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साहित्य संकल्प राँची इकाई की प्रथम ऑनलाइन काव्य गोष्ठी में शामिल कवि और साहित्यकार

राँची में सजा शब्दों का महाकुंभ

साहित्य संकल्प, राँची इकाई द्वारा प्रथम ऑनलाइन काव्य गोष्ठी का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम साहित्य प्रेमियों के लिए एक यादगार अवसर साबित हुआ, जिसमें देशभर के रचनाकारों ने अपनी सशक्त प्रस्तुतियों से समां बांध दिया।
गोष्ठी की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. उर्मिला सिन्हा ने की। कार्यक्रम का संयोजन, संचालन एवं स्वागत उद्बोधन अर्पणा सिंह ‘अर्पी’ ने कुशलतापूर्वक किया।

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बालकनी कविता: एक छोटी जगह, बड़े ख्वाब

बालकनी

बालकनी केवल घर का हिस्सा नहीं, मन का खुला आकाश है। यह वह स्थान है जहाँ विचारों को उड़ान मिलती है, सपनों को पंख लगते हैं और जीवन की छोटी-बड़ी हलचलें दिखाई देती हैं। कभी नन्ही चिड़िया यहाँ समय बिताती है, तो कभी गिलहरी अपने करतब दिखाती है। महिलाएँ सजती हैं, युवा मोबाइल में खो जाते हैं, बुज़ुर्ग यादों के किस्से सुनाते हैं और बच्चे दुनिया को समझते हैं। यही जगह आँसू छुपाने, उदासी मिटाने और क्रोध शांत करने का भी सहारा बनती है। अंत में एक कप कॉफी संग मुस्कुराहट लौट आती है।

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एक अकेला कवि रात में दीपक की रोशनी में कविता लिखता हुआ, भावनात्मक और तन्हा माहौल।

दिल की तन्हाई

‘दिल की तन्हाई’ एक मार्मिक कविता है, जो कवियों के भीतर छिपे दर्द, संवेदनाओं और शब्दों की ताकत को उजागर करती है। कविता बताती है कि कवि अपने जख्मों को कविता में ढाल देते हैं और अपने दर्द को सुरों में सजाकर दुनिया के सामने रखते हैं। वे दूसरों के दुख को इसलिए समझ पाते हैं क्योंकि स्वयं पीड़ा से गुजर चुके होते हैं। इस रचना में कवि मन की गहराई, तन्हाई और भावनात्मक संसार का सुंदर चित्रण किया गया है। यह कविता पाठकों को कवि के अंतर्मन से जोड़ने का कार्य करती है।

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साहित्यकार मधु मिश्रा पुस्तकों के साथ बैठी हुई, लेखन और साहित्यिक उपलब्धियों को दर्शाता प्रेरणादायक दृश्य।

मधु मिश्रा : संवेदना की लेखिका

मधु मिश्रा हिंदी साहित्य जगत की एक संवेदनशील, सक्रिय और बहुमुखी प्रतिभा सम्पन्न रचनाकार हैं। उन्होंने कहानी, लघुकथा, कविता, हाइकु और आलेख के माध्यम से समाज, स्त्री संवेदना और रिश्तों के यथार्थ को प्रभावशाली स्वर दिया है। उनका लघुकथा संग्रह धूप के पाँव तथा कहानी संग्रह ड्रीम गर्ल विशेष रूप से चर्चित रहे हैं। वर्ष 2001 से निरंतर उनकी रचनाएँ अनेक प्रतिष्ठित समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में प्रकाशित हो रही हैं। अनेक राष्ट्रीय सम्मानों से सम्मानित मधु मिश्रा आज नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा स्रोत बन चुकी हैं।

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फोन पर माता-पिता से तलाक पर बहस करती महिला, भावनात्मक पारिवारिक संघर्ष का दृश्य।

बसा बसाया घर

‘बसा-बसाया घर’ एक ऐसी मार्मिक लघुकथा है, जिसमें बेटी अपने तलाक के फैसले पर अडिग रहती है। माता-पिता उसे समझाने की कोशिश करते हैं, लेकिन बातचीत के दौरान वह उनके अतीत का ऐसा सच सामने रख देती है, जिससे दोनों निरुत्तर हो जाते हैं। कहानी रिश्तों में विश्वास, दोहरे मापदंड और आत्मसम्मान जैसे गंभीर विषयों को उजागर करती है। यह कथा बताती है कि दूसरों को सलाह देना आसान है, लेकिन जब सच सामने आता है तो अपने ही बनाए मूल्य टूट जाते हैं।

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ट्रेन के सफर में जागी पुरानी यादों के बीच

खुशबू वाला शहर

ट्रेन के एक छोटे से ठहराव ने अमृता के दिल में दबी यादों को फिर जगा दिया। सूखा गुलाब, सुनहरा पेन और बीते लम्हों की खुशबू के बीच यह कहानी प्रेम, दूरी और अधूरी मोहब्बत का दर्द समेटे हुए है।

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बठिंडा की काली राख से ढकी बस्ती में रहने वाले एक गरीब परिवार

काली राख की बस्ती

यह मार्मिक कथा बठिंडा की काली राख से ढकी बस्ती में रहने वाले एक गरीब परिवार की है, जिसकी जिंदगी एक दर्दनाक घटना के बाद हमेशा के लिए बदल गई। गरीबी, मजबूरी और समाज की कठोर सच्चाइयों को उजागर करती यह कहानी दिल को झकझोर देती है।

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महाभारत सभा में द्रौपदी श्रीकृष्ण को पुकारती हुई, दुशासन चीरहरण का प्रयास करता है, दिव्य प्रकाश से अनंत वस्त्र प्रकट होते हैं और सभा मौन खड़ी है।

हे गोविंद! मेरी लाज बचाओ

द्रौपदी के चीरहरण प्रसंग पर आधारित यह मार्मिक कविता नारी सम्मान, अन्याय के विरुद्ध पुकार और श्रीकृष्ण की दिव्य रक्षा का भावपूर्ण चित्रण करती है।

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अनुष्का भटनागर डिस्ट्रिक्ट टॉपर महिदपुर रोड

महिदपुर रोड की अनुष्का ने इंदौर में बढ़ाया मान

महिदपुर रोड की होनहार छात्रा अनुष्का भटनागर ने 12वीं बायोलॉजी बोर्ड परीक्षा 2026 में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर डिस्ट्रिक्ट टॉपर बनने का गौरव हासिल किया।

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