चाँदनी रात में डायरी पर लिखी प्रेम ग़ज़ल, पास में रखा फाउंटेन पेन और हल्की रोशनी

ग़ज़ल

“तिरी पलकों के साये में” एक भावपूर्ण हिंदी ग़ज़ल है जो प्रेम की नज़ाकत, रिश्तों की अहमियत, इल्म की रोशनी और माँ-बाप के अनकहे दर्द को बेहद संवेदनशील अंदाज़ में प्रस्तुत करती है। हर शेर जीवन की सच्चाई से रूबरू कराता है।

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गिलास में ताजा सफेद दूध, पास में फल और अनाज, स्वास्थ्यवर्धक आहार का दृश्य

दूध बड़ा गुणकारी है

दूध बड़ा गुणकारी है” एक शिक्षाप्रद हिंदी कविता है जो दूध के पोषण गुणों और स्वास्थ्य लाभों को सरल शब्दों में प्रस्तुत करती है। यह कविता बच्चों और बड़ों दोनों को नियमित दूध पीने के लिए प्रेरित करती है।

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सौतेले पिता को गले लगाती भावुक बेटी, पारिवारिक प्रेम का मार्मिक दृश्य

पापा

“पापा” एक ऐसी मार्मिक कहानी है जिसमें एक छोटी बच्ची अपने असली पिता के जाने के बाद सौतेले पिता को स्वीकार नहीं कर पाती। दर्द, तकरार और मासूम भावनाओं के बीच अंततः रिश्ते का सच्चा रूप सामने आता है।

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कुएँ में गिरने का रोमांचक अनुभव, 4 साल की मासूम बालिका चमत्कारिक रूप से बची

कुएँ में गिरना

भागलपुर में बचपन की एक दिल दहला देने वाली घटना, जब 4 साल की बच्ची खेल-खेल में कुएँ में गिर गई, लेकिन भगवान की कृपा से सुरक्षित बाहर निकाल ली गई. पढ़ें पूरा संस्मरण.

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सर्द मौसम में घायल डिलीवरी बॉय टूटी घड़ी देखते हुए बाइक स्टार्ट करता हुआ, चेहरे पर थकी लेकिन व्यंग्यपूर्ण मुस्कान।

हंसी

सर्द हवा, फटा स्वेटर, तीन महीने की फीस और मां की दवाइयों के बीच जूझता एक डिलीवरी बॉय… हादसे के बाद भी समय पर डिलीवरी की चिंता। ‘हंसी’ एक ऐसी कहानी है जो संघर्ष की आग में तपते इंसान की विद्रूप मुस्कान को सामने लाती है।

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ठंडी शाम में चाय के साथ पुरानी यादों में खोई महिला, मोबाइल स्क्रीन पर दोस्त से बातचीत

कुछ अनकहे रिश्ते…

कुछ अनकहे रिश्ते” एक मार्मिक कहानी है जो दोस्ती, ममता और विश्वास के उस पवित्र बंधन को दर्शाती है, जिसे नाम की आवश्यकता नहीं होती। यह रचना भावनाओं की गहराई और रिश्तों की सच्चाई को स्पर्श करती है।

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भारतीय ट्रांसजेंडर व्यक्ति आत्मविश्वास के साथ खड़ा, पृष्ठभूमि में संविधान की प्रतीकात्मक छवि

मैं भी मनुष्य हूँ…

“मैं भी मनुष्य हूँ” कविता तीसरे लिंग के अस्तित्व, सम्मान और अधिकारों की सशक्त अभिव्यक्ति है। यह रचना समाज से स्वीकार्यता और समानता की मांग करते हुए मानवीय संवेदनाओं को गहराई से उजागर करती है।

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बाढ़ से डूबता गांव और हाथ में किताब लिए खड़ी उदास बच्ची

“झूठा गांव”

“झूठा गांव” एक भावनात्मक कहानी है जिसमें किताबों के सुंदर गांव और बाढ़ से जूझते वास्तविक गांव का अंतर दिखाया गया है। गंगा की भीषण कटान के बीच एक बच्ची के टूटते सपनों की मार्मिक प्रस्तुति पाठकों को भीतर तक झकझोर देती है।

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डॉ. संजुला सिंह ‘संजू’ को ‘मातृभाषा रत्न’ से सम्मानित

जमशेदपुर की साहित्यकार डॉ. संजुला सिंह ‘संजू’ को अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर शब्द प्रतिभा फाउंडेशन नेपाल द्वारा “मातृभाषा रत्न” मानद उपाधि से सम्मानित किया गया।

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बड़ा बैनजी श्यामलता शर्मा: एक युग का अंत

बड़ा बैनजी- श्यामलता शर्मा

महिदपुर रोड की 95 वर्षीय सेवानिवृत्त शिक्षिका श्यामलता शर्मा, जिन्हें पूरा क्षेत्र “बड़ा बैनजी” के नाम से जानता था, अब हमारे बीच नहीं रहीं। बेटियों की शिक्षा के लिए उनका संघर्ष, उनका स्नेह और उनकी रोशन मुस्कान पीढ़ियों तक याद की जाएगी।

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