
बिंदू सूर्यवंशी, मंडी (हिमाचल प्रदेश)
मेरे नज़रिए में धरा का
श्रेष्ठ कवि किसान है।
जिसकी बीज-बुआई से उगता
अनाज,
जिसे खाकर उदर होता तृप्त,
खुलती हैं आँखें,
प्राण मिलते हैं इस शिथिल
देह को।
कंपन से मुक्त होती हैं ये
उंगलियाँ,
तब कहीं लेखनी रच पाती है
पंक्तियाँ।
