Live Wire News literary portal with Gulmohar and Rajnigandha flowers

कायरों की भांति बैठना नहीं

वीर-रस की प्रेरणादायक हिंदी कविता का प्रतीकात्मक दृश्य

डॉ. कंचन जैन, प्रसिद्ध लेखिका

कायरों की भाँति बैठ, रोना तुझे शोभा नहीं,
बाधाओं के चक्रव्यूह, तोड़ आगे बढ़ना।
शूल हों या शंखनाद, पंथ में जो आ पड़े,
भीष्म बन काल की भी, आँखों में ही चढ़ना।।
रक्त का हो अर्घ्य चाहे, स्वेद का हो तर्पण,
लक्ष्य की समिधा में नित, प्राणों को ही जड़ना।
डरे जो तू हार से तो, जीत कैसे पाएगा?
रण के प्रपात बीच, निर्भय हो लड़ना।।
पत्थरों को चीर कर, गंग-धार फूटती है,
धैर्य का ही बंधु आज, मस्तक ये ऊँचा है।
सूरज को देख जो कि, बादलों में छिप जाए,
अंधियारे कक्ष में ही, जीवन को सींचा है।।
बाँध ले कमर तू अब, भाग्य को झुका दे आज,
कर्म की लेखनी से, भाल को तू बाँचना।
सिंह की दहाड़ भर, गीदड़ों के शोर में,
मृत्यु के कपाल पर, तांडव तू नाचना।।

हड्डियाँ गला के तू जो, वज्र को बनाएगा,
इंद्र का प्रहार भी फिर, तुच्छ जान पड़ता।
थक के न बैठ पथिक, भोर अब निकट है,
संघर्ष ही तो मनुज को, देव-तुल्य गढ़ता।।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *