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भारी बारिश और बाढ़ के बीच नदी किनारे खड़ा एक गरीब ग्रामीण व्यक्ति, दूर झोपड़ी की ओर देखते हुए भावुक और चिंतित मुद्रा में।

जिजीविषा

कोसी नदी के उफान, गरीबी और लाचारी के बीच घिरा मंगरु एक पल के लिए हार मानने को तैयार हो जाता है, लेकिन पत्नी और बेटी का चेहरा उसे फिर जीने की ताकत दे देता है। “जिजीविषा” जीवन से हार न मानने की मार्मिक कथा है।

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बालकनी में बैठी एक महिला अपनी दिवंगत माँ को याद करते हुए भावुक संस्मरण लिख रही है, पीछे रात का शांत वातावरण दिखाई दे रहा है।

“हर हिस्से की गूँज है माँ”

माँ केवल एक रिश्ता नहीं, बल्कि हमारे अस्तित्व की सबसे गहरी गूँज होती है। “हर हिस्से की गूँज है माँ” एक बेटी की भावुक स्मृतियों से बुना गया ऐसा संस्मरण है, जिसमें माँ के प्रेम, अनुशासन, त्याग, संवेदनाओं और बिछड़ने के दर्द को बेहद आत्मीयता से व्यक्त किया गया है। यह लेख हर उस व्यक्ति के दिल को छू जाएगा, जिसने अपनी माँ के स्नेह को महसूस किया है।

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भारत भवन में पत्रकारिता और मीडिया के मुद्दों पर चर्चा करते वरिष्ठ पत्रकारों की परिचर्चा।

खबर में ड्रामा और पत्रकारिता का मापन तय हो : त्रिवेदी

भारत भवन में आयोजित ‘प्रणाम उदन्त मार्तण्ड’ कार्यक्रम के अंतर्गत वरिष्ठ पत्रकारों ने पत्रकारिता के बदलते स्वरूप, पेड न्यूज, एआई, डिजिटल मीडिया और मौलिकता जैसे मुद्दों पर गंभीर विचार साझा किए। वक्ताओं ने पत्रकारिता में आत्मावलोकन और जिम्मेदारी को समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया।

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बारिश भरी रात में खिड़की के पास बैठा एक उदास व्यक्ति, जो मोहब्बत की यादों में खोया हुआ है।

दर्द-ए-मोहब्बत

यह भावपूर्ण ग़ज़ल मोहब्बत में बिछड़ने के बाद दिल में उठने वाली तन्हाई, टूटन और यादों के दर्द को बेहद संवेदनशील शब्दों में व्यक्त करती है। हर शेर दिल की गहराइयों को छू जाता है

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रात में मेज पर बैठा एक लेखक, जो अनकहे शब्दों और गहरे विचारों में खोया हुआ है।

ठहरे हुए लफ़्ज़

यह भावपूर्ण कविता उन अनकहे लफ़्ज़ों की कहानी कहती है, जो मन में ठहर तो जाते हैं, लेकिन सही समय और अभिव्यक्ति न मिलने पर अंतस की गहराइयों में कहीं खो जाते हैं।

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कॉलेज की भीड़ में अकेला और मानसिक तनाव से जूझता एक युवा छात्र।

भीड़ में अकेला

“भीड़ में अकेला” एक संवेदनशील हिंदी कहानी है, जो युवाओं के भीतर चल रहे मानसिक संघर्ष, सामाजिक दबाव और संवाद की कमी को बेहद मार्मिक ढंग से प्रस्तुत करती है। यह कहानी बताती है कि समय पर समझ, प्रेम और संवाद किसी की जिंदगी बदल सकते हैं।

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माँ को भी सुनो कभी

माँ के प्रेम, त्याग और अनकही भावनाओं को व्यक्त करती यह भावपूर्ण कविता हमें याद दिलाती है कि माँ सिर्फ हमारी देखभाल करने वाली नहीं, बल्कि अपने सपनों और भावनाओं वाली एक संवेदनशील इंसान भी है।

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प्रेम और विरह में डूबी एक महिला की भावुक प्रतीक्षा को दर्शाती यथार्थवादी छवि।

सजल

प्रेम की तन्हाइयों, विरह की पीड़ा और मिलन की अनंत प्रतीक्षा को भावपूर्ण शब्दों में पिरोती यह सुंदर सजल पाठकों के हृदय को गहराई से स्पर्श करती है। प्रेम में समर्पण, यादों की बेचैनी और मिलने की अटूट चाह इस रचना को अत्यंत मार्मिक बना देती है।

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सोफे पर साथ बैठी माँ और बेटी का भावुक चित्र, माँ को समर्पित हिंदी कविता का दृश्य।

मैं परछाईं माँ की

“मैं परछाईं माँ की” एक भावपूर्ण हिंदी कविता है, जिसमें माँ के संघर्ष, संस्कार, प्रेम और आशीर्वाद को बेटी की भावनाओं के माध्यम से खूबसूरती से व्यक्त किया गया है।

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