More
बरसाती शाम में कसारी से महिदपुर रोड के सुनसान कच्चे रास्ते पर दूध की केटली लिए चलता बालक और दूर दिखाई देती सफेद परछाई।

भूत समझा, माइलस्टोन निकला

महिदपुर रोड और कसारी के पुराने सुनसान रास्तों की पृष्ठभूमि में लिखा यह संस्मरण बचपन के डर, ग्रामीण जीवन और कल्पना की उड़ान को जीवंत करता है। एक सफेद परछाई, भूत का भ्रम और अंत में उसका माइलस्टोन निकलना—कहानी को रोचक और भावनात्मक बना देता है।

Read More

विनोद कुमार शुक्ल : देह से विदा, साहित्य में सदा

विनोद कुमार शुक्ल भले ही देह से विदा हो गए हों, पर उनकी लेखनी आज भी साँस लेती है। उनके शब्दों की मंत्रमुग्धता पाठक को यह एहसास कराती है कि सच्चा साहित्य कभी समाप्त नहीं होता, वह चेतना में जीवित रहता है।

Read More

एक दुआ

यह कविता एक माँ के निःस्वार्थ प्रेम और आशीर्वाद की अभिव्यक्ति है, जहाँ वह अपने सुख और उम्र तक को त्याग कर संतान के लिए उज्ज्वल, सुरक्षित और छायादार जीवन की कामना करती है।

Read More

पल्लवी रानी का काव्य संग्रह ‘चितचोर’ विमोचित

मुंबई प्रेस क्लब में आयोजित काव्य संग्रह ‘चितचोर’ के लोकार्पण अवसर पर साहित्यकारों ने कवयित्री पल्लवी रानी की कविताओं को भारतीय सांस्कृतिक चेतना से जुड़ा बताया। डॉ. हरि जोशी ने उनकी रचनाओं में दिनकर और दुष्यंत कुमार की प्रतिध्वनि अनुभव करते हुए उन्हें भविष्य की सशक्त काव्य-सम्भावना बताया।

Read More

जीवन एक संगीत

जीवन एक मधुर संगीत की तरह है, जिसमें सुख और दुःख उसके स्वरों की भाँति आते-जाते रहते हैं। संयम, विश्वास और परहित की भावना से भरा यह जीवन, गीता के ज्ञान को आत्मसात कर हर भव से पार हो सकता है। जब मन ईर्ष्या और लोभ से मुक्त होकर आशा, ममता और सत्य को अपनाता है, तब जीवन स्वयं एक संगीतमय चमन बन जाता है।

Read More

एक पाती मुसाफ़िर के नाम…

जाने से पहले की वह आख़िरी मुलाक़ात जहाँ मौसम, सड़कें, पेड़ और खामोशी तक हमारी बातों के साक्षी बने। मीठी यादों, अनकहे जज़्बातों और एक गलतफ़हमी के बीच खड़ी चुप्पी की दीवार, जो आज भी लौटने से रोकती है।

Read More

चर्चे थे मुख्तियार भाई की बेलबॉटम की मोरी के

जब राजेश खन्ना का जादू ढल रहा था और अमिताभ बच्चन का दौर उभर रहा था, तब कस्बाई जवानी भी बड़े परदे की नकल में अपने सपने सिलवा रही थी। महिदपुर रोड पर फैशन का मतलब था मुख्यत्यार भाई की बेलबॉटम की मोरी, जमीन से रगड़ खाती पैंट और उसे बचाने के लिए लोहे की चेन का अनोखा जुगाड़। यह सिर्फ पहनावा नहीं था, बल्कि उस समय की जवानी का स्वाभिमान, जिद और रचनात्मकता थी, जिसने छोटे शहर को भी अपने तरीके से ‘स्टाइलिश’ बना दिया।

Read More

गुड़ वाली चाय और मैं

गुड़ वाली चाय और मैं दोनों थोड़े देसी, थोड़े अनगढ़, पर पूरी तरह ईमानदार। जैसे गुड़ अपने रंग को धीरे-धीरे पानी में खोलता है, वैसे ही मेरी मिठास भी समय लेकर सामने आती है। सादगी में भी स्वाद छिपा होता है, यही हमें एक-दूसरे से जोड़ता है।

Read More

अटल ललाम: राष्ट्रभक्ति और नेतृत्व की प्रतिमा

25 दिसंबर 1924 को जन्मे अटल जी बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी, कवि, वक्ता और प्रधानमंत्री थे। उन्होंने राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखा, जनजागरण और राष्ट्रप्रेम की अलख जगाई, और भारत को परमाणु शक्ति के माध्यम से वैश्विक पहचान दिलाई।

Read More