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अधूरे पन्नों का सफ़र

कृष्णा तिवारी, लेखिका, कृति, बिरलाग्राम नागदा जंक्शन

अनवरत जारी

एक सफर

जीवन पुस्तक का 

अनुक्रमणिक

विस्तृत आसमान

असीमित धरती

भूत से भविष्य

निरंकुश चारों दिशाऐ

चल पड़ा मन

आशाओं की गठरी ले

अनजान सफ़र में

ज़ब चला अकेला 

पलट कर चाहा देखना

चेहरा भीड़ का

जों हजारों चेहरे से बना था

जिसमे नजर आए

शौक चिंता भय पीड़ा

क्रोध घृणा और

अल्प विराम ही

अल्पविराम 

खोज रही थी, पूर्ण विराम को

न मिलने पर पता चला

अभी अल्प विराम ही होंगें 

क्योंकि..

पुस्तक के कुछ पन्ने

पढ़ने अभी बाकी है।

3 thoughts on “अधूरे पन्नों का सफ़र

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