अकेली वृद्ध माँ बैठी हुई, आँखों में आँसू और मन में पीड़ा, सामाजिक उपेक्षा का प्रतीक

क्यों वृद्धाश्रम में जाऊँ

यह कविता उस माँ की पीड़ा को स्वर देती है, जिसने जीवन भर अपनी संतान को सींचा, सँवारा और बड़ा किया, लेकिन अंत में उसी से वृद्धाश्रम जाने का आदेश मिला। यह रचना समाज से एक करुण सवाल पूछती है क्या माँ का अब कोई ठौर नहीं?

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मित्र की मित्रता

यह कहानी एक ऐसे युवा की है जो अपने बीमार भाई के लिए पढ़ाई, करियर और भविष्य तक को दाँव पर लगाने को तैयार है। दोस्ती, परिवार और मानवता जब साथ खड़ी होती है, तो असंभव भी संभव हो जाता है।

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आखिर क्यों…?

यह कहानी एक ऐसे बुज़ुर्ग व्यक्ति की त्रासदी है जिसने जीवन भर अपने परिवार के लिए सब कुछ किया, लेकिन जीवन की साँझ में अकेलापन, उपेक्षा और भूख उसके हिस्से आई। यह लेख समाज से सवाल करता है क्या पुरुष का दर्द सचमुच अदृश्य होता है?

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शहर बनते गाँव का दृश्य, जहाँ पक्के मकानों के बीच अकेलापन और रिश्तों की दूरी दिखती है

मिट्टी की खुशबू रोती रही

यह कविता गाँव से शहर बने समाज की उस पीड़ा को उजागर करती है, जहाँ पक्के मकानों के बीच रिश्ते कच्चे होते चले गए। मिट्टी की खुशबू, चूल्हे का धुआँ और अपनापन सब कुछ शहरी भीड़ में कहीं खो सा गया है।

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रात के समय खिड़की के पास बैठा एक लेखक, कोरे काग़ज़ पर कलम से भावनाएँ लिखता हुआ

एहसासों का लावा…

लेखक केवल शब्द नहीं लिखता, वह अपने भीतर उमड़ते भावों को स्याही में घोलकर काग़ज़ पर उतारता है। कलम उसकी भावनाओं का वाहक बनती है और कोरा काग़ज़ अहसासों का सजीव संसार। यही लेखन श्रोताओं के दिल तक पहुँचकर अपनी अमिट छाप छोड़ देता है।

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एक वरिष्ठ पत्रकार टूटी बाइक और छोटी दीवार पर संतुलन बनाकर मोबाइल से फोटो लेते हुए, पीछे भीड़ और राजनीतिक कार्यक्रम का दृश्य, पत्रकारिता के जुनून का प्रतीक।

एक क्लिक, जो पत्रकारिता का प्रतीक बन गया

वरिष्ठ पत्रकार कीर्ति राणा का एक फोटो-क्लिक मीडिया में वायरल होकर खुद एक “ख़बर” बन
गए। राहुल गांधी के दौरे के दौरान उन्होंने जोखिम भरा एंगल लेकर फोटो खींचा, और उसी क्षण उनका यह एक्शन पत्रकारिता के असली जुनून और समर्पण का प्रतीक बन गया जिसे RK स्टूडियोज के प्रसिद्ध लोगो की तरह मध्यप्रदेश की पत्रकारिता का प्रतीक बनाया जा सकता है

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कोहरे भरे रास्ते पर खड़ा व्यक्ति दूर दिखाई देती रोशनी की ओर देखता हुआ, ईश्वर की योजना पर विश्वास और आशा का प्रतीक

कठिन रास्ते, सुंदर मंज़िलें…

“उसके प्लान पर विश्वास रखना” एक प्रेरक रचना है जो जीवन की कठिन परिस्थितियों को ईश्वर की गहरी योजना के रूप में देखने का दृष्टिकोण देती है। यह रचना सिखाती है कि असफलता, दूरी और अभाव भी हमें मज़बूत, जागरूक और कृतज्ञ बनाने की प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं।

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सुबह की सुनहरी रोशनी में खेतों के बीच उगता सूरज और गोद में शिशु लिए माँ की छाया, धैर्य, संयम और आशा का प्रतीक

…बस धीरज का छोर न छूटे

बस धीरज का छोर न छूटे” एक सारगर्भित हिंदी कविता है जो धैर्य, सहनशीलता और अडिग विश्वास को जीवन का सबसे बड़ा बल बताती है। प्रकृति, मातृत्व, इतिहास और भक्ति के उदाहरणों के माध्यम से यह रचना बताती है कि समय चाहे कितना भी कठिन हो, धीरज ही सफलता और शांति की कुंजी है।

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सूरज रे तू बढ़ता चल

सूरज रे तू बढ़ता चल” एक प्रेरणादायक कविता है जो अंधकार, थकान और कठिन परिस्थितियों के बीच निरंतर आगे बढ़ते रहने का संदेश देती है। सूरज यहाँ केवल एक खगोलीय पिंड नहीं, बल्कि साहस, उम्मीद और उजाले का प्रतीक बनकर उभरता है।

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एक टूटा हुआ काँच का गिलास और खिड़की के पास उदास मुद्रा में बैठा व्यक्ति, जीवन और रिश्तों के टूटने का प्रतीक

टूटना

यह कविता ‘टूटना’ शब्द के बहाने जीवन की उन सभी चीज़ों को छूती है, जिनका टूटना केवल भौतिक नहीं बल्कि भावनात्मक और अस्तित्वगत पीड़ा भी बन जाता है। पेंसिल की नोक से लेकर रिश्तों और विश्वास तक हर टूटन एक गहरी चुप्पी छोड़ जाती है।

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