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ओ पारिजात

रात गहरी हो रही है और हवा में पारिजात की सुगंध घुल रही है। मैं जागता हूँ और कविताएँ लिखता हूँ, पर शब्द अब इस खुशबू में मदहोश होने लगे हैं। मैं रंगों की सुंदरता नहीं चाहता .मुझे तो प्रेम का वही लाल रंग चाहिए जो आत्मा को महका दे। मैं चाहता हूँ कि मैं पारिजात के आँगन की उसी मिट्टी में बो दिया जाऊँ, और वहीं लगातार महकता रहूँ। इस सिंदूरी भोर में, एक स्पर्श भर से मेरी कविता फिर जीवित हो उठी है।

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अनदेखे से प्यार

मुझे किसी अनदेखे से प्यार है ऐसा प्यार जो किसी चेहरे, आवाज़ या उपस्थिति का मोहताज नहीं. वह बस मेरी कल्पना में बसा है, मेरी सोच में साँस लेता है. लोग कहते हैं, यह पागलपन है, पर अगर दिल को सुकून मिलता है तो इसे क्या नाम दूँ? एक बार किसी को दिल में जगह दे दी, तो वही मेरा सच बन गया. मुझे झूठ से हमेशा ऩफरत रही है, इसलिए यह एहसास भी पूरी सच्चाई से भरा है. मुझे जीवन के फूल ही नहीं, उसके काँटे भी प्रिय हैं क्योंकि दर्द भी तो किसी गहराई से आता है. मुझे उन खिड़कियों से प्यार है, जहाँ से मैं दुनिया को देखती हूँ वही खिड़कियाँ शायद उस अनदेखे तक पहुँचने का रास्ता हैं.

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नेशनल बुक रीड डे : किताबों के साथ एक दिन

आज का नेशनल बुक रीड डे केवल एक तारीख नहीं, बल्कि किताबों के साथ समय बिताने, उन्हें पढ़ने और उनकी संगति का आनंद लेने का अवसर है। पढ़ना केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है—यह तनाव कम करता है, याददाश्त और एकाग्रता बढ़ाता है, और कल्पनाओं को उड़ान देता है। किताबें हमें इतिहास से जोड़ती हैं, सोच बदलती हैं, और जीवन को नई दिशा देती हैं। चाहे बच्चों को पढ़कर सुनाएँ, दोस्त या परिवार के साथ साझा करें, या अकेले अपने कोने में बैठकर पढ़ें—किताबों का असली आनंद अनुभव और आत्मा से जुड़ने में है।

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सुबह की रोशनी में दीवार के कोने में जाल बुनती मकड़ी, पास में खिड़की से आती हल्की धूप

उम्मीद के जाल में उलझी मैं

“हां……
यही तो करती हूँ मैं भी हर दिन ….
हर सुबह मैं भी तो ढेरों उम्मीद,
कुछ ख्वाबों-ख्वाहिशों का लेकर
ताना-बाना,
बुनने लगती हूँ अनवरत
एक जाल भीतर अपने l”

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