महिला स्वास्थ्य पर महिला विमर्श कार्यक्रम संपन्न

उज्जैन से डॉ.प्रेरणा मनाना की रिपोर्ट

उज्जैन।
शासकीय कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय, उज्जैन एवं शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, महिला कार्य, उज्जैन के संयुक्त तत्वावधान में महिला विमर्श कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का विषय “महिला स्वास्थ्य: सर्वोच्च प्राथमिकता” रहा।

कार्यक्रम की सारस्वत अतिथि सुश्री शोभा ताई, राष्ट्रीय संयोजिका, महिला कार्य (शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास) ने कहा कि पोषण पर कम ध्यान दिए जाने के कारण आज लगभग 65 प्रतिशत महिलाएँ एनीमिया से पीड़ित हैं। उन्होंने कहा कि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का वास होता है, इसलिए महिलाओं का शारीरिक व मानसिक रूप से समग्र स्वास्थ्य अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि पोषण, दिनचर्या और शिक्षा की शुरुआत घर से ही होती है. “बेटी ब्याहो, बहू पढ़ाओ” जैसे विचार समाज को आगे ले जाते हैं।

विषय प्रवर्तन करते हुए प्रांत संयोजक महिला कार्य डॉ. प्रेरणा मनाना ने कहा कि यह समय महिलाओं की उपलब्धियों का उत्सव मनाने के साथ-साथ उन मुद्दों पर चर्चा का भी है, जो अक्सर अनदेखे रह जाते हैं, और उनमें सबसे महत्वपूर्ण है महिला स्वास्थ्य। उन्होंने कहा कि महिला स्वास्थ्य केवल एक व्यक्ति से जुड़ा विषय नहीं है, बल्कि यह राष्ट्र और समाज के समग्र विकास के लिए आवश्यक निवेश है। प्रोत्साहक और निवारक दोनों प्रकार की स्वास्थ्य सेवाएँ समान रूप से आवश्यक हैं।

अतिथि वक्ता डॉ. श्रीमती शिल्पा कोठारी, स्त्री रोग विशेषज्ञ, ने कहा कि किसी भी स्वास्थ्य समस्या में गूगल से सलाह लेने के बजाय चिकित्सक से परामर्श करना चाहिए। उन्होंने संतुलित भारतीय थाली, नियमित दिनचर्या और स्वस्थ जीवनशैली पर बल देते हुए कहा कि इससे हार्मोनल असंतुलन, पीसीओडी और बांझपन जैसी समस्याओं से निपटने में सहायता मिलती है।

अतिथि वक्ता फादर डॉ. एंटनी जोसफ, निदेशक, निर्मला कॉलेज, ने मानसिक स्वास्थ्य को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि मानसिक स्वास्थ्य का कोई पैथोलॉजिकल टेस्ट नहीं होता। इसे व्यक्ति के व्यक्तिगत संघर्ष, पारिवारिक और सामाजिक परिस्थितियों से समझा जाता है। अच्छे मानसिक स्वास्थ्य के लिए विचार, भावना और कर्म में सामंजस्य होना आवश्यक है।

अध्यक्षीय उद्बोधन में महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. प्रशांत पुराणिक ने कहा कि जागरूकता, सचेतनता और जानकारी के अभाव में ही समग्र स्वास्थ्य प्रभावित होता है। सचेत रहना ही अच्छे स्वास्थ्य की कुंजी है। जो स्वयं स्वस्थ होता है, वही दूसरों का भी बेहतर ध्यान रख सकता है।

कार्यक्रम का स्वागत वक्तव्य डॉ. नीता तपन ने दिया। सरस्वती वंदना संगीत विभाग की छात्राओं द्वारा प्रस्तुत की गई। अतिथि परिचय सावित्री महंत, डॉ. कीर्ति डीडी एवं आराधना गंधरा ने कराया। अतिथियों का स्वागत पुस्तक भेंट द्वारा डॉ. नीरज सारवान, डॉ. नीता तपन एवं समीक्षा व्यास ने किया। वंदे मातरम् का पूर्ण गायन सुश्री मनीषा व्यास द्वारा प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. अर्चना अखंड ने किया तथा आभार प्रदर्शन डॉ. रश्मि भार्गव ने माना।

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