
मंजूलता, प्रसिद्ध लेखिका, नोएडा
मुझे किसी अनदेखे से प्यार है तो है
बस कल्पना में ही मेरे शामिल है तो है
दुनिया की नजरों में हम पागल हैं तो हैं
सब कहे छोड़ो, कैसे छोडूं, दिल में है तो है
इक बार जिसे दिल में बिठाया वही है तो है
झूठ से हमें हमेशा नफ़रत है तो है
सच पर अटूट विश्वास है तो है
फूलों से ही नहीं खारों से भी प्यार है तो है
घरों की खिड़कियों से प्यार है तो है
जहाँ से आस-पास देखना पसंद है तो है

वाह ।
Aksar aisa hota hai jisse mohabbat kro wo jaan hi nahi pata