कलश स्थापना एवं महत्व

नवरात्रि में स्थापित कलश, आम्र पत्तों और नारियल के साथ पूजा स्थल नवरात्रि में स्थापित कलश

आशी प्रतिभा ग्वालियर (मध्य प्रदेश)

नवरात्रि के नौ दिनों में देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। नवरात्रि पवित्रता, शक्ति और दिव्यता का प्रतीक है तथा हिंदू धर्म का एक अत्यंत पवित्र त्योहार माना जाता है। यह वर्ष में दो बार आती है। इसके अतिरिक्त, गुप्त रूप से साधना और सिद्धि हेतु भी दो बार नवरात्रि मनाई जाती है, जिन्हें हम गुप्त नवरात्रि के रूप में जानते हैं। ऊर्जा के सकारात्मक स्वरूप में देवी की आराधना ही इसका मूल आधार है।

नवरात्रि में कलश स्थापना का विशेष महत्व है। इसे घर में सकारात्मक ऊर्जा के वास एवं सम्पन्नता का प्रतीक माना जाता है।

नवरात्रि में कलश स्थापना निम्न मंत्रों के जाप के साथ करनी चाहिए—
“ॐ भूर्भुवः स्वः, हे वरुण! इह आगच्छ, इह तिष्ठ, स्थापयामि।”
या देवी का ध्यान करते हुए, अपनी मनोकामना के साथ दुर्गा बीज मंत्र के जाप द्वारा भी स्थापना की जा सकती है।

कलश स्थापना से संबंधित हमारे पुराणों में यह मान्यता है कि कलश को भगवान विष्णु के रूप में मानकर उसकी पूजा की जाती है। इसलिए देवी की पूजा से पहले कलश का पूजन किया जाता है। पूजा स्थल को पहले गंगाजल से पवित्र किया जाता है, फिर गणपति के आवाहन के साथ सभी देवी-देवताओं को आमंत्रित किया जाता है। हाथ में पुष्प लेकर शुद्ध मिट्टी या अक्षत पर कलश स्थापना का विधान है।

कलश को विश्व ब्रह्मांड, विराट ब्रह्म और भू-पिंड का प्रतीक भी माना जाता है। इसे शांति और सृजन का संदेशवाहक भी कहा गया है। मान्यता है कि संपूर्ण देवता कलश रूपी ब्रह्मांड में एक साथ समाहित होते हैं, जो एक ही शक्ति से संबंधित हैं।

वैदिक मंत्रों के अनुसार, कलश के मुख में विष्णु का निवास, कंठ में रुद्र तथा मूल में ब्रह्मा स्थित होते हैं। कलश के मध्य में समस्त मातृ शक्तियां निवास करती हैं। इसमें समस्त सागर, सप्तदीप, पृथ्वी, गायत्री, सावित्री, शांति तत्व, चारों वेद, आदित्य देव, विश्वदेव तथा पितृदेव समाहित माने जाते हैं, जो यज्ञ कर्म को सुचारू रूप से संपन्न कराने की शक्ति प्रदान करते हैं और अंत में आशीर्वाद देते हैं।

कलश में पवित्र जल भरा जाता है और ऊपर आम्र-पत्र रखे जाते हैं। इसके ऊपर मिट्टी के पात्र में केसर से रंगे हुए अक्षत रखे जाते हैं। इसका भाव यह है कि परमात्मा यहां अवतरित होकर पंचतत्व रूपी प्रकृति को शुद्ध करें और जीवन को पवित्रता प्रदान करें।

कलश में डाले जाने वाले दूर्वा, कुश, सुपारी और पुष्प इस भावना का प्रतीक हैं कि हमारी पात्रता में दूर्वा के समान जीवन शक्ति, कुश जैसी प्रखरता, सुपारी जैसी स्थिरता और पुष्प जैसा उल्लास समाहित हो।

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2 thoughts on “कलश स्थापना एवं महत्व

  1. कलश स्थापना का महत्व सुंदर वर्णन 🙏नवरात्रि पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं हार्दिक बधाई 🌹

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