टूटा डॉक्टर बनने का सपना, बनीं कॉमेडी की स्टार
छोटे शहर से निकलकर अभिनय की दुनिया में अपनी पहचान बनाने वाली मंजू बृजनंदन शर्मा की कहानी हर युवा के लिए प्रेरणा है। असफलताओं को ताकत बनाकर उन्होंने सफलता की नई मिसाल कायम की।

छोटे शहर से निकलकर अभिनय की दुनिया में अपनी पहचान बनाने वाली मंजू बृजनंदन शर्मा की कहानी हर युवा के लिए प्रेरणा है। असफलताओं को ताकत बनाकर उन्होंने सफलता की नई मिसाल कायम की।
आधी रात…
तूफ़ान अपने चरम पर था और घर के भीतर एक अजीब सन्नाटा पसरा हुआ था।अचानक फोन की घंटी गूंजी और शेफाली का दिल जैसे धड़कना भूल गया। सब कुछ सामान्य लग रहा था…पर फिर भी, उसके भीतर कुछ था जो कह रहा था सब ठीक नहीं है…
कुएँ के चारों ओर का घेरा टूटते ही सब कुछ शांत हो गया…लेकिन ब्लैकवुड वैली ने उन्हें छोड़ा नहीं…वो बस उन्हें अपने साथ थोड़ा-थोड़ा ले गई।अब वे जिंदा थे…पर पहले जैसे नहीं……
अविश्वास की अंधेरी दीवारों के बीच भी,
एक छोटा सा झरोखा खुल सकता है.
जहाँ से उजली धूप भीतर आए और जीवन फिर से वसंत बन जाए।क्योंकि अंततः,हमें मानना ही पड़ता है. सचमुच बहुत सुंदर है दुनिया।
नई उम्र में ही रंजू की दुनिया जैसे अचानक रंगहीन हो गई थी। जिस आईने के सामने वह कभी सजती-संवरती थी, अब उसी आईने में उसे अपना चेहरा भी अजनबी सा लगता था। बारहवें के दिन जब ननद उसके लिए श्रृंगार का सामान लेकर आई, तो उसके भीतर दबा हुआ सारा दर्द आँसुओं में बह निकला“अब इन सबका क्या करूँ दीदी?”
“क़दमों की जंजीर” एक ऐसी प्रेरक कहानी है, जो दिखाती है कि धैर्य, समझ और सकारात्मक सोच से किसी भी रूढ़िवादी बंधन को बदला जा सकता है।
यह ग़ज़ल आत्ममंथन, खोई हुई उम्मीद और फिर खुद से प्रेम करने की यात्रा को बेहद खूबसूरती से बयां करती है।