अनदेखे से प्यार

मुझे किसी अनदेखे से प्यार है ऐसा प्यार जो किसी चेहरे, आवाज़ या उपस्थिति का मोहताज नहीं. वह बस मेरी कल्पना में बसा है, मेरी सोच में साँस लेता है. लोग कहते हैं, यह पागलपन है, पर अगर दिल को सुकून मिलता है तो इसे क्या नाम दूँ? एक बार किसी को दिल में जगह दे दी, तो वही मेरा सच बन गया. मुझे झूठ से हमेशा ऩफरत रही है, इसलिए यह एहसास भी पूरी सच्चाई से भरा है. मुझे जीवन के फूल ही नहीं, उसके काँटे भी प्रिय हैं क्योंकि दर्द भी तो किसी गहराई से आता है. मुझे उन खिड़कियों से प्यार है, जहाँ से मैं दुनिया को देखती हूँ वही खिड़कियाँ शायद उस अनदेखे तक पहुँचने का रास्ता हैं.

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नैनों के दर्पण में

“नैनों के दर्पण में तेरी तस्वीर उभरती है, तेरे बिना हर पल वीरान लगता है। तेरी यादों का जादू मेरे दिल में बसा है, और तेरी खुशबू हवाओं में घुलकर मेरी दुनिया को रंगीन बना देती है।”

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तुम क्या जानो…

तुम प्रेम को अधिकार और जीत मानते रहे, जबकि मेरे लिए यह समर्पण और खामोशी रहा। हर औरत में कहीं न कहीं एक मीरा होती है, जो बिना प्रतिदान की आशा प्रेम करती चली जाती है। हर युग में प्रेम तुमने जीता है, और हमने उसे जिया है—उस दर्द, विरह और त्याग के साथ।

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“पूर्णिमा की रात समुद्र किनारे चाँदनी में चमकती लहरें, शांत वातावरण में भावनात्मक गहराई का दृश्य”

लहरें…

यह कविता शांत चित्त और गहरी भावनाओं को चाँद और समुद्र की लहरों के माध्यम से व्यक्त करती है, जहां मिलन की तड़प और प्रकृति का अद्भुत संबंध झलकता है।

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